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अब जरूरत के समय अपने बेटे के पढ़ाई के लिए पैसा भेज पाती है बालकुँवर

अब जरूरत के समय अपने बेटे के पढ़ाई के लिए पैसा भेज पाती है बालकुँवर

महतारी वंदन योजना ने मां और बेटे के रिश्तों को बनाया और मजबूत

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कोरबा / वैसे तो माँ की ममता अपने हर बेटों के लिए सदैव न्यौछावर होती है पर गरीबी से जूझ रही जब कोई माँ जरूरत के समय अपने बेटे का सहयोग न कर पाए तो निश्चित ही हर माँ का कलेजा कचोटता होगा..कुछ ऐसी ही स्थिति बालकुँवर की तब हो जाती थीं जब उसके हाथ में पैसे नहीं होते थे और घने जंगल से दूर उनका बेटा शहर में जाकर पढ़ाई करते हुए कुछ पैसे मांगता था। बेबस माँ चाहकर भी अपने बेटे की मदद नहीं कर पाती थीं। अब जबकि महतारी वंदन योजना से हर महीने बालकुँवर के खाते में एक हजार आता है तो वह कुछ बचत कर शहर में पढ़ाई कर रहे अपने बेटे को कुछ रुपये भेज पाती है।
पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक अंतर्गत सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत मेरई के आश्रित ग्राम धनवारा की रहने वाली बालकुँवर ने बताया कि जंगल में उनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। कभी-कभी ही मजदूरी का काम मिल पाता है। उनके पति रामायण सिंह भी घर के लिए बड़ी मुश्किल से राशि जुटा पाते हैं। उन्होंने बताया कि उनका एक बेटा सुखपाल सिंह कॉलेज की पढ़ाई करता है। वह विगत कई वर्षों से घर से बाहर ही पढ़ाई करता है। इससे पहले भी बड़ी मुश्किल से उसके लिए कुछ पैसे का बंदोबस्त हो पाया था। ठण्ड बढ़ने से जंगल से सूखी लकड़ी समेटकर घर को जाती हुई बालकुँवर बताती है कि कई बार आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वह बेटे के लिए पैसे का इंतजाम नहीं कर पाती थी,जबसे वह महतारी वंदन योजना से जुड़ी है तबसे पैसों की समस्या कुछ हद तक कम हुई है। उन्होंने बताया कि पहले एक पैसा हाथ में नहीं था,इसलिए कई बार बेटे के पैसा मांगे जाने पर वह सहयोग नहीं कर पाती थी। अब एक हजार की गारंटी हर माह होती है। बालकुँवर का कहना है कि उनकी इच्छा है कि बेटे की पढ़ाई पूरी हो जाए और वह अपने पैरों में खड़ा हो जाए। प्रत्येक माह महतारी वंदन योजना से राशि मिल जाने से खुश बालकुँवर ने इस योजना को गरीबों के लिए बड़ा कदम बताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि यदि यह योजना प्रारंभ नहीं हुई होती तो वह अपने बेटे के लिए जरूरत के समय कहा से रुपये जुटा पाती।

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