हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: अनुराग ठाकुर को बीएफआई चुनाव लड़ने की मिली अनुमति

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: अनुराग ठाकुर को बीएफआई चुनाव लड़ने की मिली अनुमति

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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री और हमीरपुर से लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर को चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई है। न्यायालय ने बीएफआई को ठाकुर के नामांकन की तिथि बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और निर्वाचन मंडल द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराने के आदेश पर रोक लगा दी है।

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष पद का चुनाव लंबे समय से चर्चा में था। मौजूदा अध्यक्ष अजय सिंह द्वारा जारी किए गए एक आदेश में कहा गया था कि केवल निर्वाचित सदस्य ही चुनाव लड़ सकते हैं। इस आदेश के कारण हिमाचल प्रदेश मुक्केबाजी संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुराग ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था।

निर्वाचन अधिकारी आर. के. गॉबा ने 13 मार्च को एक आदेश जारी कर ठाकुर की उम्मीदवारी को अवैध घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद ठाकुर ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां उन्होंने अपनी अयोग्यता को चुनौती दी और चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी।

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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि 13 मार्च को जारी किया गया निर्वाचन मंडल का फैसला प्रथम दृष्टया दोषपूर्ण है और कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है। अदालत ने बीएफआई को निर्देश दिया कि वह ठाकुर के नामांकन को स्वीकार करे और उनकी उम्मीदवारी पर विचार करे।

इस फैसले के साथ ही बीएफआई के अध्यक्ष पद के चुनाव में एक नया मोड़ आ गया है। अब ठाकुर को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा, जिससे अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद राजनीतिक और खेल जगत में हलचल तेज हो गई है। खेल संगठनों में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बीएफआई के वर्तमान अध्यक्ष अजय सिंह के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, ठाकुर के समर्थकों ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है।

बीएफआई के चुनाव की प्रक्रिया पहले ही काफी जटिल हो चुकी है। इस फैसले के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी मुकाबला कैसा रहता है और क्या अजय सिंह इस फैसले के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठाते हैं।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले ने खेल संगठनों में चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। ठाकुर को चुनाव लड़ने की अनुमति मिलने से बीएफआई चुनाव और दिलचस्प हो गया है। अब यह देखना होगा कि चुनावी मुकाबले में कौन जीत दर्ज करता है और बीएफआई का अगला अध्यक्ष कौन बनता है।