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नशीली पदार्थाे के प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी एवं कार्यवाही के निर्देश

नशीली पदार्थाे के प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी एवं कार्यवाही के निर्देश

गरियाबंद/ जिले में स्वापक औषधि मनः प्रभावी पदार्थाे या नशीली पदार्थाे के प्रभावी नियंत्रण के लिए आज कलेक्टर सभाकक्ष में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जिले के प्रभारी सचिव हिमशिखर गुप्ता वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने जिले में नशीली पदार्थाे के प्रभावी नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर रोकथाम की कार्यवाही के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिले में सक्रियता के साथ नशीली दवाईयों के रोकथाम के लिए कार्यवाही की जा रही है। साथ ही चेकपोस्ट, बैरियरों के द्वारा सघन निगरानी कर संदिग्ध वाहनों की भी जांच की जा रही है। प्रभारी सचिव श्री गुप्ता ने कहा कि जिले में नशीली पदार्थों के रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाएं जाए। साथ ही सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर सीमापार नशीली दवाइयों पर भी निगरानी रख कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि अंतर्राज्यीय बस ट्रांसपोर्ट एवं वाहनों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जाए। लक्जरी वाहनों में नशीली दवाईयों की सप्लाई की भी संभावना रहती है। ऐसे सभी संदिग्ध वाहनों की बैरियर में निगरानी रखकर रेण्डम चेकिंग की जाए। प्रभारी सचिव ने नशीली पदार्थाे के बारे में जागरूकता लाने एवं लोगों को इसके दुरूपयोग से दूर रहने के लिए आवश्यक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने बताया कि जिले में नशा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने विभागों के समन्वय से नशामुक्त अभियान चलाया जा रहा है। इसमें स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थी सहित स्वयं सेवी संस्थाओं को भी शामिल किया जा रहा है। बैठक में पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि जिले में नशीली पदार्थ रोकथाम के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार जांच नाकों और उड़नदस्ता दल के द्वारा वाहनों की जांच की जा रही है। संदिग्ध वाहनों पर विशेष निगरानी रख कर नशीली पदार्थों के संबंध में जांच की जा रही है। इस दौरान बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र चन्द्राकर, सहायक ड्रग कन्ट्रोलर संजय राजपूत सहित समन्वय समिति के सदस्यगण शामिल हुए।

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बैठक में सहायक ड्रग कन्ट्रोलर ने बताया कि नार्काेटिक्स एवं साईकोट्रॉपिक्स दवाईयां विशेष रूप से मरीजों के इलाज के लिए सीमित रूप में उपयोग की जाती है। यह दवाईयां केवल चिकित्सक के सलाह पर ही दी जाती है। इन दवाईयों को नशे के रूप में दुरूपयोग भी की जाती है। इससे लोगों को बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि नशीली पदार्थाे के रूप में उपयोग की जाने वाली दवाईयों में कोडीन फॉस्फेट कफ सिरप, डायजेपाम गोलियाँ, नाईट्राजेपाम टेबलेट, अल्प्राजोलम टेबलेट, ट्रॉमाडोल टेबलेट, पेंटाजोसिन इंजेक्शन, ब्यूप्रेनोर्फिन इंजेक्शन, ब्यूटोर्फिनॉल इंजेक्शन एवं डेक्सट्रोप्रोपॉक्सीफिन केप्स्युल शामिल है। उन्होंने इन दवाईयों को बिना डॉक्टर के सलाह के नहीं लेने की अपील की है।

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