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Chhath Puja 2025: आज संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त 5:10 से, जानें पूजा सामग्री और विधि

छठ महापर्व 2025: आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा ‘संध्या अर्घ्य’, शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री

हिंदू आस्था का महापर्व छठ पूजा आज (27 अक्टूबर 2025, सोमवार) अपने तीसरे दिन में है। इस दिन भक्तजन अस्ताचलगामी यानी डूबते सूर्य को ‘संध्या अर्घ्य’ अर्पित करेंगे। यह पावन पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना को समर्पित है, जो संतान-सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

संध्या अर्घ्य का शुभ समय (27 अक्टूबर 2025)

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का सबसे शुभ समय इस प्रकार है:

अनुष्ठान शुभ समय (संध्या अर्घ्य)
डूबते सूर्य को अर्घ्य शाम 5 बजकर 10 मिनट से लेकर 5 बजकर 58 मिनट तक

इस दौरान व्रती महिलाएं घाटों, तालाबों और नदियों के किनारे सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगी और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।

छठ पूजा की सामग्री और अर्घ्य विधि

भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए बांस या पीतल की टोकरी या सूप का उपयोग करना चाहिए।

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1. पूजा सामग्री (पथिया और सूप में रखी जाने वाली चीजें)

  • मुख्य पात्र: दो बड़े बांस की टोकरी (पथिया) और सूप।
  • अन्य पात्र: डगरी, पोनिया, ढाकन, कलश, पुखार, सरवा।
  • भोग प्रसाद: ठेकुआ, मखान, अक्षत, भुसवा, सुपारी, अंकुरी, गन्ना।
  • फल: पांच प्रकार के फल जैसे शरीफा, नारियल, केला, नाशपाती और डाभ (बड़ा वाला नींबू)।
  • मिठाई: पंचमेर (पांच रंग की मिठाई)।
  • श्रृंगार: भोग रखने वाली टोकरी पर सिंदूर और पिठार जरूर लगाएं।

2. अर्घ्य देने का मंत्र और प्रार्थना

जल चढ़ाते समय व्रतियों को निम्नलिखित मंत्रों का जप करना चाहिए:

$$\text{ॐ आदित्याय नमः}$$

या

$$\text{ॐ भास्कराय नमः}$$

अर्घ्य के बाद हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करें: “जय छठी मैया, जय सूर्य भगवान। संतान-सुख, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद दीजिए।”

छठ व्रत का महत्व

  • फल: यह व्रत संतान प्राप्ति, उसके स्वास्थ्य और उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • ज्योतिषीय लाभ: जिन लोगों की कुंडली में सूर्य का प्रभाव कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी होता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: यह पाचन तंत्र और त्वचा रोगों में भी सकारात्मक प्रभाव देता है।

चौथा और अंतिम दिन

छठ महापर्व का चौथा और अंतिम दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी (28 अक्टूबर 2025) को होगा। इस दिन व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त करेंगी और प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करेंगी।

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