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छत्तीसगढ़ में शराबबंदी पर भाजपा सरकार की चुप्पी: कांग्रेस का हमला

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी पर भाजपा सरकार की चुप्पी: कांग्रेस का हमला

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छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार की नई शराब नीति (2025-26) को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया है कि सरकार शराबबंदी के बजाय शराब की बिक्री बढ़ाने में लगी हुई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भाजपा, जिसने चुनाव से पहले पूर्ण शराबबंदी का वादा किया था, अब चुप क्यों है? कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार पर शराब के नाम पर भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी का आरोप लगाया है।

इस लेख में हम भाजपा सरकार की नई शराब नीति, कांग्रेस के आरोप, शराबबंदी की स्थिति, सरकारी नीतियों की समीक्षा और शराबबंदी पर राजनीति के प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।

भाजपा सरकार की नई शराब नीति: बिक्री बढ़ाने का प्रयास?

प्रदेश सरकार ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई शराब नीति घोषित की है। कांग्रेस का दावा है कि यह नीति शराब की खपत और बिक्री बढ़ाने का प्रयास है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

1. शराब दुकानों की संख्या बरकरार:

नई नीति में शराब दुकानों की संख्या कम नहीं की गई है। इस साल भी 674 सरकारी शराब दुकानें खुली रहेंगी।

कांग्रेस का आरोप है कि यह शराब की बिक्री को नियंत्रित करने के बजाय उसे बढ़ावा देने की रणनीति है।

2. विदेशी शराब पर करों में छूट:

सरकार ने विदेशी शराब पर लगने वाले अतिरिक्त कर (9.5%) को कम कर दिया है।

कांग्रेस का आरोप है कि इसका उद्देश्य शराब की बिक्री को बढ़ावा देना और सरकार का मुनाफा बढ़ाना है।

3. शराब की काला बाज़ारी को बढ़ावा:

कांग्रेस के अनुसार, शराब की अवैध बिक्री को सरकार का संरक्षण प्राप्त है।

राजनांदगांव सहित कई जिलों से रिपोर्ट आई है कि दुकानों से 200 रुपये प्रति पेटी अतिरिक्त लेकर शराब को गली-मोहल्लों में बेचा जा रहा है।

आहाते और सरकार की भूमिका

सरकार ने पहले भी शराब बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए आहातों (शराब पीने के लिए विशेष स्थान) को बढ़ावा दिया था।

1. एयर-कूल्ड आहाते:

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने एयर-कूल्ड आहाते बनाकर शराब की बिक्री को और बढ़ाने का प्रयास किया है।

यह आहाते प्रभावशाली भाजपा नेताओं के संरक्षण में संचालित हो रहे हैं।

2. भाजपा नेताओं की संलिप्तता:

कांग्रेस का कहना है कि शराब की बिक्री से होने वाले मुनाफे को भाजपा नेताओं और उनके करीबियों को देने की कोशिश की जा रही है।

चिन्हित लोगों को विशेष रूप से आहाते आवंटित किए गए हैं।

3. वसूली और कमीशनखोरी:

दुकानों में कौन-सी शराब बिकेगी और किन ब्रांड्स को अनुमति दी जाएगी, इस पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उच्च स्तर के लोग इस कमीशनखोरी में शामिल हैं।

भाजपा का शराबबंदी पर वादा और कांग्रेस के सवाल

चुनावों के दौरान भाजपा ने पूर्ण शराबबंदी का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के बाद इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली गई है।

1. कांग्रेस का हमला:

कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि शराबबंदी कब होगी।

भाजपा नेताओं ने चुनाव से पहले शराबबंदी का वादा किया था, लेकिन अब वे इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कह रहे हैं।

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2. पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीतियां:

कांग्रेस सरकार ने 100 से अधिक शराब दुकानों को बंद किया था।

2018 में छत्तीसगढ़ प्रति व्यक्ति शराब की खपत के मामले में गोवा के बाद दूसरे स्थान पर था।

कांग्रेस शासन के दौरान शराब की खपत में भारी गिरावट आई और राज्य 18वें स्थान पर पहुंच गया।

3. भाजपा सरकार की स्थिति:

भाजपा सरकार पर शराब माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप है।

सरकार के फैसले शराबबंदी के विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी की वास्तविकता

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण सामने आए हैं।

1. जनता की मांग और सामाजिक प्रभाव

राज्य में महिलाओं और सामाजिक संगठनों की मांग रही है कि शराबबंदी लागू की जाए।

शराब की लत से कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

अपराध दर और घरेलू हिंसा जैसी समस्याएं भी शराब की वजह से बढ़ी हैं।

2. आर्थिक पहलू

राज्य सरकार को शराब से भारी राजस्व प्राप्त होता है।

2023-24 में शराब से छत्तीसगढ़ सरकार को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई थी।

यदि शराबबंदी लागू की जाती है, तो सरकार को नए राजस्व स्रोतों की तलाश करनी होगी।

3. अन्य राज्यों से तुलना

बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में पूर्ण शराबबंदी है।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब बिक्री और माफियाओं का प्रभाव बढ़ गया।

गुजरात में भी शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार चलता है।

छत्तीसगढ़ में भी पूर्ण शराबबंदी लागू करने से वैकल्पिक समाधान की आवश्यकता होगी।

भाजपा सरकार की रणनीति: शराबबंदी या व्यापार विस्तार?

भाजपा सरकार के कदम यह संकेत देते हैं कि वह शराबबंदी के बजाय शराब से होने वाले राजस्व पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

1. राजस्व बढ़ाने की कोशिश

शराब पर करों में छूट देना और शराब बिक्री को बढ़ावा देना इस ओर इशारा करता है कि सरकार मुनाफा बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

शराबबंदी लागू करने के बजाय सरकार इसे नियंत्रित बिक्री के माध्यम से चलाना चाहती है।

2. विकल्पों की कमी

यदि शराबबंदी लागू की जाती है, तो सरकार को नए राजस्व स्रोतों की आवश्यकता होगी।

वैकल्पिक आर्थिक नीतियों के अभाव में सरकार फिलहाल शराब बिक्री जारी रखना चाहती है।

3. भाजपा के लिए दुविधा

चुनावी वादों को पूरा करना भाजपा के लिए चुनौती बन गया है।

यदि शराबबंदी लागू नहीं होती, तो भाजपा को जनता के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

यदि सरकार शराबबंदी लागू करती है, तो उसे बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

भाजपा को स्पष्ट करना होगा अपना रुख

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जबरदस्त सियासी जंग छिड़ी हुई है।

कांग्रेस सरकार ने शराबबंदी की दिशा में कदम उठाए थे, जबकि भाजपा सरकार शराब की बिक्री को नियंत्रित करने के बजाय बढ़ावा देती दिख रही है।

चुनावों के दौरान भाजपा ने शराबबंदी का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

शराब बिक्री से होने वाले राजस्व और सामाजिक प्रभावों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

अब देखना यह होगा कि भाजपा सरकार अपने वादे पर कायम रहती है या शराबबंदी केवल एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगी।

Ashish Sinha

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