
NIT जमशेदपुर दीक्षांत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: विकसित भारत का सपना समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन से होगा साकार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने NIT जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह में कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि समान अवसर और सामाजिक जिम्मेदारी से बनेगा।
विकसित भारत केवल इमारतों से नहीं, समान अवसर और गरिमा से बनेगा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
जमशेदपुर (झारखंड)।भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल ऊँची इमारतों या मजबूत अर्थव्यवस्था से पूरा नहीं होगा, बल्कि ऐसे समाज के निर्माण से साकार होगा जहाँ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन मिल सके।
NIT जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा और ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ जन-सामान्य तक पहुंचे।
इंजीनियर बनें राष्ट्र निर्माता
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि NIT जैसे संस्थानों में शिक्षित इंजीनियरों को केवल तकनीकी विशेषज्ञ नहीं, बल्कि nation-builders की भूमिका निभानी चाहिए, जो तकनीकी विकास को मानव कल्याण का माध्यम बनाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की प्रतिष्ठा केवल रैंकिंग और प्लेसमेंट से नहीं आंकी जानी चाहिए, बल्कि इस बात से भी तय होनी चाहिए कि वह संस्थान और उसके विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के लिए क्या योगदान दे रहे हैं।
तकनीक के कुप्रभावों पर नियंत्रण में भूमिका निभाएं संस्थान
राष्ट्रपति ने कहा कि NIT जमशेदपुर जैसे प्रमुख हितधारकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे आधुनिक तकनीकों के समाज और आम नागरिकों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के नियंत्रण और समाधान में सक्रिय भागीदारी करें।
उन्होंने जोर दिया कि संस्थान न केवल समाधान खोजें, बल्कि अन्य शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के साथ मिलकर उन्हें सतत और स्थाई समाधान में भी बदलें।
डिफेंस, स्पेस और परमाणु ऊर्जा में उद्यम के अवसर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार के प्रयासों से अब परंपरागत क्षेत्रों के साथ-साथ डिफेंस, स्पेस और एटॉमिक एनर्जी जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी युवाओं को उद्यम स्थापित करने के अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग कर स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार सृजन करें और देश के आर्थिक-सामाजिक विकास में योगदान दें।












