
प्रयागराज में शंकराचार्य जी के साथ दुर्व्यवहार: संदीप तिवारी ने दोषियों के बर्खास्तगी की मांग राष्ट्रपति और राज्यपाल को पत्र सौंपकर की
छत्तीसगढ़ स्वर्ण संघर्ष समिति के संरक्षक संदीप तिवारी ने प्रयागराज में जगद्गुरु शंकराचार्य जी के साथ हुई दुर्व्यवहार घटना को सनातन धर्म और हिंदू समाज पर हमला करार देते हुए दोषी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।
रायपुर, छत्तीसगढ़ 24 जनवरी 2026/ प्रयागराज की पवित्र धरती पर मौनी अमावस्या के दिन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ, उसे लेकर छत्तीसगढ़ स्वर्ण संघर्ष समिति के संरक्षक संदीप तिवारी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सनातन धर्म, उसकी हजारों साल पुरानी परंपरा और करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर किया गया खुला और निरालज्ज प्रहार बताया।
संदीप तिवारी ने कहा कि शंकराचार्य का पद किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित सनातन धर्म की सर्वोच्च वैचारिक और आध्यात्मिक सत्ता का प्रतीक है। प्रयागराज वह भूमि है जहां वेद, शास्त्र और संत परंपरा जीवंत हैं। उसी भूमि पर शंकराचार्य जी का मार्ग रोकना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना यह दर्शाता है कि सत्ता के मद में चूर उत्तर प्रदेश सरकार अब सनातन धर्म के अस्तित्व को ही चुनौती देने पर उतर आई है।
उन्होंने कहा कि यह अपराध अक्षम्य है और हिंदू समाज इसे कभी नहीं भूलेगा। भाजपा का हिंदुत्व पूरी तरह बेनकाब हो गया है। संदीप तिवारी ने आरोप लगाया कि जो पार्टी खुद को हिंदू धर्म की रक्षक बताती है, उसी के शासन में जगद्गुरु शंकराचार्य का अपमान होता है। यह भाजपा के ढोंग, पाखंड और झूठे हिंदू प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण है।
संदीप तिवारी ने चेताया कि प्रशासन ने यह सब सरकारी संरक्षण में किया, जो घटना को और भी गंभीर और खतरनाक बनाता है। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरे हिंदू समाज के लिए चेतावनी है। आज शंकराचार्य को रोका गया है, कल किसी और संत को रोका जाएगा। अगर आज हिंदू समाज चुप रहा, तो आने वाला समय और भी भयावह होगा। यह समय मौन का नहीं, जागरण और प्रतिरोध का है।
उन्होंने दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि इस कृत्य में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक कर्मियों को तत्काल निलंबित कर बर्खास्त किया जाए। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और सार्वजनिक जांच कर यह बताया जाए कि यह आदेश किसके इशारे पर दिए गए। संदीप तिवारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो उदाहरण बने, न कि दिखावटी कार्रवाई हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज की सहनशीलता को उसकी कमजोरी न समझा जाए। यह अपमान हर सनातनी के हृदय पर चोट है। यदि दोषियों पर तुरंत और निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जनआक्रोश आंदोलन का रूप लेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
संदीप तिवारी ने जोर देकर कहा कि धर्म, संत और संस्कृति के सम्मान पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल को पत्र सौंपते हुए दोषियों की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की।
पत्र सौंपने के दौरान संदीप तिवारी के साथ पंडित वीरेंद्र शुक्ला, दिनेश पांडे, आशीष पांडे, अतुल द्विवेदी, गुलशन पांडे, सत्यनारायण पांडे, मुकेश चतुर्वेदी, योगेश पांडे, वासु शर्मा, गोलू वेद प्रकाश कुशवाहा, आशीष देवांगन आदि उपस्थित रहे।
संदीप तिवारी ने कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि सनातन धर्म और हिंदू समाज की भावना के खिलाफ हमला है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकार के भीतर बैठे दोषियों द्वारा संतों की मर्यादा को अनदेखा करना किसी भी नागरिक और धर्मपरायण व्यक्ति के लिए अस्वीकार्य है।
इस अवसर पर संदीप तिवारी ने स्पष्ट किया कि पूरे हिंदू समाज की आंखें खुली हुई हैं और वे अब किसी भी तरह की संवैधानिक और धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन को सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आज हिंदू समाज सड़क पर उतरने के लिए तैयार है और इसकी चेतावनी पहले ही दे दी गई है।
संदीप तिवारी का यह भी कहना था कि सनातन धर्म के मूल्यों और परंपराओं का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी हिंदू समाज के लोगों से आग्रह किया कि वे इस मामले में संगठित होकर प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाएं ताकि दोषियों को तत्काल सजा मिले और इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।










