
‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की बड़ी सफलता: 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा बयान
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता, 81 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले—बंदूक नहीं, विकास के साथ है भविष्य।
‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की ऐतिहासिक सफलता
81 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा में लौटे
“बंदूक के नहीं, विकास के साथ है भविष्य” — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर, 15 जनवरी 2026/छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे निर्णायक अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति के तहत पिछले 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़ दिया है।
इनमें ‘पूना मारगेम’ अभियान के अंतर्गत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण अभियान अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
हिंसा की विचारधारा पर भरोसे की जीत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को हिंसा की विचारधारा पर विश्वास की निर्णायक विजय बताया। उन्होंने कहा कि—
“पिछले 48 घंटों में 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ रहा, बल्कि पूरी तरह बिखर रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब न केवल माओवादी संगठन, बल्कि उसकी विकृत विचारधारा और पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका है।
भय से भविष्य की ओर बस्तर
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जहाँ कभी भय, भ्रम और दबाव का माहौल था, वहाँ अब—
- शासन की सशक्त उपस्थिति
- सुरक्षा बलों की सक्रियता
- और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच
ने लोगों के मन में नया भरोसा पैदा किया है।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब बंदूक नहीं, बल्कि भविष्य की राह चुन रहा है।
‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ बना भरोसे का आधार
सरकार की ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति के तहत हिंसा छोड़ने वाले भटके युवाओं को—
- सम्मानजनक जीवन
- सुरक्षा
- आजीविका के अवसर
- और सामाजिक पुनर्स्थापन
उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यापक आत्मसमर्पण सरकार की नीति पर जनता के भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
नक्सल-मुक्त भारत का लक्ष्य निर्णायक मोड़ पर
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता का श्रेय—
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व
- और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन
को देते हुए कहा कि—
“31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेज़ी से निर्णायक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।”
उन्होंने दो टूक कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है।
बस्तर में अब—
- सड़कें
- स्कूल
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- आजीविका
- और शासन की पहुँच
लगातार मजबूत हो रही है।
यह आत्मसमर्पण केवल एक सुरक्षा उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संदेश है कि छत्तीसगढ़ अब हिंसा नहीं, विकास और विश्वास के रास्ते पर आगे बढ़ चुका है।











