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एनडीए का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार संघ की सोच का प्रतीक, इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार संविधान का रक्षक – कांग्रेस

एनडीए का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार संघ की सोच का प्रतीक, इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार संविधान का रक्षक – कांग्रेस

रायपुर, 24 अगस्त 2025। भाजपा की प्रेस वार्ता पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए जिस उम्मीदवार का चयन किया है, उसकी पृष्ठभूमि उस संगठन से जुड़ी है जो आजादी और संविधान का विरोधी रहा है।

उन्होंने कहा कि जब डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान लिख रहे थे, तब संघ ने न केवल उसका विरोध किया, बल्कि संविधान की प्रतियां जलाईं और बाबा साहब का पुतला दहन किया। आजादी के बाद 52 साल तक संघ के दफ्तर में तिरंगा नहीं फहराया गया, क्योंकि उसे अपशगुन माना गया। आज भी यह संगठन संविधान बदलने और SC, ST, OBC को मिले आरक्षण को खत्म करने की बात करता है।

इसके विपरीत, इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार जस्टिस रेड्डी संविधान के सच्चे रक्षक और न्यायप्रिय व्यक्ति रहे हैं।

भाजपा से सवाल

धनंजय सिंह ठाकुर ने पूछा –

सलवा जुडूम पर जब न्यायालय ने फैसला सुनाया, तब डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। भाजपा सरकार ने उस फैसले के खिलाफ अपील क्यों नहीं की?

जब भाजपा ने उस समय कोर्ट का फैसला स्वीकार कर लिया था, तो आज उसे गलत बताकर विरोध क्यों कर रही है?

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क्या भाजपा को न्यायालय का फैसला तब सही और आज गलत लग रहा है, सिर्फ इसलिए क्योंकि जस्टिस रेड्डी उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं?

उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले पर सवाल उठाना कोर्ट की अवमानना है। भाजपा की यह अवसरवादी राजनीति है, जिसमें न तो आदिवासियों की चिंता है और न राष्ट्र की। इन्हें केवल संघ के एजेंडे को लागू करना है।

भाजपा के काले सच पर कांग्रेस का हमला

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा –

सलवा जुडूम के प्रणेता महेंद्र कर्मा की सुरक्षा भाजपा सरकार नहीं कर पाई।

परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सली हमले में महेंद्र कर्मा शहीद हो गए। उस षड्यंत्र की जांच आज तक भाजपा सरकार ने नहीं कराई।

कांग्रेस सरकार ने जांच आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर षड्यंत्र के बिंदु जोड़े, लेकिन भाजपा नेताओं ने न्यायालय में जाकर जांच पर रोक लगवा दी।

धनंजय ठाकुर ने कहा, “भाजपा के 15 साल के शासन में बस्तर के 15 जिले नक्सलवाद की चपेट में आ गए। 700 से अधिक गांव जलाए गए, 5 लाख से ज्यादा लोग पलायन करने मजबूर हुए। हजारों आदिवासी मारे गए, सैकड़ों को भाजपा सरकार ने झूठे आरोप में जेल भेजा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि आज जब भाजपा को उपराष्ट्रपति चुनाव में हार दिख रही है, तब वह आदिवासियों की चिंता का दिखावा कर रही है। असलियत यह है कि भाजपा की नजर बस्तर के जल-जंगल-जमीन पर है, जिसे वह अपने पूंजीपति मित्रों को सौंपना चाहती है।

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