
Budget 2025-26 : 12 लाख रुपये की आय वाले करदाता को नई व्यवस्था में कर में 80 हजार रुपये का लाभ, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रतिक्रिया
Budget 2025-26 : 12 लाख रुपये की आय वाले करदाता को नई व्यवस्था में कर में 80 हजार रुपये का लाभ, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि नई व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये (यानी पूंजीगत लाभ जैसी विशेष दर आय के अलावा प्रति माह 1 लाख रुपये की औसत आय) तक कोई आयकर देय नहीं होगा।”
झूठे वादे, खोखले दावे का बजट – दीपक बैज
मोदी सरकार के बजट में कृषि, मनरेगा, रोजगार एवं छत्तीसगढ़ की उपेक्षा – भूपेश बघेल
12 लाख रुपये की आय वाले करदाता को नई व्यवस्था में कर में 80 हजार रुपये का लाभ मिलेगा। 18 लाख रुपये की आय वाले व्यक्ति को कर में 70 हजार रुपये मिलेंगे। 25 लाख रुपये की कमाई करने वाले व्यक्ति को 1.10 लाख रुपये का लाभ मिलता है।
रायपुर: शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छूट सीमा बढ़ाकर और स्लैब में बदलाव करके मध्यम वर्ग को राहत दी. नई कर व्यवस्था के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्ति को आयकर नहीं देना होगा। 75,000 रुपये की मानक कटौती को ध्यान में रखते हुए, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह सालाना शून्य कर सीमा 12.75 लाख रुपये होगी। नवीन आयकर कानून में अधिक छूट और बदलाव किए गए हैं।
“नई संरचना मध्यम वर्ग के करों को काफी हद तक कम कर देगी और उनके हाथों में अधिक पैसा छोड़ेगी, जिससे घरेलू खपत, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा,” सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा।इस बदलाव के अनुसार, 12 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय वाले व्यक्ति को 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा; 4 से 8 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत कर लगेगा; 8 से 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत कर लगेगा और 12 से 16 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत कर लगेगा। 16 से 20 लाख रुपये की आय पर 20 प्रतिशत कर लगेगा; 20 से 24 लाख रुपये की आय पर 25 प्रतिशत कर लगेगा; और 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर लगेगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्रीय बजट पर कहा कि यह निराशाजनक है और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा। वास्तविक जीडीपी ग्रोथ दर 7% से कम थी, लेकिन अनुमान था 8–9%। वर्तमान मोदी सरकार का पूरा ध्यान अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बिहार चुनावों पर है। बिहार के खाने के लिए ही मखाना बोर्ड? भाजपा सरकार बाकी देश के किसानों को नहीं देखती। AIMS का अपोजिट छत्तीसगढ़ की नई राजधानी में पिछले तीन वर्षों से बंद है। उसके लिए भी इस बजट में कोई व्यवस्था नहीं है। रायपुर-बलौदा की नई रेल लाइन का सर्वे अब तक पूरा नहीं हुआ है, जिसमें रावघाट भी शामिल है। इस बजट में बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहे लोगों के लिए कोई स्पष्ट राहत रियायत या सब्सिडी नहीं है। केंद्रीय विभागों, नवरत्न कंपनियों और सरकारी संस्थानों में लाखों रिक्त पदों को भरने के लिए कोई कार्यक्रम नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि देश के किसानों की केवल दो प्रमुख मांग हैं। स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की कि एसपी लागत पर 50 प्रतिशत लाभ पर निर्धारित होना चाहिए था और देश के हर किसान को एसपी की कानूनी गारंटी दी जानी चाहिए थी। मोदी सरकार के बजट ने फिर से किसानों को ठगा है। किसानों को केवल क्रेडिट कार्ड से अधिक ऋण मिलने से फायदा नहीं होगा।