“गंगाजल से शुद्धिकरण या नफरत की राजनीति? अंबिकापुर में महापौर के बयान पर हंगामा!”

“गंगाजल से शुद्धिकरण या नफरत की राजनीति? अंबिकापुर में महापौर के बयान पर हंगामा!”

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अंबिकापुर। नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर मंजूषा भगत के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि नगर निगम के पिछले दस वर्षों के कार्यकाल में अशुद्धियां फैल गई हैं, जिसे दूर करने के लिए वह कुंभ से लाए गए गंगाजल का छिड़काव करेंगी। इसके साथ ही उन्होंने खुद को नगर निगम की “पहली हिंदू महापौर” बताते हुए यह भी कहा कि पूर्व में महापौर द्वारा इस्तेमाल की गई कुर्सी और टेबल को हटाकर नई कुर्सी-टेबल लगाई जाएगी। उनके इस बयान पर जिला कांग्रेस कमेटी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे नफरत फैलाने वाला और समाज में विभाजन पैदा करने वाला करार दिया है।

कांग्रेस का ऐतराज: ‘महापौर का बयान नफरत भरा’

जिला कांग्रेस कमेटी ने महापौर मंजूषा भगत के इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी खतरनाक है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि महापौर का बयान छुआछूत और नफरत को बढ़ावा देता है, जो भारतीय लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “नगर निगम कोई धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक संस्था है, जहां सभी धर्मों, जातियों और वर्गों के लोग मिलकर काम करते हैं। महापौर का यह कहना कि निगम में अशुद्धियां फैल गई हैं और उसे गंगाजल से शुद्ध किया जाएगा, स्पष्ट रूप से पिछली सरकार के कार्यों और जनप्रतिनिधियों का अपमान है।”

भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप

जिला कांग्रेस कमेटी ने इसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि भाजपा लगातार सामाजिक और धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने का काम कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अंबिकापुर नगर निगम का नेतृत्व पहले भी बेहद सम्मानित और सौम्य व्यक्तित्व वाले जनप्रतिनिधियों के हाथ में रहा है।

उन्होंने कहा, “पिछले दस वर्षों में महापौर डॉ. अजय तिर्की ने अपनी ईमानदार और संवेदनशील छवि से शहर की सेवा की है। वह एक चिकित्सक होने के नाते भी हमेशा जनसेवा में लगे रहे हैं। उनसे पहले प्रबोध मिंज भी नगर निगम का नेतृत्व कर चुके हैं। दोनों ही उरांव जनजाति से आते हैं और सरगुजा की सम्मानित और प्रगतिशील समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन नवनिर्वाचित महापौर का यह बयान सीधे तौर पर इन दोनों जनप्रतिनिधियों का अपमान करता है।”

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कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर डॉ. अजय तिर्की और प्रबोध मिंज के महापौर रहने से नगर निगम “अशुद्ध” हो गया, तो क्या छत्तीसगढ़ विधानसभा भी “अशुद्ध” हो गया है, जहां से प्रबोध मिंज भाजपा के विधायक हैं?

कांग्रेस ने मांग की है कि महापौर मंजूषा भगत को अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करती हैं, तो कांग्रेस पार्षद शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करेंगे।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “लोकतंत्र में सभी जनप्रतिनिधियों का सम्मान जरूरी है। महापौर को किसी भी सदन की गरिमा को बनाए रखना चाहिए। लेकिन उनके इस बयान से समाज में असहमति और नफरत बढ़ाने का संकेत मिलता है। अगर वह अपने बयान पर कायम रहती हैं, तो कांग्रेस इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार करेगी।”

महापौर के बयान से शहर में असंतोष

महापौर के बयान को लेकर न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम जनता के बीच भी असंतोष है। शहर के कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस बयान की आलोचना की है।

एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “महापौर को पूरे शहर का प्रतिनिधित्व करना होता है, न कि किसी विशेष समुदाय का। उनके इस बयान से न केवल राजनीतिक मतभेद बढ़ेंगे, बल्कि शहर का सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित होगा।”

आगे की रणनीति पर विचार कर रही कांग्रेस

जिला कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को हल्के में नहीं लेगी और आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है। कांग्रेस ने कहा है कि जल्द ही इस मुद्दे को लेकर कानूनी सलाह ली जाएगी और जरूरत पड़ी तो कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।

कुल मिलाकर, अंबिकापुर की राजनीति में इस बयान के बाद हलचल मच गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महापौर अपने बयान पर कायम रहती हैं या कांग्रेस के दबाव में आकर माफी मांगती हैं। वहीं, अगर कांग्रेस अपने बहिष्कार की धमकी को अमल में लाती है, तो शपथ ग्रहण समारोह का स्वरूप भी प्रभावित हो सकता है।