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दिखो नदी: नागालैंड से निकलती असम की 236 किमी लंबी प्रमुख सहायक नदी

दिखो नदी नागालैंड के ज़ुनहेबोटो ज़िले से उत्पन्न होकर असम के शिवसागर ज़िले के मैदानों से बहती है और ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती है। यह नदी स्थानीय जीवन, कृषि, जल प्रबंधन और पारिस्थितिकी में अहम भूमिका निभाती है। जानिए इसकी लंबाई, जलग्रहण क्षेत्र और संरक्षण महत्व।

दिखो नदी: नागालैंड से बहती असम की अप्रसिद्ध सहायक नदी

नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026/ भारत की नदियाँ केवल जल प्रवाह का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे संस्कृति, जीवन, कृषि और पारिस्थितिकी का आधार भी हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो असम की एक अप्रसिद्ध नदी, दिखो नदी, स्थानीय जीवन और क्षेत्रीय जल प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नागालैंड के ज़ुनहेबोटो ज़िले से उत्पन्न होने वाली यह नदी असम के शिवसागर ज़िले के नगिनीमारा क्षेत्र से होकर बहती है और अंततः दक्षिणी तट पर स्थित दिखोमुख में विशाल ब्रह्मपुत्र नदी से मिल जाती है।

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नदी का भौगोलिक परिचय

दिखो नदी की कुल लंबाई 236 किलोमीटर है, और इसका जलग्रहण क्षेत्र 4,372 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। असम में इसका प्रवाहित भाग लगभग 98.5 किलोमीटर लंबा है। यह नदी नागालैंड और असम दोनों राज्यों के लिए भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसकी जलधारा न केवल क्षेत्रीय जल संतुलन बनाए रखने में योगदान देती है, बल्कि यह स्थानीय कृषि, मछली पालन और जल आपूर्ति के लिए भी अपरिहार्य है।

नदी के उत्पन्न होने का क्षेत्र ज़ुनहेबोटो में ऊँचाई वाला इलाका है। इस क्षेत्र में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे नदी का प्रवाह निरंतर बना रहता है। जैसे ही यह असम के शिवसागर ज़िले के मैदानों में प्रवेश करती है, इसका बहाव धीमा हो जाता है, जिससे आसपास के कृषि और मानव बस्तियों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलती है।

जलग्रहण क्षेत्र और प्रवाह मार्ग

दिखो नदी का जलग्रहण क्षेत्र 4,372 वर्ग किलोमीटर है। इसका मतलब है कि नदी अपने आसपास के विस्तृत भूभाग से वर्षा और भूजल को संग्रहित करती है। यह क्षेत्र नागालैंड और असम के मिश्रित भूभाग को कवर करता है, जिसमें पहाड़ी, उप-पहाड़ी और मैदानी इलाके शामिल हैं। नदी असम के शिवसागर ज़िले में प्रवेश करते हुए स्थानीय नगिनीमारा क्षेत्र से होकर बहती है और अंततः ब्रह्मपुत्र नदी से मिलती है।

यह प्रवाह मार्ग नदी के पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व को दर्शाता है। इसके किनारे बसे गांव और छोटे शहर नदी के पानी पर निर्भर हैं। नदी न केवल कृषि सिंचाई और जल आपूर्ति में योगदान देती है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

असम में दिखो नदी का महत्व

असम में दिखो नदी का प्रवाहित भाग लगभग 98.5 किलोमीटर लंबा है। यह क्षेत्रीय जीवन के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह नदी स्थानीय कृषि गतिविधियों का मुख्य स्रोत है। इस नदी के किनारे उगाई जाने वाली फसलें—जैसे धान, सब्जियाँ और फल—स्थानीय किसानों की आजीविका का आधार हैं।

