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आदि शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति को वैचारिक आधार दिया: अमित शाह

आदि शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति को वैचारिक आधार देकर युगों तक सुरक्षित किया: अमित शाह

सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट के योगदान को बताया गुजरात के चरित्र निर्माण की आधारशिला

गुजरात, 15 जनवरी 2026/केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि आदि शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति को केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैचारिक और तार्किक आधार देकर उसे और अधिक व्यापक तथा सुदृढ़ बनाया। उन्होंने कहा कि चार मठों की स्थापना के माध्यम से शंकराचार्य जी ने ऐसी परंपरा विकसित की, जिसने सनातन धर्म को युगों तक संरक्षित और संवर्धित रखने का कार्य किया।

अमित शाह ने यह विचार ‘सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट’ द्वारा आदि शंकराचार्य जी के 15 प्रमुख ग्रंथों के प्रकाशन से जुड़े कार्यक्रम के संदर्भ में व्यक्त किए।


चार मठ, एक राष्ट्र—सनातन परंपरा का संगठनात्मक स्वरूप

गृह मंत्री ने कहा कि—

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  • उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में चार मठों की स्थापना
  • देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधने का कार्य
  • वैदिक और अद्वैत दर्शन को जनमानस तक पहुँचाने की ऐतिहासिक पहल

आदि शंकराचार्य की यह विरासत आज भी भारत की आध्यात्मिक चेतना का आधार है।


अखंडानंद जी और सस्तु ट्रस्ट का ऐतिहासिक योगदान

अमित शाह ने अपने एक अन्य संदेश में कहा कि—

“गुजरात के सामूहिक चरित्र निर्माण में अखण्डानंद जी और उनके द्वारा स्थापित सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट का बहुत बड़ा योगदान है।”

उन्होंने कहा कि सस्तु ट्रस्ट ने—

  • शुद्ध, प्रमाणिक और सुलभ धार्मिक-दार्शनिक साहित्य
  • समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य
  • विचार, मूल्य और संस्कारों को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोने की भूमिका

निभाई है।


सनातन साहित्य संरक्षण को बताया राष्ट्र निर्माण से जुड़ा कार्य

गृह मंत्री ने कहा कि सनातन साहित्य का संरक्षण केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र के वैचारिक मूल्यों को सुरक्षित रखने का प्रयास है। ऐसे प्रयास भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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