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तेलंगाना के जल अधिकारों पर नहीं होगा समझौता, कृष्णा–गोदावरी विवाद पर सीएम रेवंत रेड्डी का बड़ा बयान

तेलंगाना के जल अधिकारों पर कोई समझौता नहीं, कृष्णा–गोदावरी में हुई गलतियों को सुधारेगी सरकार: सीएम रेवंत रेड्डी

हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि कृष्णा और गोदावरी नदी जल पर तेलंगाना के अधिकारों की रक्षा में राज्य सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में जल बंटवारे और परियोजनाओं को लेकर जो गंभीर गलतियाँ हुईं, उन्हें अब रणनीतिक और अनुशासित तरीके से सुधारा जा रहा है

ज्योतिराव फुले प्रजाभवन में आयोजित कार्यक्रम में सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कृष्णा–गोदावरी जल, लंबित परियोजनाओं और उनसे जुड़े तथ्यों पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। इस मौके पर विधान परिषद के सभापति गुत्ता सुखेंदर रेड्डी, उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमर्का, मंत्री, सलाहकार, सांसद, विधायक, एमएलसी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जल विवाद में राजनीतिक लाभ नहीं, राज्य हित प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी जल विवादों को लेकर सरकार का उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि तेलंगाना के साथ हुए अन्याय को सुधारना है। कृष्णा और गोदावरी बेसिन से जुड़े समग्र तथ्य विधानसभा के पटल पर रखे जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांतियों को दूर किया जा सके।

कृष्णा जल बंटवारे में तेलंगाना के साथ अन्याय

सीएम रेवंत रेड्डी ने बताया कि संयुक्त आंध्र प्रदेश को 811 टीएमसी कृष्णा जल आवंटित था। राज्य विभाजन के बाद पिछली सरकार ने आंध्र प्रदेश को 512 टीएमसी और तेलंगाना को मात्र 299 टीएमसी पर सहमति दे दी।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल विवाद सिद्धांतों के अनुसार तेलंगाना को 71% और आंध्र प्रदेश को 29% जल हिस्सा मिलना चाहिए था, लेकिन इसके उलट एपी को 66% और तेलंगाना को केवल 34% पर सहमति जताई गई।

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पालमूर–रंगारेड्डी परियोजना से जुड़ा गंभीर मुद्दा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पालमूर–रंगारेड्डी परियोजना के लिए जूराला से पानी लेने के बजाय श्रीशैलम बैकवॉटर से पानी उठाने का फैसला तेलंगाना के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हुआ।
वर्तमान में जहां आंध्र प्रदेश 13 टीएमसी पानी ले जा रहा है, वहीं तेलंगाना सिर्फ 2.5 टीएमसी ही उपयोग कर पा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना स्थल बदलने से लिफ्ट और पंप तो बढ़े, लेकिन राज्य को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला, और श्रीशैलम बैकवॉटर से 2.5 टीएमसी पानी उठाने की भी पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।

DPR के बिना 27 हजार करोड़ खर्च

मुख्यमंत्री ने गंभीर खुलासा करते हुए कहा कि पालमूर–रंगारेड्डी लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट की सात साल तक DPR ही प्रस्तुत नहीं की गई, इसके बावजूद करीब 27 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए
DPR के अभाव में परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी भी नहीं मिली, जिस कारण अदालतों में मामले दर्ज हुए।

सुप्रीम कोर्ट में ‘पेयजल परियोजना’ का हलफनामा

रेवंत रेड्डी ने बताया कि उस समय की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दिया कि पालमूर–रंगारेड्डी कोई सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि 7.15 टीएमसी क्षमता की पेयजल परियोजना है
उन्होंने कहा कि तेलंगाना के जल अधिकारों के लिए पहले ही विभिन्न मंचों पर राज्य का पक्ष मजबूती से रखा जाना चाहिए था, लेकिन पिछली सरकारें इसमें विफल रहीं।

विधानसभा में होगा विस्तृत विमर्श

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णा और गोदावरी जल को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाने के प्रयास हो रहे हैं, इसलिए सरकार विधानसभा में सभी तथ्यों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। उन्होंने सभी सदस्यों से इस महत्वपूर्ण विषय पर सक्रिय भागीदारी की अपील की।

 

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