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राधानगरी बांध: छत्रपति शाहू महाराज की ऐतिहासिक विरासत, जल संरक्षण, बिजली और पर्यटन का अद्भुत संगम

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित राधानगरी बांध भोगवती नदी पर बना ऐतिहासिक गुरुत्वाकर्षण बांध है। यह सिंचाई, 10 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन, जैव विविधता और पर्यटन के लिए जाना जाता है।

राधानगरी बांध: छत्रपति शाहू महाराज की दूरदर्शिता की अमिट विरासत, जल संरक्षण, ऊर्जा और पर्यटन का अद्भुत संगम

नई दिल्ली|भारत में जल संसाधन प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में कई ऐतिहासिक परियोजनाएँ हैं, लेकिन महाराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले में स्थित राधानगरी बांध अपनी ऐतिहासिक, तकनीकी और पर्यावरणीय विशेषताओं के कारण एक अलग पहचान रखता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD&GR) द्वारा हाल ही में साझा की गई जानकारी के अनुसार राधानगरी बांध न केवल सिंचाई और बिजली उत्पादन का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि यह प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक स्थल बन चुका है।

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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: दूरदर्शी नेतृत्व का उदाहरण

भोगवती नदी पर निर्मित राधानगरी बांध का निर्माण शताब्दियों पहले छत्रपति शाहू महाराज की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उस समय जब आधुनिक इंजीनियरिंग संसाधन सीमित थे, तब इस प्रकार की विशाल जल संरचना का निर्माण करना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि थी। यह बांध इस बात का प्रमाण है कि भारत में जल प्रबंधन और कृषि सुधार की अवधारणा नई नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से सुदृढ़ रही है।

संरचना और तकनीकी विशेषताएँ

राधानगरी बांध एक गुरुत्वाकर्षण बांध (Gravity Dam) है, जिसकी ऊँचाई लगभग 42.68 मीटर है और यह लगभग 11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत है। गुरुत्वाकर्षण बांधों की खासियत यह होती है कि वे अपने भारी वजन के माध्यम से जल के दबाव को संतुलित करते हैं, जिससे इनकी मजबूती और दीर्घायु सुनिश्चित होती है। राधानगरी बांध आज भी अपनी मजबूत संरचना के कारण पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहा है।

सिंचाई: किसानों के लिए जीवनरेखा

राधानगरी बांध का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सिंचाई व्यवस्था के क्षेत्र में है। यह बांध आसपास के कृषि क्षेत्रों को नियमित जल आपूर्ति प्रदान करता है, जिससे फसलों की उत्पादकता बढ़ी है और किसानों की आय में सुधार हुआ है। वर्षा पर निर्भर खेती से आगे बढ़कर यह क्षेत्र अब अधिक स्थिर और सुरक्षित कृषि मॉडल की ओर अग्रसर हुआ है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, राधानगरी बांध ने कोल्हापुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।

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जलविद्युत उत्पादन में योगदान

सिंचाई के साथ-साथ राधानगरी बांध 10 मेगावाट की जलविद्युत उत्पादन क्षमता भी प्रदान करता है। भले ही यह क्षमता बड़े आधुनिक पावर प्रोजेक्ट्स की तुलना में कम हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इससे न केवल बिजली की उपलब्धता बढ़ती है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी मदद मिलती है।

जैव विविधता और पर्यावरणीय महत्व

राधानगरी बांध का क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और समृद्ध जैव विविधता से घिरा हुआ है। यहाँ विभिन्न प्रकार की पक्षी प्रजातियाँ, वन्य जीव और वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। पक्षियों की चहचहाहट और हरियाली से आच्छादित वातावरण इस क्षेत्र को एक प्राकृतिक स्वर्ग का रूप देता है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि राधानगरी क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र जल संरक्षण की अवधारणा को मजबूत करता है।

पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों का आकर्षण

राधानगरी बांध केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ आते हैं, जो यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, झील, जंगलों और पक्षी जीवन का आनंद लेते हैं। यह स्थान पिकनिक स्पॉट, नेचर वॉक और फोटोग्राफी के लिए भी जाना जाता है।
पर्यटन के बढ़ते अवसरों से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए साधन भी मिल रहे हैं।

जल संरक्षण और सतत विकास का संदेश

आज जब देश जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में राधानगरी बांध जल संरक्षण और जल प्रबंधन का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह परियोजना दर्शाती है कि किस प्रकार ऐतिहासिक संरचनाएँ भी आधुनिक जरूरतों के अनुरूप उपयोगी बनी रह सकती हैं।

‘डैम्स ऑफ इंडिया’ पहल में महत्वपूर्ण स्थान

केंद्र सरकार द्वारा ‘Dams of India’ जैसी पहलों के माध्यम से देश के प्रमुख बांधों की जानकारी आम जनता तक पहुँचाई जा रही है। राधानगरी बांध इस श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो भारत की इंजीनियरिंग विरासत, प्राकृतिक संपदा और विकासात्मक सोच को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राधानगरी बांध क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन, बेहतर रखरखाव और आधुनिक तकनीकों का समावेश किया जाए, तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में जल प्रबंधन और पर्यटन दोनों के क्षेत्र में एक मॉडल बन सकता है।

Ashish Sinha

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