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पश्चिम बंगाल में मूर्तियों की तोड़फोड़ पर अमित मालवीय का हमला, ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में मूर्तियों की तोड़फोड़, अमित मालवीय ने ममता सरकार पर साधा निशाना

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले के शांतिपुर क्षेत्र में काली और सरस्वती की मूर्तियों की कथित तौर पर तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। यह घटना लोकनाथ मंदिर, मटाल गढ़ के पास एक कुम्हार जयंत दास की कार्यशाला के बाहर हुई, जहां पूजा के लिए तैयार की जा रही लगभग 50–60 मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया।

घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को सनातन धर्म पर हमला करार देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।


“हिंदू आस्था और कारीगरों की रोज़ी पर हमला” — अमित मालवीय

अमित मालवीय ने अपने बयान में कहा कि सुबह के समय अराजक तत्वों ने मूर्तियों को तोड़ा, जो पूजा के लिए बनाई जा रही थीं। उन्होंने इसे न केवल धार्मिक आस्था पर हमला, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका पर चोट बताया।

भाजपा नेता ने दावा किया कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि राज्य में ऐसी घटनाओं की एक श्रृंखला सामने आ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि:

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  • सरशुना में काली प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया
  • मंदिरबाज़ार में जगद्धात्री प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया
  • और अब शांतिपुर में सरस्वती व काली की मूर्तियों की तोड़फोड़ हुई

मालवीय ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में कट्टरपंथी तत्वों को संरक्षण मिल रहा है और पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है। उन्होंने इसे “जंगलराज” की संज्ञा देते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक तनाव बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम लोगों में आक्रोश है।

इस घटना को लेकर फिलहाल राज्य सरकार या पुलिस प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस द्वारा मामले की जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और धार्मिक सुरक्षा से जोड़कर उठा रहा है।

घटना के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा बढ़ाए जाने और दोषियों की पहचान की मांग की जा रही है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।

 

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