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बेसिक एक्सेंप्शन लिमिट और रिपोर्ट 87 में फर्क है। टैक्स स्लैब में नए रिजिम देने वालों के लिए बेसिक एक्जंसन लिमिट में सिर्फ एक लाख (तीन से चार लाख) की बढ़ोतरी की गई है। 12 लाख रुपये से अधिक की आय वाले व्यक्ति को चार लाख रुपये से अधिक की आय पर टैक्स देना होगा। यदि बेसिक एग्जामिनेशन लिमिट को 12 लाख से बढ़ाकर रिबेट किया गया होता तो सभी टैक्स पेयर इससे फायदा उठाते. हालांकि, सरकार सिर्फ झूठे सपने देखती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एमएसएमई के नाम पर एक बार फिर झूठ बोला गया। केंद्रीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश छोटे और मध्यम उद्यम (MSME) दो साल के भीतर बंद हो जाएंगे. हालांकि, सरकार वित्तीय संस्थानों को दिए जाने वाले कर्ज की सीमा बढ़ाकर अपने पैसे बचाने में लगी हुई है। आजाद घाटों पर निर्भरता निरंतर बढ़ी है। छोटे और मध्यम उद्योगों को सिर्फ कुछ अमीर पूंजीपतिों की मदद मिलती है। इस बजट में महंगाई और रोजगार को कम करने का कोई लक्ष्य नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आम जनता बहुत निराश है। निवेशक बाजार से पैसे निकाल रहे हैं, जबकि शेयर बाजार बंद है। डॉलर 86 रुपए 70 पैसे से अधिक है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर जनता का भरोसा टूट चुका है और बाजार लगातार गिर रहा है!मोदी सरकार के बजट से देश का हर वर्ग निराश है, ऐसा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है। इस बजट में मिडल, लोअर मिडल, गरीब, किसान, मजदूर और युवा लोगों के लिए कुछ भी नहीं है। यह बजट अव्यावहारिक, अन्यायपूर्ण और मिडिल क्लास के खिलाफ है।मोदी सरकार के इस बजट में युवा रोजगार का कोई प्रावधान नहीं है, ऐसा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है। यह सरकार केवल मुंगेरीलाल के सुंदर सपने दिखा रही है; निवेशक नए निवेश से घबरा रहे हैं; पूर्व में संचालित उद्योग; व्यापार चलाना मुश्किल हो रहा है।मोदी सरकार के बजट में पीएम कृषि योजना को लागू करने की घोषणा की गई है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि एमएसपी को किसानों की पूरी कीमत मिलने के लिए कोई कानून नहीं है। बजट में कृषि ऋण माफी के बारे में भी कुछ नहीं है। PM फसल बीमा योजना को बेहतर बनाने के लिए कुछ नहीं है। मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होती, न ही मजदूरी बढ़ाने की घोषणा की जाती है। रोजगार बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। युवा लोगों को रोजगार के नए अवसर कैसे मिलेंगे? इस बजट में कुछ भी नहीं बताया गया है। बजट में कुछ महिलाओं के लिए नहीं है।
टीएस सिंहदेव पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बजट भाजपा से अपेक्षा अनुरूप – निराशाजनक! – युवाओं के लिए रोज़गार बनाने वाली कोई योजना नहीं गरीबों की आर्थिक उन्नति के लिए कोई उपाय नहीं – दलितों, आदिवासियों, वंचितों के उत्थान की फिर से कोई कोशिश नहीं – किसानों की आय न बढ़ने पाए इसकी जरूर पूरी कोशिश है मनरेगा के बजट में कोई बढ़त नहीं, करोड़ों बेरोजगारों का सहारा भाजपा को ज़रूरी नहीं दिखता GST उतना ही पेचीदा की आम जन से ले कर छोटे व्यापारी बस कर देते जाएं, इस अन्याय कभी समझ न पाएं भाजपा ने फिर वही किया जिसके लिए वो जानी जाती है – अमीरों की तरफदारी, गरीबों की उपेक्षा!
