
अनधिकृत अनुपस्थिति पर सख़्ती: 22 शिक्षकों-कर्मचारियों को अंतिम कारण बताओ नोटिस
अंबिकापुर में बिना सूचना लंबे समय से अनुपस्थित 22 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को जिला शिक्षा अधिकारी ने अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया, सेवा से हटाने की चेतावनी।
22 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को जारी किया गया अंतिम कारण बताओ नोटिस
अंबिकापुर, 15 जनवरी 2026/जिले में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़, अनुशासित एवं प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से लंबे समय से बिना सूचना एवं स्वीकृति के अनुपस्थित 22 शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध जिला शिक्षा अधिकारी, अंबिकापुर द्वारा अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी सूचना में स्पष्ट किया गया है कि बिना पूर्व सूचना एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहना कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के उपनियम-03 एवं उपनियम-07 के प्रतिकूल है।
दीर्घशास्ति का प्रावधान
जारी सूचना में बताया गया है कि उक्त कृत्य के लिए संबंधित कर्मचारी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-10 के अंतर्गत दीर्घशास्ति के भागी हैं।
साथ ही छत्तीसगढ़ शासन, वित्त विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर के दिनांक 22 मार्च 2018 के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि कोई शासकीय सेवक तीन वर्ष से अधिक अवधि तक निरंतर कर्तव्य से अनुपस्थित रहता है, तो उसे शासकीय सेवा से त्यागपत्र दिया हुआ माना जाएगा।
सेवा से हटाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन
इसके अतिरिक्त सामान्य प्रशासन विभाग (नियम शाखा) के दिनांक 14 मई 2024 के पत्र के अनुक्रम में संबंधित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत सेवा से हटाने अथवा पदच्युत किए जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन बताई गई है।
7 दिवस में जवाब अनिवार्य
जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देशित किया है कि संबंधित सभी शिक्षक एवं कर्मचारी अंतिम कारण बताओ नोटिस की प्राप्ति के सात दिवस के भीतर अपना प्रतिउत्तर उचित माध्यम से कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें।
निर्धारित समय-सीमा में प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं होने अथवा असंतोषजनक उत्तर की स्थिति में नियमानुसार सेवा से हटाने अथवा पदच्युत किए जाने की कार्यवाही की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की स्वयं की होगी।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं शैक्षणिक कार्यों की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए अनुशासन सर्वोपरि है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।








