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मां ने दी अपनी किडनी, सफदरजंग अस्पताल ने किया इतिहास रचने वाला ट्रांसप्लांट

बेटे की जान बचाने मां ने दान की अपनी किडनी; सफदरजंग अस्पताल ने किया कमाल

किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में पहली बार 11 साल के बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट

दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल ने किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 19 नवंबर 2025 को यहां पहली बार 11 साल के बच्चे का सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण (पेडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट) किया गया। यह न केवल सफदरजंग अस्पताल का पहला बाल चिकित्सा ट्रांसप्लांट है बल्कि देश के किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में किया गया पहला सफल पेडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट भी है।

ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व डॉ. पवन वासुदेवा ने किया

सर्जिकल ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. पवन वासुदेवा ने किया। टीम में प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार भी जुड़े रहे।
बच्चे का इलाज कर रही बाल रोग टीम का नेतृत्व डॉ. शोभा शर्मा ने किया, जिनके साथ डॉ. श्रीनिवासवरदन और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप के. देबता शामिल थे।
एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुशील ने किया और उनके साथ डॉ. ममता तथा डॉ. सोनाली की विशेषज्ञ टीम सहयोग में रही।

बच्चा गंभीर बीमारी से जूझ रहा था

11 वर्षीय बच्चा बाइलैटरल हाइपोडिसप्लास्टिक किडनी जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। करीब डेढ़ साल पहले उसे गंभीर हालत में सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट भी हुआ था।
जांच में पता चला कि दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं। तब से बच्चा नियमित डायलिसिस पर था।

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मां ने दान की अपनी किडनी – सरकारी अस्पताल में 15 लाख का इलाज हुआ मुफ्त

बच्चे की जान उसकी 35 साल की मां ने अपनी किडनी दान करके बचाई
अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि यह उपलब्धि मेडिकल टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
उन्होंने बताया:

  • निजी अस्पताल में यह ऑपरेशन लगभग 15 लाख रुपये का आता
  • बच्चे का परिवार सुल्तानपुर (उ.प्र.) का है और पिता दिहाड़ी मजदूर हैं
  • आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते परिवार लगभग उम्मीद खो चुका था

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद लगने वाली महंगी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं भी बच्चे को मुफ्त दी जाएंगी

ट्रांसप्लांट तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण

डॉ. पवन वासुदेवा ने बताया:

  • बच्चों में किडनी ट्रांसप्लांट बेहद जटिल होता है
  • बड़े वेसल्स से किडनी जोड़ने में अधिक जोखिम रहता है
  • वयस्क किडनी के लिए शरीर में पर्याप्त जगह बनाना भी तकनीकी चुनौती होती है

डॉक्टरों के अनुसार ट्रांसप्लांट की गई किडनी अब पूरी तरह काम कर रही है, बच्चा डायलिसिस से मुक्त हो चुका है और जल्द ही उसे घर भेज दिया जाएगा।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि

यह उपलब्धि न केवल सफदरजंग अस्पताल बल्कि देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं पर नया भरोसा मिला है।

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