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने केंद्रीय बजट 2025–26 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह बजट सामाजिक न्याय और आम जनता की उम्मीदों के खिलाफ है। देश की जनता ने प्रधानमंत्री के आवास, जल जीवन मिशन, खाद्य सब्सिडी, खाद्य सब्सिडी और मनरेगा के बजट में भारी कटौती करके धोखा खाया है। बजट लगभग सभी जन कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को दिया गया है। यह सरकार किसानों को लगातार धोखा देती है पिछले बजट से उर्वरक सब्सिडी में 3412 करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जो 171299 करोड़ रुपये से घटाकर 167887 करोड़ रुपये हो गया है। खाद्य सब्सिडी 205250 करोड़ से 203420 करोड़, या 1830 खाद्य सब्सिडी में 1830 करोड़ की कमी हुई है, जो 205250 करोड़ से 203420 करोड़ हो गई थी। सीधे 2600 करोड़ रुपये की कमी, पेट्रोलियम सब्सिडी को 14700 करोड़ रुपये से 12100 करोड़ रुपये कर दिया गया। कुल बजट का सिर्फ 1.94 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च होता है। 2024–2025 के बजट अनुमान में कुल व्यय 1111111 था, लेकिन अब 1018429 है। IT और दूरसंचार क्षेत्र का बजट लगभग २० प्रतिशत घट गया है। 117869 से सिर्फ 95298 करोड़ (सीधे 22541 करोड़) कम हुए हैं। 21336 करोड़ रुपये की कर प्रशासन की कटौती अव्यावहारिक है।इस बजट में मोदी सरकार ने मध्यमवर्ग को एक बार फिर ठगा है, जैसा कि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा। नए टैक्स रिजिम देने वाले के लिए आयकर की निर्धारित मूल्य सीमा 3 लाख से 4 लाख तक बढ़ा दी गई है। बेसिक एक्जम्पशन लिमिट और 87 रिबेट अलग हैं। यदि बेसिक एक्जम्पशन लिमिट बढ़ाया जाता तो सभी आयकर दाताओं को फायदा होता। GDP विकास दर अपेक्षाकृत कम है। रोजगार वृद्धि का कोई लक्ष्य नहीं है। एमएसएमई को लेकर सरकार का दावा झूठा है। वास्तव में, अधिकांश छोटे उद्यम तीन साल के भीतर बंद हो जाएंगे।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि आज का बजट मोदी सरकार की आर्थिक विफलता का प्रमाण है। मोदी सरकार ने देश का कर्ज बढ़ा दिया है। यह सरकार इस साल 1566452 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है, जो 2014 की तुलना में देश पर तीन गुना अधिक कर्ज देने के बावजूद, इस बजट में आय का मुख्य स्रोत है, जो कुल प्राप्तियों का 24 प्रतिशत है। मोदी सरकार की आर्थिक दुर्लभता 1563936 का भारी राजकोषीय घाटा है। ब्याज का भुगतान ही व्यय का २० प्रतिशत है। यह बजट मोदी सरकार ने देश को कर्ज में डाल दिया है
प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा 2025 का केंद्रीय बजट मोदी सरकार की अदूरदर्शिता का प्रमाण है। कि देश की जनता इस बजट से निराश है। यह बजट दिखाता है कि मोदी सरकार के अगले साल भी देश की जनता को फायदा नहीं होगा; इसमें कोई दूरदर्शिता नहीं है। इस बजट से हर कोई अपमानित महसूस कर रहा है, चाहे युवा हो या किसान हो या मजदूर हो। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पीएम कृषि योजना को लागू करने की चर्चा की गई है, लेकिन एमएसपी को किसानों की पूरी कीमत मिलने के लिए कोई कानून नहीं है। बजट में कृषि ऋण माफी पर भी कुछ नहीं है। PM फसल बीमा योजना में कोई सुधार नहीं है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी और मजदूरी नहीं बढ़ाई जाएगी। मनरेगा के बजट में कमी आई। रोजगार बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है। युवाओं को नौकरी के नए अवसर कैसे मिलेंगे? इस बजट में कोई घोषणा नहीं की गई है। बजट में महिलाओं के लिए कुछ नहीं है। मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में जनकल्याणकारी योजनाएं नहीं हैं; खाद्य सब्सिडी, मनरेगा; MSP की गारंटी; और सामाजिक सुरक्षा और स्वामीनाथन कमेटी के अनुसार MSP।और सामाजिक सुरक्षा के मद में कोई विशेष प्रावधान नहीं है।