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अंबिकापुर : कौन कहता है तू अबला है,सबल पुरूष सामने खड़ा है- मीना वर्मा

कौन कहता है तू अबला है,सबल पुरूष सामने खड़ा है- मीना वर्मा
अम्बिकापुर 08 मार्च 2021/ हिंदी साहित्य परिषद सरगुजा ईकाई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर स्थानीय रूपदेव मार्केट सभागार में वरिष्ठ कवियित्री श्रीमति मीना वर्मा, शायरे शहर यादव विकास, साहित्यकार अंजनि सिन्हा, कवियित्री गीता दुबे के आतिथ्य तथा हिंदी साहित्य परिषद अध्यक्ष विनोद हर्ष की अध्यक्षता में आयोजित की गई.. इस अवसर पर परिषद अध्यक्ष विनोद हर्ष ने सभी को महिला दिवस की शुभकामनाऐं देते हुए महिला सशक्तिकरण के विचार को काव्य से यथार्थ की धरातल पर लाने का आह्वान किया..
इस अवसर पर नारीशक्ति पर अपनी रचनापाठ करते हुए कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवियित्री मीना वर्मा ने इन पंक्तियों में नारी की शक्तियों का बखान किया.. ष्कौन कहता है तू अबला है, सबल पुरूष सामने खड़ा है.ष् इस अवसर पर शायरे शहर यादव विकास ने शानदार गजल प्रस्तुत कर शमां बांधा..ष्रातों के ख्वाब दिल में बसाये नहीं जाते, यारों चिराग दिन में जलाऐ नहीं जाते.ष् वरिष्ठ साहित्यकार अंजनि वर्मा ने रामायण की घटनाओं पर सुंदर रचना प्रस्तुत किया.. कवियित्री गीता दुबे ने लिव इन रिलेशन पर समसामयिक रचना का पाठ किया.. वरिष्ठ कवि देवेन्द्र दुबे ने प्रेम रस में डूबी रचना से श्रोताओं को आकर्षित किया.. हिंदी साहित्य परिषद महासचिव कवि संतोष सरल ने राम सीता के विरह वेदना पर सुंदर कविता प्रस्तुत की.. ष्कर्तव्यों की बलिवेदी पर, दोनों को शीश चढाना होगा.. हे सीते तुम्हें जाना होगा..ष् कवि मुकुंद लाल साहू ने महिला दिवस पर दोहा पाठ कर नारी की शक्ति का बखान किया.. ष्नारी है नारायणी, नारी शक्ति अपार.. नारी का वंदन करे, यह सारा संसार.ष् कवि श्याम बिहारी पांडेय ने बेटियों पर अपनी सुंदर रचना प्रस्तुत की.. ष्जीवन के उदास शाम में, दीपक सी बेटियाँ. अवसाद के समय में, देवी का प्रसाद सी बेटियाँ.ष्  कवि राजेश पांडेय अब्र ने प्रेम पर सुंदर कविता का पाठ किया..ष्नेह के बंधन यहां अब जाने क्यूँ हैं, शून्य है शहतीर सा, प्रिय तुम हो कहां.ष् युवा कवि अंबरीश कश्यप ने अपनी जोरदार पंक्तियों से सबका ध्यान खींचा.. ष्जिंदगी में प्यार होना चाहिए, हर आदमी वफादार होना चाहिए.कवियित्री माधुरी जायसवाल ने बेटियों की दर्द भरी रचना प्रस्तुत की.. मां मुझे यूं न मार मुझे भी जीने का अधिकार दे.ष्  कवियित्री गीता द्विवेदी ने बेटियों की महत्ता को पंक्तियों में व्यक्त किया.. खाली पेट रोटी भावे प्यासे को पानी सुहावे. घर के लिए वैसे ही जरूरी है बेटियाँ.ष्  कवियित्री पूर्णिमा पटेल ने भगवान शिव पर ओंकारा गीत सुनाकर सबका मन मोह लिया.. कवि कृष्ण कांत पाठक ने श्रृंगार पर सुंदर गीत प्रस्तुत किया.. हास्य कवि विनोद तिवारी व प्रकाश कश्यप ने अपनी हास्य रचनाओं से लोगों को खूब हंसाया.. वरिष्ठ कवि सुधीर पाठक व कवि राजेन्द्र विश्वकर्मा ने अपनी सरगुजिहा रचनाओं से मिट्ठी की महक बिखेरी.. कवि अंचल सिन्हा, डॉ योगेन्द्र गहरवार, चंद्रभूषण मिश्र, अजय श्रीवास्तव व अजय शुक्ला बाबा ने अपनी विविध रचनाओं से कवि गोष्ठी को नया आयाम दिया.. कार्यक्रम का संचालन परिषद महासचिव कवि संतोष सरल व कवि श्याम बिहारी पांडेय ने संयुक्त रूप से किया.. आभार प्रदर्शन साहित्य सचिव अंबरीश कश्यप ने किया। इस अवसर पर श्रीमति मंजू पाठक, तौफीक खान, बुधराम सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे। 

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