Advertisement

UAPA पर बड़ा सवाल: उमर खालिद को 5 साल बाद भी राहत नहीं, गुरदीप सिंह सप्पल ने सुप्रीम कोर्ट के रुख पर उठाए प्रश्न

नई दिल्ली। गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख को लेकर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए न्याय प्रक्रिया और अदालत की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि बिना ट्रायल किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखने की सीमा क्या होनी चाहिए, यह सवाल अब और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने UAPA केस में उमर खालिद को पांच साल जेल में रहने के बाद भी राहत नहीं दी और एक साल और प्रतीक्षा करने की बात कही।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

सप्पल ने सवाल उठाया कि अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि एक साल की यह नई समय-सीमा किस कानूनी आधार पर तय की गई है। क्या यह निर्णय किसी स्पष्ट विधिक सिद्धांत पर आधारित है या फिर यह मनमाना (arbitrary) है — यह चिंता का विषय है।

उन्होंने आगे कहा कि क्या UAPA जैसे मामलों में अदालत का स्वाभाविक झुकाव जांच एजेंसियों या राज्य की ओर होना चाहिए? कोर्ट का दायित्व न्याय करना है, न कि किसी एक पक्ष का समर्थन करना। न्याय प्रक्रिया का अर्थ है कि अदालत को यह तय करना चाहिए कि राज्य का पक्ष सही है या अभियुक्त का।

गुरदीप सिंह सप्पल ने जोर देते हुए कहा कि सिद्धांततः कोर्ट के लिए नागरिक और राज्य दोनों समान होने चाहिए। चाहे मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो या व्यक्तिगत स्वतंत्रता का, अदालत का यह मूल स्वभाव बना रहना चाहिए। लेकिन उनके अनुसार, यह अवधारणा अब धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है, जो लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47