दूसरा, नदी मछली पालन और अन्य जलजीव संसाधनों के लिए भी जीवनरेखा है। स्थानीय लोग इस नदी के पानी और जैव विविधता पर निर्भर हैं। तीसरा, नदी क्षेत्र की पारिस्थितिकी को संतुलित रखती है। इसकी कटाव प्रक्रिया और बहाव प्राकृतिक रूप से मिट्टी का संरक्षण करते हैं और बाढ़ को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

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सामाजिक और आर्थिक पहलू

दिखो नदी के आसपास बसे समुदायों की जीवनशैली सीधे-सीधे नदी से जुड़ी है। नदी के जल पर आधारित सिंचाई, मछली पालन, घरेलू उपयोग और स्थानीय उद्योग—जैसे चावल मिल और हस्तशिल्प—स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार हैं।

नदी के महत्व को समझते हुए, भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय और जल संसाधन विभाग, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प ने इस नदी के संरक्षण और सतत प्रबंधन के लिए पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य नदी के जल संसाधनों का उचित प्रबंधन, पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना और स्थानीय जीवन को सुरक्षित बनाना है।

पर्यावरणीय और पारिस्थितिक महत्व

दिखो नदी न केवल मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव विविधता के लिए भी जीवनदायिनी है। नदी में पाए जाने वाले जलजीव—मछलियाँ, कीट और अन्य जलीय जीव—स्थानीय खाद्य श्रृंखला का हिस्सा हैं। इसके साथ ही नदी के किनारे उगने वाले वृक्ष और पौधे मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और वर्षा के पानी को जमा करने में मदद करते हैं।

नदी के संरक्षण से न केवल असम के जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी स्थिर किया जा सकता है। यह नदी क्षेत्रीय जल सुरक्षा और सतत कृषि के लिए एक प्राकृतिक आधार प्रदान करती है।

इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

हालांकि दिखो नदी अपेक्षाकृत अप्रसिद्ध है, इसका क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। नदी के किनारे बसे गाँवों में स्थानीय उत्सव और परंपराएँ नदी के जल पर आधारित हैं। यह नदी स्थानीय जनजातियों और समुदायों की संस्कृति और जीवनशैली का प्रतीक है।

संरक्षण और भविष्य की दिशा

भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय ने दिखो नदी के संरक्षण के लिए कई पहल की हैं। इसमें नदी के जल स्तर और प्रवाह की निगरानी, जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा, और नदी किनारे वृक्षारोपण शामिल हैं। इसके अलावा, नदी के सतत उपयोग के लिए स्थानीय किसानों और समुदायों को जल प्रबंधन तकनीक और प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

भविष्य में, यह योजना नदी के पानी के सतत उपयोग, स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण और कृषि और जीवनशैली में सुधार को सुनिश्चित करेगी। नदी के संरक्षण से न केवल पर्यावरणीय संतुलन, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक और सामाजिक स्थिरता भी बढ़ेगी।

दिखो नदी नागालैंड से उत्पन्न होकर असम के शिवसागर ज़िले में बहने वाली 236 किलोमीटर लंबी अप्रसिद्ध सहायक नदी है। यह नदी न केवल ब्रह्मपुत्र नदी की दक्षिणी तटवर्ती महत्वपूर्ण सहायक नदियों में से एक है, बल्कि क्षेत्र की जल आपूर्ति, कृषि, मछली पालन, पारिस्थितिकी और स्थानीय जीवन में भी केंद्रीय भूमिका निभाती है।

स्थानीय जीवन और आर्थिक गतिविधियों के लिए इसका महत्व अत्यधिक है। नदी का सतत प्रबंधन और संरक्षण केवल पर्यावरण की सुरक्षा नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के जीवन और आजीविका को सुरक्षित रखने का एक अहम कदम भी है।

इस प्रकार, दिखो नदी को संरक्षित करना और इसकी पारिस्थितिकी को बनाए रखना असम और नागालैंड दोनों के लिए आवश्यक है। यह नदी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और स्थायित्व की प्रतीक है।

Ashish Sinha

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