प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि देश के युवा अब रोजगार की उम्मीद भी छोड़ चुके हैं और महिलाओं की कार्यशक्ति में भागीदारी लगातार कम हो रही है। किसानों की आय दुगुनी करने का दावा किया गया था, लेकिन उनकी आमदनी लगातार कम होती जा रही है, उनका कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है और लगातार किसानों की आत्महत्या की खबरें आ रही हैं। भाजपा की जुमला नीति से महंगाई की मार लगातार बढ़ती जा रही है. इस बजट में न तो गैस सिलेंडर की कीमतें कम हुईं और न ही खाद्य पदार्थों की कीमतें कम करने की कोई कोशिश की गई है. बचतखाली होती जा रही है अपना घर चलाने के लिए भी लोगो को जद्दोजहद करना पड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पिछले 11 सालों में केंद्र सरकार ने देश की आम जनता से डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज के रूप में 36 लाख करोड़ रुपए वसूले हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 30 से 40 प्रतिशत गिर गई है। 2014 की तुलना में क्रूड आयल का मूल्य लगभग आधा है। इस बजट में पेट्रोलियम उत्पाद पर सेंट्रल एक्साइज में रियायत का कोई प्रस्ताव नहीं है।
डबल इंजन की सरकार में मदद का वादा हुआ खोखला चालू वित्त वर्ष में भी राज्य के ऊपर 40,000 करोड़ का कर्ज बढ़ेगा : धनंजय सिंह ठाकुर
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़ के लिए कोई आर्थिक मदद की व्यवस्था नहीं की गई है। मोदी 3.0 के पहले बजट में भी मोदी की गारंटी और वादा को पूरा करने के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं किया गया था जिसका ही दुष्परिणाम है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार को 1 साल में 45,000 करोड़ का कर्ज लेना पड़ा था। अभी के बजट में भी कोई आर्थिक मदद की गुंजाइश नहीं दिख रही है इससे लग रहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार चालू वित्तीय वर्ष में फिर एक साल में कम से कम 40,000 करोड रुपए कर्ज लेंगी इसे छत्तीसगढ़ में कर्ज भार फिर बढ़ेगा।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में डबल आर्थिक मदद का वादा था जो पूरा नहीं हो रहा है, मोदी के गारंटी प्रदेश के हर वर्ग को भारी पड़ रहे, भाजपा की सरकार अपने बड़े नेता को खुश करने के लिए उनकी गारंटी को पूरा करने के लिए कर्ज पर कर्ज ले रहे हैं, इससे प्रदेश के विकास कार्य शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य मूलभूत की सुविधा की योजनाएं प्रभावित हो रही है। प्रदेश के 3 करोड़ से अधिक जनता के ऊपर कर्ज भार बढ़ रहा।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की जनता केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़ के लिए विशेष आर्थिक प्रावधान की उम्मीद कर रही थी, उन उम्मीदों को तोड़ने का काम डबल इंजन की सरकार ने किया है। बिहार को तो मदद किया जा रहा है पर छत्तीसगढ़ के साथ भेदभाव किया जा रहा है। क्या छत्तीसगढ़ की जनता ने भाजपा की सरकार चुनकर कोई अपराध कर लिया है? केंद्रीय बजट छत्तीसगढ़ के लिए निराशाजनक और हताशा में डालने वाला रहा है।
केंद्रीय बजट में महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं – वंदना राजपूत
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने केंद्रीय बजट को जन अपेक्षा के विपरीत निराशाजनक बजट का दावा किया है और कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं। छत्तीसगढ़ की खनिज देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़िया के लिए कुछ भी नहीं। बजट का महिलाएं बेसब्री से प्रतीक्षा करती रहती है कि महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही है तो महिलाओं के लिए बजट की पिटारा में बहुत कुछ निकलेगा, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी बजट के पिटारा में महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं निकला। इस बजट में बेलगाम महंगाई से राहत पाने की उम्मीद लगा करके महिलाएं बैठी थी, लेकिन महंगाई से राहत या महंगाई को नियंत्रण करने की कोई योजना इस बजट में नहीं।प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर बजट में कोई प्रावधान नहीं और साथ ही मेंटल हेल्थ को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेता लेकिन केंद्रीय बजट में मेंटल हेल्थ का जिक्र भी नहीं।