
India-Russia Defence Deal: रूस ने RELOS समझौते को दी मंजूरी, भारत-रूस अब साझा करेंगे सैन्य बेस
भारत और रूस के बीच RELOS समझौते को स्टेट ड्यूमा ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य बेस और लॉजिस्टिक सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। पुतिन के भारत दौरे से पहले यह बड़ी डिफेंस डील हुई है।
India-Russia Defence Deal: रूस-भारत का RELOS समझौता मंजूर, अब दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य बेस का कर सकेंगे उपयोग
नई दिल्ली / मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से ठीक 24 घंटे पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली बड़ी खबर सामने आई है। रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा ने मंगलवार को भारत और रूस के बीच हुए महत्वपूर्ण सैन्य समझौते RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support Agreement) को मंजूरी दे दी है।
इस समझौते के बाद भारत वह पहला देश बन जाएगा जिसके साथ अमेरिका और रूस दोनों के साथ सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर साझा करने का समझौता होगा।
भारत-रूस संबंध और अधिक मजबूत होंगे — रूसी संसद स्पीकर
रूस के संसद स्पीकर ने कहा कि
“भारत और रूस के रिश्ते बेहद मजबूत हैं। यह समझौता उन रिश्तों को और बेहतर बनाएगा।”
रूसी सरकार ने भी कहा कि RELOS से दोनों देशों की मिलिट्री पार्टनरशिप गहरी होगी और जरूरत के समय आपसी सहयोग आसान होगा।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने की पुष्टि
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि समझौता अंतिम चरण में है और इससे किसी भी तरह का अमेरिका-रूस सैन्य टकराव का जोखिम नहीं है।
उनके अनुसार,
“यह समझौता केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट और पीस-टाइम मिलिट्री कोऑपरेशन के लिए है। युद्ध की स्थिति में मिलिट्री बेस के उपयोग की अनुमति इसमें शामिल नहीं है।”
क्या मिलेगा इस समझौते से?
RELOS समझौते के तहत दोनों देश अब एक-दूसरे की सेनाओं को—
- ईंधन (Fuel Support)
- सैन्य उपकरणों की मरम्मत (Maintenance)
- सामान और सप्लाई (Logistics Support)
- ट्रेनिंग और संयुक्त अभ्यास (Peace-Time Cooperation)
की सुविधा दे सकेंगे।
अब दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के मिलिट्री बेस पर—
- विमान और वॉरशिप ईंधन भर सकेंगे
- फैसिलिटीज का उपयोग कर सकेंगे
- तैनाती और डेरा डाल सकेंगे
इस पर आने वाला खर्च बराबर-बराबर उठाया जाएगा।
समझौता कब हुआ था?
यह सैन्य समझौता इस साल 18 फरवरी को भारत और रूस के बीच साइन हुआ था।
पिछले हफ्ते रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे संसद में प्रस्तुत किया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
पुतिन का भारत दौरा — सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को नई दिल्ली आ रहे हैं।
वे यहां 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
- पुतिन का ठिकाना सीक्रेट रखा गया है।
- 4-5 दिसंबर को दिल्ली मल्टी-लेयर सिक्योरिटी के घेरे में रहेगी।
पुतिन के दौरे से पहले यह मंजूरी दोनों देशों के बीच संबंधों को नई मजबूती देगी।












