Ram Mandir Dhwajarohan: अयोध्या में गूंजा जय श्रीराम, ध्वजारोहण के ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने लाखों भक्त

Ram Mandir Dhwajarohan: ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा ‘जय श्रीराम’

अयोध्या। श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराए जाने का ऐतिहासिक क्षण पूरे अयोध्या को भक्ति और उत्साह से सराबोर कर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण करते ही संपूर्ण नगर में ‘जय श्रीराम’ के जयघोष गूंज उठे। लता मंगेशकर चौक सहित धर्मपथ और आसपास की प्रमुख सड़कों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस दृश्य के साक्षी बने। ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण देखते ही लोग भावविभोर हो उठे और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

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सात पवित्र पताकाओं से सजा श्रीराम मंदिर परिसर

अयोध्या में ध्वजारोहण की परंपरा को पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न किया गया। काशी से 19 नवंबर को विद्वानों का एक दल अयोध्या पहुंचा, जबकि 20 नवंबर को वाराणसी और दक्षिण भारत से अन्य विद्वान आए। मंदिर के मुख्य शिखर के साथ कुल सात धर्मपताकाएं फहराई गईं—एक शेषावतार मंदिर में और छह परकोटा के पंचायतन के छह मंदिरों में। यह सम्पूर्ण व्यवस्था वैदिक परंपराओं और विशेष धार्मिक प्रक्रिया के अंतर्गत की गई।

श्रीराम मंदिर में फहराई गई ध्वजा 11 फीट ऊंची और 22 फीट लंबी है, जो शुद्ध सिल्क से निर्मित है और लगभग 4 किलो वजनी है। ध्वज पर सूर्य, ‘ॐ’ और कोविदार वृक्ष के पवित्र चिन्ह अंकित हैं। इसे 42 फीट ऊंचे और 5100 किलो वजनी ध्वजदंड पर स्थापित किया गया। ध्वजारोहण का शुभ मुहूर्त पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ द्वारा निर्धारित किया गया, जिन्होंने इससे पहले प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त भी निकाला था।

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भक्ति-संगीत में डूबा रामनगरी का वातावरण

धर्मध्वजा फहराए जाने के साथ पूरा वातावरण भक्ति रस से भर उठा। बिहार के गोपालगंज से पहुंचे एक रामभक्त, जो हनुमान जी की वेशभूषा में थे, ने अपने नृत्य और गायन से समारोह को अलौकिक बना दिया। दिल्ली से आई श्रद्धालु महिलाएं—मधु, धारणा, संतोष और पूजा—ने कहा कि राम मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही उन्हें “देवलोक जैसी अनुभूति” हुई।

पिछले 25 वर्षों से अयोध्या आ रहे संत रमाकांत शर्मा ने कहा कि यह नगर आज आधुनिकता और त्रेतायुगीन आभा का अद्भुत संगम बन चुका है। ढोल-मंजीरे और वैदिक मंत्रों के स्वर मिलकर जैसे पूरी रामनगरी को एक दिव्य सांस्कृतिक पर्व में परिवर्तित कर रहे थे।

देशभर से उमड़े श्रद्धालु, भावविभोर हुए भक्त

अयोध्या के पड़ोसी जिलों—सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी—सहित उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी भारी भीड़ उमड़ी। श्रावस्ती से आए राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने बताया कि वे 17 नवंबर को ही अयोध्या पहुंच गए थे और आज इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “मोदी और योगी ने अयोध्या को उसका खोया गौरव वापस दिलाया है।”

श्रावस्ती के ही विश्वनाथ जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का कार्य ऐतिहासिक है और “मोदी-योगी ने वह कर दिखाया जो सदियों में कोई नहीं कर सका।”