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“छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि: आस्था, भक्ति और भव्य मेलों का संगम”

“छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि: आस्था, भक्ति और भव्य मेलों का संगम”

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छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व यहां की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस दिन प्रदेशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और मेलों का आयोजन किया जाता है।

1. महाशिवरात्रि का महापर्व कैसे मनाया जाता है?

(1) उपवास और पूजा-अर्चना

श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं और शिव भक्त, इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं।

मंदिरों में भगवान शिव का जल, दूध, शहद, दही, बेलपत्र, धतूरा और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।

पूरे दिन और रात “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जाता है।

शिव पुराण का पाठ और भगवान शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है।

(2) रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन

महाशिवरात्रि की रात को जागरण, शिव भजन और कीर्तन का आयोजन होता है।

कई जगहों पर शिव तांडव स्तोत्र और रुद्राभिषेक का पाठ किया जाता है।

(3) शिव-पार्वती विवाह का आयोजन

महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के रूप में भी मनाया जाता है।

मंदिरों में शिव-पार्वती विवाह की झांकी निकाली जाती है।

नवविवाहित और अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं।

(4) भंडारे और सेवा कार्य

मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर भंडारे और अन्नदान का आयोजन किया जाता है।

श्रद्धालु गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करते हैं।

2. छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि पर प्रमुख मेले और आयोजन

महाशिवरात्रि के अवसर पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बड़े स्तर पर मेले लगते हैं। ये मेले धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र होते हैं।

(1) राजिम माघी पुन्नी मेला (राजिम, गरियाबंद)

छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा धार्मिक मेला राजिम में महानदी के तट पर आयोजित किया जाता है।

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इसे छत्तीसगढ़ का कुंभ मेला भी कहा जाता है।

यहाँ संत-महात्माओं का जमावड़ा लगता है और भक्त पवित्र स्नान कर भगवान शिव की पूजा करते हैं।

(2) महादेव घाट मेला (रायपुर)

रायपुर के महादेव घाट शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर भव्य आयोजन होता है।

यहाँ भक्तजन बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं।

(3) भीमकुंड मेला (बस्तर)

बस्तर के नारायणपुर जिले में स्थित भीमकुंड में महाशिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है।

इस दिन हजारों श्रद्धालु कुंड में स्नान कर शिवलिंग की पूजा करते हैं।

(4) टाटीबंध शिव मंदिर मेला (रायपुर)

रायपुर के टाटीबंध स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

यहाँ रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का विशेष आयोजन होता है।

(5) देवपहरी शिव मंदिर मेला (कोरबा)

कोरबा जिले में देवपहरी शिव मंदिर में भक्तजन शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।

यहाँ पारंपरिक गौरा-गौरी पूजा और शिव भजन संध्या का आयोजन किया जाता है।

(6) शिवरीनारायण मेला (जांजगीर-चांपा)

शिवरीनारायण तीर्थ में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा होती है।

यहाँ महाशिवरात्रि पर भव्य मेला और कथा-सत्संग का आयोजन किया जाता है।

(7) कुदुरमाल शिव मंदिर मेला (बिलासपुर)

बिलासपुर के कुदुरमाल शिव मंदिर में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक करने आते हैं।

यहाँ परंपरागत लोक नृत्य और गीतों का विशेष आयोजन होता है।

छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि का पर्व धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, जागरण, और भंडारे का आयोजन किया जाता है। प्रदेश के राजिम, रायपुर, बस्तर, कोरबा और बिलासपुर जैसे स्थानों पर भव्य मेले लगते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। महाशिवरात्रि का यह उत्सव न केवल आध्यात्मिक बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी संजोने का कार्य करता है।

Ashish Sinha

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