कांग्रेस अधिवेशन: खड़गे बोले- गांधीजी की लाठी-चश्मा चुराए जा सकते हैं, विचारधारा नहीं

गांधीजी का चश्मा-लाठी चुराई जा सकती है, लेकिन उनकी विचारधारा नहीं: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अहम बयान

अहमदाबाद/नई दिल्ली।कांग्रेस पार्टी का 84वां महाधिवेशन गुजरात के अहमदाबाद में सम्पन्न हुआ, जहां कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनज़र रणनीति पर मंथन किया और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर तीखी टिप्पणी की। सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान, जिसमें उन्होंने गांधीजी की विचारधारा को लेकर एक जोरदार राजनीतिक संदेश दिया।

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खड़गे का बयान: “चश्मा और लाठी चुराई जा सकती है, विचारधारा नहीं”

बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा:

“गांधीजी का चश्मा और लाठी तो कोई भी चुरा सकता है, लेकिन उनकी विचारधारा सिर्फ कांग्रेस के पास है। हम उनके विचारों के उत्तराधिकारी हैं और उन्हें सहेजकर रखने का काम कर रहे हैं।”

खड़गे का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में गांधीजी के प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर भाजपा पर एक अप्रत्यक्ष कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।


कार्यसमिति बैठक में क्या हुआ खास?

84वें अधिवेशन के दौरान कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कई प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा हुई:

  • लोकसभा चुनाव 2024 के लिए रणनीति और सीट बंटवारे का प्रारूप

  • INDIA गठबंधन की एकता और समन्वय पर जोर

  • देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता पर चिंता

  • संवैधानिक संस्थाओं की “स्वतंत्रता पर हमले” को लेकर विरोध

बैठक में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति रही।


गुजरात में अधिवेशन का विशेष महत्व

गुजरात में अधिवेशन आयोजित करने के पीछे पार्टी की रणनीतिक सोच है। यह राज्य महात्मा गांधी की कर्मभूमि रहा है और वर्तमान में भाजपा का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस ने यहां से “गांधी बनाम गोडसे विचारधारा” की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश की है।

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पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस गुजरात के जरिए देशभर में एक सांस्कृतिक और वैचारिक संदेश देना चाहती है कि वह आज भी गांधीवाद की असली प्रतिनिधि है।


“संविधान बचाने का समय है”: खड़गे का दूसरा बड़ा बयान

अपने भाषण में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा:

“आज जब लोकतंत्र पर संकट है, संविधान को कमजोर किया जा रहा है, तब कांग्रेस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हमें न केवल चुनाव लड़ना है, बल्कि देश को बचाना भी है।”

उन्होंने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि वह “सभी संस्थाओं पर नियंत्रण” स्थापित करना चाहती है, जिससे जनप्रतिनिधि की भूमिका और जवाबदेही खत्म हो रही है।


राहुल गांधी का भी हमला, बोले- ‘डर का माहौल बना दिया गया है’

राहुल गांधी ने बैठक में कहा:

“देश में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि कोई सवाल नहीं पूछ सकता। जो सच बोलेगा, उसे जेल भेज दिया जाएगा। लेकिन कांग्रेस का इतिहास संघर्ष का है और हम डरने वाले नहीं हैं।”

उन्होंने कहा कि 2024 का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है।


राजनीतिक विश्लेषण: गांधी बनाम गोडसे की टकराहट फिर से केंद्र में

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से गांधीजी की विचारधारा को लेकर दिए गए बयानों का उद्देश्य साफ है — भाजपा और आरएसएस की नीतियों को “गांधी विरोधी” करार देना और आगामी चुनाव में नैतिक वैचारिक आधार पर बहस को पुनर्जीवित करना।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एस. के. त्रिवेदी कहते हैं:

“गुजरात में अधिवेशन आयोजित कर कांग्रेस ने यह संकेत दिया है कि वह विचारधारा की लड़ाई मैदान में लड़ने को तैयार है। खड़गे का बयान जनमानस को सीधे संबोधित करता है।”

 कांग्रेस का गांधीवादी कार्ड फिर से एक्टिव

84वें अधिवेशन में कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि वह गांधीवादी विचारधारा को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है और इसी के सहारे 2024 के चुनावी समर में उतरने जा रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों से यह भी स्पष्ट होता है कि पार्टी भाजपा की प्रतीकात्मक राजनीति का जवाब विचारधारा और इतिहास के आधार पर देना चाहती है।