प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पिछले बजट को देखें तो पीएम पोषण शक्ति निर्माण में अनुमानित बजट 12467 करोड़ था, लेकिन इसमें 2467 करोड़ की कटौती की गई है। जल जीवन मिशन भारतीय जनता पार्टी की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना में पिछले बजट में 70163 करोड़ का बजट था और कटौती 47469 करोड़ किया गया। सक्षम आंगनबाड़ी में अनुमानित बजट 21200 करोड़ रूपया था। जबकि कटौती 1129 करोड़ किया गया। बजट कागज में कुछ और दिखता है और धरातल तक आने में बहुत कुछ परिवर्तन हो जाता है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय गंगवानी ने कहा कि आज वित्त मंत्री द्वारा देश का आम बजट पेश किया गया. वर्तमान समय में देश में महंगाई और बेरोजगारी और आर्थिक असमानता चरम पर है. इस बजट से देश की आम जनता, किसान, गरीब, मजदूर, महिला और युवा वर्ग को एक उम्मीद और एक आस लगाकर बैठे थे कि इस बजट में उसके लिए कुछ खास होगा, सरकार कुछ जनकल्याणकारी योजनाएं लेकर आएगी, देश में रोजगार सृजन का ब्लूप्रिंट लेकर आएगी, आम जनता की जेब में सीधा पैसा डालकर उनको आर्थिक रूप से संबल देने करने का काम करेगी परंतु यह बजट आम जनता की उम्मीद और अपेक्षाओं के पूरी तरह विपरीत निकला, केंद्रीय बजट का पिटारा पूरी तरह खाली है. इस बजट से देश की आम जनता और हर वर्ग पूरी तरह निराश और हताश है. देश का बजट सिर्फ आय और व्यय का ब्यौरा नहीं होता, बल्कि यह वर्तमान सरकार का “पॉलिसी डॉक्युमेंट“ होता है, जो यह बताता है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में सरकार आम जनता के हितों के लिए किस प्रकार से काम करेगी, क्या ब्लूप्रिंट और क्या कार्य योजना होगी, परंतु यह बजट पूरी तरह से बिना रोडमैप का दिशाहीन और उद्देश्य विहीन बजट है. एक सर्वे के अनुसार देश की 86 प्रतिशत जनसंख्या चाहती थी कि आयकर छूट बेसिक लिमिट को 2.50 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जाये, पिछले 10 सालों में इन्फ्लेशन दुगने से भी ज्यादा हो चुका है, परंतु केंद्र की मोदी सरकार 11सालों में लिमिट 1 रूपए भी बढ़ाने के लिए तैयार नहीं सिर्फ न्यू टैक्स रिजिम में लिमिट को 3 लाख से बढ़कर 4 लाख किया गया है लेकिन न्यू रिजिम में बहुत सारी छूट का लाभ आयकर दाता को नहीं मिल पाता, केंद्र सरकार की नियत नीति और मंशा पूरी तरह स्पष्ट है वह देश के आम नागरिक को कोई सीधा फायदा देने का कोई प्रयास नहीं करना चाहती. देश में विकराल बेरोजगारी,बढ़ती महंगाई और बढ़ती आर्थिक समानता से निपटने के लिए कोई ठोस कदम इस बजट में नहीं उठाया गया है. बढ़ती महंगाई के चलते देश के गरीब आदमी की परचेसिंग कैपेसिटी में 69 प्रतिशत और मिडिल क्लास की परचेसिंग कैपेसिटी में 30 प्रतिशत की कमी आई है परंतु केंद्र की मोदी सरकार महंगाई से निपटने के लिए कोई प्रयास नहीं करना चाहती.आयकर में सेक्शन 80-सी के अंतर्गत निवेश पर मिलने वाली छूट को भी 1.5 लाख रुपए से 1 रूपए भी नहीं बढ़ाया गया, जबकि देश के वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक और सी.ए एसोसिएशन इसे बढ़ाकर 3 लाख करने की अनुशंसा कर रहे थे. देश के हर आम आदमी का एक सपना होता है की उसका स्वयं का घर हो, घर बनाना दिन प्रतिदिन महँगा होते जा रहा, आम आदमी के हित के लिए होम लोन पर ब्याज की छूट को 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने की आवश्यकता थी परन्तु उस लिमिट में भी कोई वृद्धि नहीं की गई. इंश्योरेंस कंपनियां मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि कर चुके हैं परन्तु केंद्र सरकार सेक्शन 80-डी के अंतर्गत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम की मिलने वाली छूट की लिमिट को भी 25000 रू. से बढ़ाने के लिये तैयार नहीं।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अजय गंगवानी ने कहा कि इस बजट में छत्तीसगढ़ की जनता को फिर एक बार निराश किया, ना छत्तीसगढ़ के लिए कोई नई योजना, ना कोई विशेष पैकेज, ना कोई फायदे की बात, छत्तीसगढ़ की जनता को फिर से एक बार इस बार के केंद्रीय बजट में छला गया और छत्तीसगढ़ की जनता खाली हाथ रही..ना कोई नई योजना, ना कोई विशेष पैकेज. बिहार में अक्टूबर नवंबर में विधानसभा चुनाव है, चुनावी फायदे, व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि और राजनीतिक हितों को साधने बिहार के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणाएं की गई है. यह बजट देश के आम नागरिक के फायदे का ना होकर सिर्फ और सिर्फ भाजपा को फायदा पहुंचाने वाला चुनावी बजट बनकर रह गया है.है छत्तीसगढ़ में भाजपा का डबल इंजन की सरकार का दावा फिर एक बार जुमला साबित हुआ।लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस के घोषणा पत्र में युवा न्याय के माध्यम से ग्रेजुएट या डिप्लोमा धारी युवाओं को निजी एवं सरकारी कंपनियों में इंटर्नशिप के माध्यम से रोजगार की बात की गई थी, इसी योजना को केंद्रीय बजट में कॉपी किया गया है.
