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द हेग में भारत-नीदरलैंड CEO राउंडटेबल: पीएम मोदी ने डच कंपनियों को दिया भारत में निवेश का न्योता, फ्यूचर सेक्टर्स पर दिया जोर | India-Netherlands CEO Roundtable






द हेग में भारत-नीदरलैंड CEO राउंडटेबल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक दिग्गजों को दिया निवेश का न्योता, भारतीय युवाओं के साथ साझेदारी पर जोर


ग्लोबल बिजनेस राउंडटेबल: द हेग में बरसेगा डच निवेश, पीएम मोदी ने खींचा भारत का ‘फ्यूचर रोडमैप’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डच पीएम रॉब जेटन की अगुवाई में शीर्ष वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) की महाबैठक का विस्तृत विश्लेषण

स्थान: द हेग, नीदरलैंड (The Hague)
दिनांक: 17 मई, 2026
स्रोत: विशेष संवाददाता, कूटनीतिक एवं आर्थिक ब्यूरो

द हेग: भारत को दुनिया का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बनाने और आगामी वर्षों में देश की जीडीपी रफ्तार को दहाई अंकों के करीब ले जाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा का आर्थिक एजेंडा पूरी तरह धरातल पर उतर आया है। नीदरलैंड की प्रशासनिक राजधानी द हेग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके डच समकक्ष रॉब जेटन की संयुक्त अध्यक्षता में **’भारत-नीदरलैंड सीईओ राउंडटेबल’ (CEO Roundtable on Economic Ties)** का आयोजन किया गया। इस हाई-प्रोफाइल आर्थिक शिखर सम्मेलन में यूरोप और नीदरलैंड की शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान डच कंपनियों ने भारत के विभिन्न और विविधीकृत क्षेत्रों में अपने मौजूदा निवेशों के सकारात्मक अनुभवों को साझा किया, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों और ‘फ्यूचरिस्टिक सेक्टर्स’ (भविष्य के क्षेत्रों) पर प्रकाश डालते हुए डच कॉर्पोरेट जगत को भारत के हुनरमंद युवाओं के साथ मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का नेतृत्व करने का खुला आमंत्रण दिया।

१. कूटनीतिक मंच से आर्थिक समृद्धि का आह्वान: क्या कहा प्रधानमंत्री ने?

सीईओ राउंडटेबल के सफल आयोजन और वैश्विक व्यापारिक घरानों के साथ हुई गहन चर्चा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस महाबैठक के प्रमुख बिंदुओं को दुनिया के सामने रखा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन को दूर करना और भारत में बड़े पैमाने पर एफडीआई (FDI) प्रवाह को बढ़ाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधिकारिक वक्तव्य:

“प्रधानमंत्री रॉब जेटन और मैं द हेग में आर्थिक संबंधों पर आयोजित सीईओ राउंडटेबल में शामिल हुए। इस दौरान शीर्ष सीईओ ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए अपने निवेश और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बात की।”

“मैंने अपने संबोधन में भारत के सुधार पथ (Reform Trajectory) और भविष्य के क्षेत्रों (Futuristic Sectors) पर हमारे विशेष जोर को रेखांकित किया। मैंने डच कंपनियों को भारत में अपना निवेश बढ़ाने और हमारे प्रतिभावान युवाओं के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित किया है।”

इस बैठक में डच कंपनियों ने इस बात पर मुहर लगाई कि भारत में हाल के वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों, जैसे कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) और नेशनल सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम ने विदेशी निवेशकों के मन में अटूट विश्वास पैदा किया है।

२. ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’: भारतीय अर्थव्यवस्था का बदलता ढांचा

स्थिर नीतियां और कड़े सुधारों का परिणाम

सीईओ गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत आज केवल एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि एक वैश्विक विनिर्माण पावरहाउस (Manufacturing Powerhouse) बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। पिछले एक दशक में भारत ने बैंकिंग, कराधान, श्रम कानूनों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में जो क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, उन्होंने भारत को एक ‘अनुमानित और स्थिर’ (Predictable & Stable) कारोबारी माहौल दिया है।

फ्यूचरिस्टिक सेक्टर्स पर भारत का दांव

प्रधानमंत्री ने डच निवेशकों के सामने उन सेक्टर्स का खाका पेश किया जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को संचालित करेंगे। भारत इन क्षेत्रों में शुरुआती बढ़त हासिल करने के लिए भारी निवेश और पीएलआई (PLI) योजनाएं चला रहा है:

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  • अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम: भारत घरेलू स्तर पर चिप डिजाइन और निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। डच कंपनियों की इस क्षेत्र में महारत भारत के विनिर्माण लक्ष्यों को पूरा कर सकती है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी: भारत ने साल 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य रखा है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत दुनिया में सबसे सस्ती स्वच्छ ऊर्जा बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहां डच निवेश के लिए अपार संभावनाएं हैं।
  • कृषि-तकनीक (Agri-Tech) और फूड प्रोसेसिंग: नीदरलैंड कृषि प्रौद्योगिकी और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स में दुनिया का नेतृत्व करता है। भारत के विशाल कृषि क्षेत्र को डच तकनीक से जोड़कर वैश्विक खाद्य सुरक्षा नेटवर्क का निर्माण किया जा सकता है।
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत का यूपीआई (UPI), ओएनडीसी (ONDC) और डिजिटल पहचान तंत्र आज दुनिया के लिए एक केस स्टडी बन चुके हैं। फिनटेक के क्षेत्र में डच और भारतीय स्टार्टअप्स के बीच सहयोग इस राउंडटेबल का एक मुख्य एजेंडा रहा।

