छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से राहत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और ईओडब्ल्यू से जुड़े मामलों में उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। लगभग 168 दिनों के बाद चैतन्य बघेल जेल से बाहर आएंगे।
अब तक कई बड़े नामों की हो चुकी है गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक कई बड़े और प्रभावशाली नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें शामिल हैं—
- पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल
- पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा
- कारोबारी अनवर ढेबर
- तत्कालीन सीएम सचिव सौम्य चौरसिया
इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
3200 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ईडी द्वारा की जा रही है। ईडी ने इस मामले में एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख है। एफआईआर में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों सहित कई लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
IAS अफसर और सिंडिकेट का खुलासा
ईडी की जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में
- आईएएस अनिल टुटेजा,
- आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी,
- और कारोबारी अनवर ढेबर
के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
जन्मदिन पर हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था।
2500 करोड़ की अवैध कमाई का दावा
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंचाई गई।
29,800 पन्नों की चार्जशीट
ईडी ने 26 दिसंबर को कोर्ट में लगभग 29,800 पन्नों का अंतिम चालान पेश किया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कुल 82 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।











