
नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण पर कांग्रेस का हमला, गांधी योजना को लेकर फडणवीस सरकार पर वैचारिक पलटवार
नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण और गांधी से जुड़ी योजना पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने फडणवीस सरकार पर धोखा और वैचारिक विरोधाभास का आरोप लगाया।
नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण और गांधी योजना पर सियासी संग्राम, कांग्रेस का फडणवीस सरकार पर धोखा और वैचारिक पलटवार का आरोप
✍️ प्रदेश खबर | मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तेज सियासी बयानबाज़ी देखने को मिल रही है। नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम “लोकनेते डी.बी. पाटिल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा” रखने के फैसले और महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना (VB-G RAM G) को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार पर धोखा देने, वादाखिलाफी और वैचारिक दोहरेपन का आरोप लगाया है।
मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि यह फैसला न सिर्फ स्थानीय जनभावनाओं की अनदेखी है, बल्कि सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं और विचारधारा में विरोधाभास को भी उजागर करता है।
नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण पर तीखा हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा—
“ये एक धोखा है। देवेंद्र फडणवीस जो कहते हैं, वह करते नहीं हैं। क्या उनकी शॉर्ट-टर्म मेमोरी चली गई है, इस पर भी शक होता है।”
सपकाल ने दावा किया कि डी.वाई. पाटिल नवी मुंबई क्षेत्र के भूमि पुत्र थे और एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा जाना चाहिए था। उनके अनुसार—
“डी.वाई. पाटिल वहां के भूमि पुत्र थे। एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर होना चाहिए। लेकिन देवेंद्र फडणवीस अपने आलाकमान को खुश करने और खुशामत करने में लगे हैं।”
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने स्थानीय पहचान और क्षेत्रीय भावनाओं की उपेक्षा करते हुए राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी।
स्थानीय अस्मिता बनाम राजनीतिक निर्णय
नवी मुंबई एयरपोर्ट का मुद्दा केवल नामकरण तक सीमित नहीं है। यह मामला अब स्थानीय अस्मिता, क्षेत्रीय सम्मान और राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़ गया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि डी.वाई. पाटिल ने इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्थानीय लोग लंबे समय से एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखने की मांग कर रहे थे।
हर्षवर्धन सपकाल के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर मराठा नेतृत्व, क्षेत्रीय स्वाभिमान और केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गया है।
महात्मा गांधी से जुड़ी योजना पर वैचारिक पलटवार
नवी मुंबई एयरपोर्ट के साथ-साथ कांग्रेस ने VB-G RAM G योजना को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि—
“महात्मा गांधी के नाम पर जो योजना शुरू हुई थी, उसे लेकर 2014 में नरेंद्र मोदी जी ने कांग्रेस की विफलता का स्मारक कहा था और इस योजना को खूब कोसा था।”
उन्होंने याद दिलाया कि उस समय भाजपा नेतृत्व ने न सिर्फ कांग्रेस की आलोचना की थी, बल्कि इस योजना की सोच और आधार पर भी सवाल उठाए थे।
‘अब उसी सोच पर आगे बढ़ रही सरकार’
सपकाल ने कहा कि—
“आज अगर पीछे मुड़कर देखें तो अब उसी योजना और उसी सोच का कहीं न कहीं आधार लेते हुए सरकार को आगे बढ़ने की जरूरत महसूस हो रही है।”
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने पहले जिन योजनाओं को अप्रासंगिक और विफल बताया था, आज वही योजनाएं संशोधित रूप में अपनाई जा रही हैं, जो वैचारिक विरोधाभास को दर्शाता है।
राज्यों पर बढ़ा वित्तीय बोझ?
हर्षवर्धन सपकाल ने योजना के वित्तीय ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा—
“पहले इस योजना में 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का था और 90 प्रतिशत केंद्र सरकार का। अब राज्य के हिस्से को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है।”
कांग्रेस का दावा है कि इससे—
- राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा
- कमजोर राज्यों के लिए योजना लागू करना कठिन होगा
- केंद्र सरकार धीरे-धीरे अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है
सपकाल ने आरोप लगाया कि यह बदलाव योजना को धीरे-धीरे बंद करने की दिशा में कदम हो सकता है।
गांधी विचारधारा का राजनीतिक इस्तेमाल?
अपने बयान में हर्षवर्धन सपकाल ने महात्मा गांधी के अंतिम शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा—
“जिस आदमी ने मरते समय ‘हे राम’ कहा और देश के लिए अपने प्राण त्याग दिए, उस महात्मा गांधी के नाम की योजना को पहले अपमानित किया गया और आज उसी विचारधारा का सहारा लिया जा रहा है।”
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गांधी जी के नाम और विचारों का राजनीतिक सुविधानुसार उपयोग किया जा रहा है, जो नैतिक रूप से गलत है।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई बहस
इन बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में—
- भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
- नवी मुंबई एयरपोर्ट नामकरण फिर सुर्खियों में
- केंद्र–राज्य वित्तीय हिस्सेदारी पर बहस
देखने को मिल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में ऐसे मुद्दे जनभावनाओं को प्रभावित करने का काम करते हैं।
भाजपा की ओर से जवाब की प्रतीक्षा
कांग्रेस के इन आरोपों पर भाजपा और राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पहले भी भाजपा नेताओं का कहना रहा है कि एयरपोर्ट का नामकरण जनभावनाओं और ऐतिहासिक योगदान को ध्यान में रखकर किया गया है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है।
नवी मुंबई एयरपोर्ट का नामकरण और गांधी से जुड़ी योजना—दोनों मुद्दे यह दिखाते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में विकास, पहचान और विचारधारा तीनों मोर्चों पर टकराव जारी है।
हर्षवर्धन सपकाल के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—
- क्या फैसले स्थानीय भावनाओं के अनुरूप हैं?
- क्या योजनाएं वैचारिक निरंतरता के साथ चलाई जा रही हैं?
इन सवालों के जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम में और स्पष्ट होंगे।








