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थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की श्रीलंका के रक्षा नेतृत्व से वार्ता, द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर फोकस

थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री और रक्षा सचिव के साथ अहम बैठक की। वार्ता में भारत–श्रीलंका रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय, आपदा राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की श्रीलंका के रक्षा नेतृत्व से अहम वार्ता, द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली। भारत के थलसेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अरुणा जयसेकरा और श्रीलंका के रक्षा सचिव एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) संपत थुयाकोंथा के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रक्षा वार्ता की। यह बैठक भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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इस उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान दोनों देशों के रक्षा नेतृत्व ने सैन्य-से-सैन्य सहयोग को मजबूत करने, संयुक्त प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (Humanitarian Assistance & Disaster Relief – HADR) के क्षेत्र में आपसी समन्वय को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और श्रीलंका का मजबूत रक्षा सहयोग अत्यंत आवश्यक है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए रक्षा साझेदारी को और गहराई देने का संकल्प दोहराया।

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक संबंध, सांस्कृतिक जुड़ाव और आपसी विश्वास रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यास और सूचनाओं के आदान-प्रदान से दोनों देशों की सेनाएं अधिक प्रभावी और सक्षम बनेंगी।

श्रीलंका के रक्षा नेतृत्व ने भी भारत के साथ रक्षा सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक है। उन्होंने भारत द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और रक्षा क्षमताओं के विकास में दिए जा रहे समर्थन की सराहना की।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में रक्षा सहयोग को नए आयाम देने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों, सेमिनारों और रणनीतिक संवाद को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर भी सहमति जताई।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत और श्रीलंका का यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, यह बैठक भारत–श्रीलंका रक्षा संबंधों को नई दिशा देने वाली साबित होगी और दोनों देशों के बीच स्थायी रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगी।

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