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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: नवभारत के निर्माण की आधारशिला, शिक्षा और रोजगार के बीच सेतु बनेगी – उच्च शिक्षा मंत्री

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: नवभारत के निर्माण की आधारशिला, शिक्षा और रोजगार के बीच सेतु बनेगी – उच्च शिक्षा मंत्री


रायपुर के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत को वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा तय करेगी।

रायपुर/19 सितंबर 2025। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर एवं एनईपी इम्प्लीमेंटेशन सेल द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नवभारत की आधारशिला है। यह नीति 21वीं सदी के भारत की दिशा तय करने वाला क्रांतिकारी कदम है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को सक्षम, आत्मनिर्भर और श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि एनईपी केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के नैतिक, मानसिक, भावनात्मक और तकनीकी सशक्तिकरण पर जोर देती है।

मंत्री वर्मा ने नीति के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके तहत गुणवत्ता, समानता, समावेशिता और सुलभता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन और विषयों के बीच समन्वय पर काम किया जा रहा है। शिक्षक प्रशिक्षण, शोध को बढ़ावा और उद्योग-शिक्षा भागीदारी को प्रोत्साहित कर युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

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उन्होंने कहा कि प्राध्यापकों की कमी को दूर करने के लिए 700 पदों की स्वीकृति दी गई है। साथ ही डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और ई-लर्निंग सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विषयों की कठोर सीमाओं को समाप्त कर विद्यार्थियों को सीखने की स्वतंत्रता देने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को भी संरक्षित किया जाएगा।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने एनईपी की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा की और शिक्षकों को नई शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका के बारे में मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों और शिक्षाविदों को नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी प्रदान करना और उच्च शिक्षा क्षेत्र में नई दृष्टि विकसित करना रहा।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस नीति से उच्च शिक्षा में भागीदारी दर को 26% से बढ़ाकर 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह बदलाव विद्यार्थियों को विषयों की दीवारों से मुक्त कर विज्ञान, वाणिज्य और कला जैसे क्षेत्रों को एक साथ पढ़ने की स्वतंत्रता देगा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और विभिन्न कॉलेजों के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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