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रायपुर नगर निगम शुरू करेगा रडार सर्वे, 60 हजार नई संपत्तियां टैक्स दायरे में आएंगी

रायपुर नगर निगम शुरू करेगा शहर की सभी संपत्तियों का रडार सर्वे, 60 हजार नई संपत्तियां आएंगी टैक्स दायरे में

Raipur News: रायपुर नगर निगम राजधानी की सभी संपत्तियों का एक व्यापक और हाई-टेक रडार आधारित सर्वे शुरू करने जा रहा है। यह सर्वे इस माह के अंत तक शुरू होगा। निगम एक निजी कंपनी से अनुबंध की अंतिम प्रक्रिया में है और वर्क ऑर्डर जारी होते ही टीम घर-घर जाकर संपत्ति विवरण जुटाना शुरू कर देगी।

इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन 50 हजार से 60 हजार नई संपत्तियों को टैक्स दायरे में शामिल करना है, जो पिछले वर्षों में शहर के विस्तार के दौरान निगम के रिकॉर्ड में अपडेट नहीं हुईं। साथ ही 2017-18 सर्वे में मिली त्रुटियों को भी सुधारा जाएगा।


क्यों जरूरी हुआ नया सर्वे?

रायपुर नगर निगम ने पिछला सर्वे 2017-18 में विश्व बैंक की सहायता से GIS तकनीक पर कराया था। उस समय 3.52 लाख संपत्तियां रिकॉर्ड में दर्ज की गई थीं।
लेकिन:

  • पिछले सर्वे में 80 हजार संपत्तियों में माप, वर्गीकरण और स्वामित्व की त्रुटियां मिलीं।
  • 1.5 लाख संपत्तियों में पूरा डेटा उपलब्ध नहीं था।
  • लगभग 40 हजार संपत्तियों में मालिक बदलने के बाद भी रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ।
  • कई मामलों में संपत्ति मालिकों के मोबाइल नंबर और वर्तमान पते उपलब्ध नहीं थे।

इन त्रुटियों को दूर करने के लिए इस बार उन्नत रडार और 3D तकनीक को चुना गया है।


इस बार ड्रोन नहीं, रडार सर्वे: क्या बदलेगा?

पहले प्रस्ताव था कि सर्वे ड्रोन तकनीक से किया जाएगा, लेकिन निगम समिति ने अंतिम निर्णय रडार तकनीक पर लिया।

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रडार सर्वे से क्या मिलेगा?

  • शहर का सटीक त्रि-आयामी (3D) मानचित्र
  • हर भवन की ऊंचाई, फ्लोर, निर्माण प्रकार
  • वास्तविक भू-आकृति का विवरण
  • हाई-रेज़ोल्यूशन मैपिंग
  • भविष्य में सीवरेज, पेयजल पाइपलाइन, सड़क निर्माण एवं मास्टर प्लान बनाने में मद्दत

रडार तकनीक अपनाने से लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन सटीकता कई गुना बढ़ जाएगी।


खर्च और संभावित लाभ: ऐसे समझें

  • रडार सर्वे की कुल लागत: 80–90 करोड़ रुपये
  • प्रति संपत्ति लागत: लगभग 150 रुपये
  • अनुमानित नई संपत्तियां: 50,000–60,000
  • संभावित अतिरिक्त वार्षिक राजस्व: लगभग 100 करोड़ रुपये

यानी सर्वे की लागत 1 साल के भीतर ही टैक्स संग्रह में होने वाली वृद्धि से निकल आएगी।


दूसरा चरण: घर-घर जाकर डेटा सत्यापन

रडार सर्वे के बाद निगम की टीम घर-घर पहुंचेगी और:

  • हर संपत्ति मालिक को फोटो और विवरण सहित डिमांड नोटिस दिया जाएगा
  • यदि कोई त्रुटि मिलती है तो 7 दिनों के भीतर दावा-आपत्ति की जा सकेगी
  • निगम इसके लिए अलग सेल भी बनाएगा

रायपुर के तेजी से बढ़ते विस्तार को मिलेगा सही रिकॉर्ड

2018 के बाद रायपुर में:

  • बड़े पैमाने पर नए आवासीय कॉलोनियां,
  • व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स,
  • मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट,
  • और प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स विकसित हुए हैं।

निगम का अनुमान है कि पिछले 7 वर्षों में कम से कम 60 हजार नई संपत्तियां तैयार हुई हैं, लेकिन रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाईं।

नया सर्वे इन्हें टैक्स दायरे में लाएगा।

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