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IPS पूरन कुमार सुसाइड केस: IAS पत्नी के आरोपों के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने बनाई SIT, हरियाणा सरकार ने SP रोहतक का किया तबादला

चंडीगढ़ पुलिस ने शुक्रवार को आईपीएस वाई पूरन कुमार आत्महत्या मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस SIT का नेतृत्व आईजी पुष्पेंद्र कुमार करेंगे।
आईपीएस पूरन कुमार ने मंगलवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने आवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। वे 2001 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे और हरियाणा कैडर से जुड़े थे।


IAS पत्नी के गंभीर आरोप:

मृतक अधिकारी की पत्नी, आईएएस अमनीत पी. कुमार ने अपने पति की मौत को एक सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने हरियाणा DGP शत्रुजीत सिंह कपूर और एसपी रोहतक नरेंद्र बिजारणिया पर जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।

अमनीत पी. कुमार ने कहा कि उनके पति की मौत से पहले डीजीपी के निर्देश पर उनके खिलाफ रोहतक में झूठा केस दर्ज कराया गया था। उन्होंने कहा —

“पूरन को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। यह केवल आत्महत्या नहीं, संस्थागत उत्पीड़न का नतीजा है।”


सरकार और आयोग की सक्रियता:

इस पूरे प्रकरण में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने चंडीगढ़ में मृतक अधिकारी के परिवार से मुलाकात की और कहा —

“मैं परिवार का दर्द साझा करने आया हूं। उन्हें पूरा न्याय मिलेगा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आवास पर एक अहम बैठक हुई, जिसमें कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, गृह सचिव सुमिता मिश्रा और आईएएस राज शेखर वुंडरू मौजूद थे।

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सरकार की कार्रवाई:

IAS पत्नी की शिकायत और आत्महत्या नोट में नाम आने के बाद हरियाणा सरकार ने रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया का तबादला कर दिया है। उनकी जगह सुरिंदर सिंह भोरिया को नया एसपी रोहतक नियुक्त किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह तबादला दंडात्मक कार्रवाई के रूप में किया गया है।


सुसाइड नोट में क्या लिखा था?

पूरन कुमार ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने आठ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम लिखे और उन पर “जाति-आधारित भेदभाव, सार्वजनिक अपमान और मानसिक उत्पीड़न” के आरोप लगाए थे।
मृतक की पत्नी ने FIR में सभी आरोपियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करने और संशोधन करने की मांग की है।


मृतक के परिवार का रुख:

पूरन कुमार के परिवार ने अभी तक पोस्टमॉर्टम की अनुमति नहीं दी है। उनका शव पांच दिनों से शवघर में रखा हुआ है। परिवार का कहना है कि वे सभी आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की गारंटी चाहते हैं।


SIT जांच का फोकस:

SIT अब यह जांच करेगी कि —

  • क्या अधिकारी के खिलाफ दर्ज मामला झूठा और योजनाबद्ध था?

  • क्या जातिगत भेदभाव के आरोप प्रशासनिक दबाव या प्रतिशोध से जुड़े हैं?

  • क्या आत्महत्या से पहले अधिकारी ने किसी को लिखित शिकायत या SOS संदेश भेजा था?

यह मामला हरियाणा पुलिस, नौकरशाही और जातिगत भेदभाव की संवेदनशीलता से जुड़ा है। अब सबकी निगाहें SIT की रिपोर्ट और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की कार्रवाई पर हैं।

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