Advertisement

सूरजपुर ज़िले में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत कार्यशाला का हुआ आयोजन

सूरजपुर ज़िले में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत कार्यशाला का हुआ आयोजन

सूरजपुर/ केंद्र सरकार द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, देवनगर में बाल विवाह और बाल संरक्षण के विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को बाल विवाह की हानियों और बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूनिसेफ से राज्य बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्रीमती चेतना देसाई और राज्य सलाहकार श्री अभिषेक त्रिपाठी थे। इनके मार्गदर्शन में बाल संरक्षण, शिक्षा, और बाल विवाह रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
यूनिसेफ़ से राज्य बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्रीमती चेतना देसाई ने छात्रों को नारी शक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि एक नारी देश की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नारी सक्षम और समर्थ है। उन्होंने सावित्री बाई फुले के उदाहरण से बच्चों को प्रेरित करते हुए बताया कि शिक्षा के लिए संघर्ष करना कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई न केवल बच्चों के जीवन को सशक्त बनाती है, बल्कि बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों से बचने का मार्ग भी प्रदान करती है। देसाई जी ने शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
यूनिसेफ के राज्य सलाहकार अभिषेक त्रिपाठी ने बच्चों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों और उनके रोकथाम के लिए शिक्षा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यदि बालिकाएं 12वीं कक्षा तक अपनी शिक्षा पूर्ण करती हैं, तो 6ः बाल विवाह की दर को कम किया जा सकता है। उन्होंने बाल विवाह के कारण होने वाले शारीरिक और मानसिक प्रभावों पर प्रकाश डाला और हेल्पलाइन नंबर जैसे 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 181 (महिला हेल्पलाइन), और 112 (आपातकालीन हेल्पलाइन) की जानकारी साझा की।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने बच्चों को बाल एक सामाजिक कुरीति ही नहीं बल्कि अपराध है बाल विवाह होने पर दूल्हा और उसके घर वाले बाराती घराती विवाह में शामिल होने वाले, विवाह को संपन्न कराने वाले, सहयोग करने वाले, अनुमति देने वाले सभी के ऊपर अपराध कायम होता है बाल विवाह हो जाने पर दो वर्ष के सजा एवं एक लाख जुर्माना का प्रावधान है। जायसवाल ने बाल संरक्षण से संबंधित कानूनों और पॉक्सो अधिनियम के बारे में जागरूक किया। उन्होंने गुड टच और बैड टच की पहचान, और सुरक्षा के तीन उपाय – नो (विरोध करना), गो (घटना स्थल से भागना), और टेल (विश्वसनीय व्यक्ति को बताना) – की जानकारी दी। उन्होंने चुप्पी तोड़ो गतिविधि के माध्यम से बच्चों को किसी भी गलत घटना के बारे में खुलकर बोलने के लिए प्रेरित किया।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

यूनिसेफ के जिला समन्वयक प्रथमेश मानेकर ने बाल विवाह मुक्त सूरजपुर अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में बाल विवाह की दरें चिंताजनक हैं, और एनएफएचएस-5 के अनुसार सूरजपुर जिले में यह दर 34.4 है, जो छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक है। इसे समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। मानेकर जी ने छात्रों से अपील की कि वे बाल विवाह रोकथाम के एंबेसडर बनें और समाज में जागरूकता फैलाएं।

इस कार्यक्रम में यूनिसेफ से राज्य बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्रीमती चेतना देसाई, राज्य सलाहकार अभिषेक त्रिपाठी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल, यूनिसेफ के जिला समन्वयक प्रथमेश मानेकर, चाइल्ड हेल्पलाइन से परामर्शदाता शीतल सिंह, शिक्षक पवन धीवर, शासकीय उच्चतर माध्यमिकन विद्यालय, देवनगर के प्राचार्य, सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47