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राजनाथ सिंह का ऐतिहासिक बयान: सभ्यतागत रूप से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा

‘बॉर्डर बदलते रहते हैं…’ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, कहा—भारत का हिस्सा बन सकता है सिंध

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि सीमाएं स्थायी नहीं होतीं, समय के साथ बदलती रहती हैं, और संभव है कि एक दिन सिंध क्षेत्र भी दोबारा भारत का हिस्सा बन जाए। सिंह ने यह टिप्पणी देते हुए कहा कि आज भले ही भू-राजनीतिक परिस्थितियां अलग हों, लेकिन सभ्यतागत रूप से सिंध हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है

पीओके पर भी दिया बड़ा बयान

इससे पहले 22 सितंबर को मोरक्को में भारतीय समुदाय के साथ संवाद के दौरान रक्षामंत्री ने पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) पर अपनी स्पष्ट स्थिति दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि भारत को पीओके वापस पाने के लिए कोई आक्रामक कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वहां के लोग खुद पाकिस्तान के कब्जे से मुक्ति चाहते हैं।
सिंह ने कहा था:

“पीओके अपने आप हमारा होगा। वहां मांगें शुरू हो चुकी हैं… नारेबाजी आप सुन ही रहे हैं।”

उनके इस बयान को केंद्र सरकार की रणनीतिक सोच का साफ संकेत माना जा रहा है।

‘सभ्यतागत रूप से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा’

राजनाथ सिंह ने सिंध क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सभ्यतागत और सांस्कृतिक रूप से सिंध भारत से अलग नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमाएं समय के साथ बदलती हैं—इसलिए भविष्य में सिंध के भारत से पुनः जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा:

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“आज भले ही सिंध भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन सभ्यतागत रूप से सिंध हमेशा हमारे साथ रहा है। कौन जाने, कल सीमाएं बदलें और सिंध फिर से भारत में शामिल हो जाए।”

लालकृष्ण आडवाणी का संदर्भ

कार्यक्रम के दौरान सिंह ने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंधी हिंदुओं की पीढ़ी, विशेषकर आडवाणी जी, आज तक सिंध के भारत से अलग होने को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने कहा कि आडवाणी ने अपनी किताब में इस पीड़ा और सिंध के प्रति अपनी भावनाओं को विस्तार से लिखा है।

‘सिंधी हिंदू और मुसलमान दोनों सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं’

रक्षामंत्री ने कहा कि न केवल हिंदू, बल्कि सिंध के कई मुसलमान भी सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं। उनका मानना है कि सिंधु नदी का जल मक्का के आब-ए-जमजम से कम पवित्र नहीं है।
यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि सिंध का सभ्यतागत और सांस्कृतिक रिश्ता भारत के साथ बहुआयामी रहा है।

पृथक होने का इतिहास

1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान सिंध क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया था। उस समय बड़ी संख्या में सिंधी हिंदू भारत आकर बस गए। आज सिंधी समुदाय पूरे भारत में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत भूमिका निभा रहा है।

राजनाथ सिंह के बयान का राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व

रक्षामंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। सिंध और पीओके—दोनों क्षेत्रों में स्थानीय असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में राजनाथ सिंह की टिप्पणी को रणनीतिक संकेत और कूटनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है।


 

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