सौर सुजला योजना से धमतरी के किसानों की खुशहाली | सफलता की कहानी

सफलता की कहानी

रजत जयंती महोत्सव पर विशेष

धमतरी जिले में सौर सुजला योजना – किसानों की खुशहाली का नया सूरज

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धमतरी, 04 सितम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सौर सुजला योजना, जो वर्ष 2016-17 में शुरू हुई थी, आज किसानों की जिंदगी में बदलाव की नई गाथा लिख रही है। धमतरी जिले में यह योजना खेती-किसानी के लिए संजीवनी साबित हो रही है। जहां पहले किसान वर्षा आधारित खेती तक सीमित थे, वहीं अब सौर ऊर्जा से संचालित पंपों ने उन्हें बारहमासी खेती का भरोसा दिया है।

किसानों के जीवन में नई रोशनी

धमतरी जिले में अब तक 3068 सोलर पंपों की स्थापना छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा) द्वारा की जा चुकी है। इन पंपों से किसान धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, सब्ज़ी और फल-फूल जैसी फसलें सालभर ले रहे हैं।
इससे किसानों की आय दोगुनी हुई है और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।

किसानों की जुबानी – खेतों में सूरज से पानी

  • अमृत लाल, ग्राम गोरेगांव“पहले केवल बरसात पर खेती कर पाता था। अब सौर पंप से सालभर खेती हो रही है, आमदनी बढ़ गई है और बच्चों की पढ़ाई भी अच्छे से हो रही है।”

  • लक्ष्मी नाथ, ग्राम चिपली“डीजल पंप से खेती करना महंगा था। अब सूरज की रोशनी से खेतों को पानी मिलता है, कोई खर्च नहीं होता। यह योजना छोटे किसानों के लिए वरदान है।”

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  • रामेश्वर, ग्राम भोथली“पहले नौकरी की तलाश में बाहर जाना पड़ता था, अब सौर पंप से गांव में ही अच्छी खेती-बाड़ी हो रही है।”

छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान

योजना के तहत किसानों को 90% तक अनुदान दिया जाता है। एनिकट, स्टॉप डेम और चेक डेम के किनारों पर लगाए जाने वाले 3 से 5 एचपी सोलर पंपों पर 97% तक अनुदान उपलब्ध है। इससे सीमांत किसान भी लाभान्वित हो रहे हैं।

लक्ष्य और उपलब्धियां

  • वित्तीय वर्ष 2024-25 (फेज-07) – 400 सोलर पंप का लक्ष्य, 252 आवेदन प्राप्त।

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 (फेज-09) – 205 सोलर पंप का लक्ष्य, जिनमें से 165 स्थापित, शेष कार्य जारी।

आर्थिक और सामाजिक बदलाव

इस योजना से किसानों की आय बढ़ने के साथ ही गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। खेतों में मजदूरों, परिवहन और कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों से बेरोजगारी में कमी आई है।

पर्यावरण और सतत विकास

डीजल और बिजली पंप की तुलना में सौर पंप प्रदूषणमुक्त, किफायती और टिकाऊ हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में प्रदेश ने मजबूत कदम बढ़ाया है।

छत्तीसगढ़ के रजत जयंती महोत्सव पर यह कहना उचित होगा कि सौर सुजला योजना केवल सिंचाई का साधन नहीं, बल्कि ऊर्जा, आत्मविश्वास और समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है। किसान खुद मानते हैं कि अब सूरज सिर्फ खेतों को ही नहीं, बल्कि उनके जीवन को भी रोशन कर रहा है!