देश की 42 प्रतिशत जनसंख्या किसानी कार्य से जुड़ी है इस बजट में ना किसानों को एमएसपी की गारंटी दी गयी, ना फसल बीमा सुधार के कोई व्यवस्था. देश में लगभग कुल 4 प्रतिशत के आसपास सरकारी कर्मचारी हैं और और लगभग 4.50 प्रतिशत के आसपास प्राइवेट नौकरी में कुल 8.50 प्रतिशत के आसपास नौकरीपेशा है. 91 प्रतिशत लोगों की अनदेखी की गयी है. केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में देश का आम आदमी न होकर कॉर्पोरेट और उनके पूंजीपति मित्र है. प्रधानमंत्री आवास के बजट में 40 प्रतिशत की कटौती, जल जीवन मिशन में 67 प्रतिशत की कटौती, कृषि बजट में 7 प्रतिशत की कटौती, शिक्षा के बजट में 9 प्रतिशत की कटौती इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है.
आदित्येश्वर शरण सिंहदेव जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने बजट प्रस्ताव के मध्यम से स्पष्ट हो गया कि मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है। आज तक के अपने सबसे छोटे बजट भाषण में सरकार ऐसे कोई उपाय नहीं ला पाई जो आम जनता के परचेजिंग पावर को बढ़ाने में मदद करेगा। आयकर की छूट दिखावटी है। बजट में महंगाई को नियंत्रित करने वाले उपाय नदारद हैं। ये आम नहीं खास जनता का बजट है।
डॉ अजय तिर्की निवर्तमान महापौर अम्बिकापुर ने बजट में ऐसी कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई है जो स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरीकरण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो। इस बजट और इस सरकार के भरोसे 2047 तक देश के विकसित राष्ट्र बनने की कोई संभावना नहीं है।
शफी अहमद पूर्व अध्यक्ष, श्रम कल्याण बोर्ड ने बजट में बेरोजगारी दूर करने को लेकर कोई ठोस योजना नहीं है जबकि देश मे यह एक बड़ी समस्या बन चुकी है। बजट यह भी बतलाता है कि किसानों की आमदनी दुगनी करने के उसके वायदे खोखले थे। बजट में फिर से किसानों को सब्जबाग दिखलाया गया है। एम एस पी बढ़ाने को लेकर बजट में कोई ठोस नीति नहीं है। कुलमिलाकर बजट ने किसानों और बेरोजगार युवाओं को छला है।
राकेश गुप्ता जिलाध्यक्ष, कांग्रेस बजट में भारत के मध्यम और गरीब वर्ग को इन डायरेक्ट टैक्स में कोई भी राहत नही मिला, महंगाई-बेरोजगारी के बारे में राहत की कोई बात नहीं है। ना एमएसपी में गारंटी- ना ही प्रचलित फसलों को लेकर कोई बड़ी घोषणा हुई। आज भी भारतीय किसान प्रतिमाह 13661/- रुपये प्रति माह कमा रहे हैं, जो सरकारी आंकड़ा है कृषि प्रधान देश मे लगातार 11 वर्षो से किसानों को नज़र अंदाज किया जा रहा है।