३. भारत में डच निवेश का आर्थिक नक्शा: एक सांख्यिकीय विश्लेषण

नीदरलैंड ऐतिहासिक रूप से भारत में शीर्ष विदेशी प्रत्यक्ष निवेशकों में से एक रहा है। यूरोपीय संघ (EU) के देशों में नीदरलैंड, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। राउंडटेबल के दौरान दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और मजबूती देने के लिए क्षेत्रों की पहचान की गई:

प्रमुख क्षेत्र (Sectors) डच कंपनियों की विशेषज्ञता भारत में निवेश के नए अवसर और लक्ष्य
लॉजिस्टिक्स एवं बंदरगाह रोटरडैम पोर्ट जैसी वैश्विक स्तर की समुद्री लॉजिस्टिक्स और शिपिंग मैनेजमेंट। भारत के ‘सागरमाला’ प्रोजेक्ट और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के तहत नए आधुनिक बंदरगाहों और समुद्री गलियारों का विकास।
जल प्रबंधन (Water Tech) बाढ़ नियंत्रण, अपशिष्ट जल उपचार और जल शुद्धिकरण की उन्नत तकनीक। ‘नमामी गंगे’ और शहरी जल जीवन मिशन के तहत भारतीय शहरों में डच स्मार्ट वाटर सिस्टम का विस्तार।
शहरी नियोजन एवं स्मार्ट सिटी सतत और सस्टेनेबल शहरी बुनियादी ढांचा (Sustainable Infra)। भारत के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन और ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण।
स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान फार्मास्युटिकल नवाचार और चिकित्सा उपकरण (Medical Devices) निर्माण। भारत के विशाल ‘बल्क ड्रग पार्कों’ में डच प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों की स्थापना।

फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म (FTM) का लाभ

बैठक में भारत सरकार की ओर से डच निवेशकों को आश्वस्त किया गया कि भारत में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए ‘फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म’ को और अधिक सुचारू बनाया जा रहा है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) सीधे तौर पर डच निवेश प्रस्तावों की निगरानी करेगा ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की लालफीताशाही (Red Tape) का सामना न करना पड़े।

४. जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) और टैलेंट पूल का उपयोग

भारत के युवा: वैश्विक नवाचार के नए इंजन

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सबसे मजबूत पक्ष भारत की युवा आबादी को बताया। जहां एक ओर यूरोप और दुनिया के कई विकसित देश उम्रदराज होती आबादी और कार्यबल (Workforce) की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे युवा टैलेंट पूल मौजूद है। भारत के पास हर साल लाखों की संख्या में निकलने वाले इंजीनियर्स, डेटा साइंटिस्ट्स और तकनीकी विशेषज्ञ हैं।

प्रधानमंत्री ने डच कंपनियों से कहा कि वे भारत को केवल एक ‘उपभोक्ता बाजार’ के रूप में न देखें, बल्कि उसे अपना ‘ग्लोबल आरएंडडी हब’ (Global R&D Hub) बनाएं। डच कंपनियों की पूंजी, अत्याधुनिक अनुसंधान और भारत के कुशल, नवोन्मेषी युवाओं का यह समागम पूरी दुनिया के लिए किफायती और टिकाऊ समाधान (Affordable & Sustainable Solutions) तैयार कर सकता है। कौशल विकास (Skill Development) के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच नए अकादमिक और व्यावहारिक समझौतों की रूपरेखा इस बैठक में तैयार की गई।

५. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience) में भारत-नीदरलैंड की जुगलबंदी

वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां ‘चीन प्लस वन’ (China+1) की रणनीति पर काम कर रही हैं। कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाना चाहती हैं। ऐसी स्थिति में भारत एक विश्वसनीय, लोकतांत्रिक और स्थिर विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है। नीदरलैंड, जो खुद को ‘यूरोप का प्रवेश द्वार’ कहता है, भारत के साथ मिलकर एक नया वैश्विक आर्थिक कॉरिडोअर स्थापित कर सकता है। डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने भी माना कि भारत की आर्थिक प्रगति के बिना वैश्विक स्थिरता और संधारणीय विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना असंभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण: आर्थिक कूटनीति की एक नई और ठोस इबारत

द हेग में आयोजित यह सीईओ राउंडटेबल केवल एक व्यापारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह भारत के प्रति वैश्विक कॉर्पोरेट जगत के बढ़ते विश्वास का एक मजबूत प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से भारत के सुधारों के पथ और भविष्य के डिजिटल एवं ग्रीन सेक्टर्स को डच उद्योगपतियों के सामने प्रस्तुत किया, उसने भारत की छवि को एक दूरदर्शी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। नीदरलैंड की तकनीकी क्षमता और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (युवा शक्ति) का यह गठजोड़ आने वाले समय में न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक निर्भरता को भी कम करेगा। ‘प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क’ का मानना है कि इस राउंडटेबल के दूरगामी परिणाम आने वाले महीनों में भारत के विनिर्माण और रोजगार के आंकड़ों में जमीन पर दिखाई देंगे।

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यह विशेष आर्थिक रिपोर्ट द हेग से प्राप्त कूटनीतिक इनपुट्स और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित है।


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