
Budget 2026-27: पी. चिदंबरम का हमला, बोले—आर्थिक रणनीति में पूरी तरह विफल रही सरकार
कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट 2026-27 को आर्थिक रणनीति और वित्तीय प्रबंधन में विफल बताया। जानिए किन 10 चुनौतियों पर सरकार चुप रही।
बजट 2026-27 पर पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का तीखा हमला, बोले—“आर्थिक रणनीति और स्टेट्समैनशिप दोनों में विफल”
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने बजट को “आर्थिक रणनीति और आर्थिक स्टेट्समैनशिप की कसौटी पर पूरी तरह विफल” करार दिया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री का बजट भाषण न तो देश की वास्तविक आर्थिक चुनौतियों को संबोधित करता है और न ही हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 से कोई तालमेल दिखाता है।
पी. चिदंबरम ने कहा कि हर अर्थशास्त्री, बजट विश्लेषक और अर्थशास्त्र का छात्र यह सुनकर हैरान होगा कि संसद में वित्त मंत्री ने क्या प्रस्तुत किया। उन्होंने आशंका जताई कि या तो सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा ही नहीं, या फिर उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण द्वारा चिन्हित 10 प्रमुख चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक शुल्क, लंबे समय से चल रहे वैश्विक व्यापार संघर्ष, चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा, निजी निवेश की कमी, एफडीआई का अनिश्चित भविष्य, एफपीआई का लगातार बाहर जाना, धीमी राजकोषीय समेकन प्रक्रिया, वास्तविक महंगाई और सरकारी आंकड़ों के बीच अंतर, लाखों एमएसएमई का बंद होना, युवाओं में बेरोजगारी और शहरी बुनियादी ढांचे की बदहाली शामिल हैं।
चिदंबरम के अनुसार, इनमें से एक भी मुद्दा वित्त मंत्री के भाषण में गंभीरता से शामिल नहीं किया गया, इसी कारण संसद में तालियों की गूंज औपचारिक रही और दर्शकों की रुचि जल्दी खत्म हो गई।
राजस्व और पूंजीगत खर्च पर सवाल
पूर्व वित्त मंत्री ने 2025-26 के वित्तीय प्रबंधन को “निराशाजनक” बताते हुए कहा कि राजस्व प्राप्तियों में 78,086 करोड़ रुपये की कमी रही, जबकि कुल व्यय 1,00,503 करोड़ रुपये कम रहा। सबसे गंभीर बात यह रही कि पूंजीगत व्यय में 1.44 लाख करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई, जिसमें केंद्र और राज्यों दोनों का हिस्सा शामिल है। इसके बावजूद सरकार ने इस खराब प्रदर्शन पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र का पूंजीगत व्यय जीडीपी के अनुपात में 2024-25 के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत रह गया है।
आम जनता से जुड़े विभागों में भारी कटौती
चिदंबरम ने कहा कि राजस्व व्यय में कटौती का सबसे ज्यादा असर आम लोगों से जुड़े विभागों पर पड़ा है।
- ग्रामीण विकास: ₹53,067 करोड़
- शहरी विकास: ₹39,573 करोड़
- सामाजिक कल्याण: ₹9,999 करोड़
- कृषि: ₹6,985 करोड़
- शिक्षा: ₹6,701 करोड़
- स्वास्थ्य: ₹3,686 करोड़
उन्होंने जल जीवन मिशन के बजट में भारी कटौती को “क्रूर निर्णय” बताया, जो एक समय 67,000 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 17,000 करोड़ रुपये कर दिया गया।
योजनाओं की भरमार, रणनीति का अभाव
पी. चिदंबरम ने बजट में नई योजनाओं, मिशनों, संस्थानों और पहलों की बाढ़ पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कम से कम 24 नई घोषणाएं गिनी हैं, जिनमें से अधिकांश अगले साल तक भुला दी जाएंगी।
कांग्रेस का निष्कर्ष
कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि बजट 2026-27 न तो आर्थिक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है और न ही भविष्य के लिए कोई ठोस रोडमैप देता है। यह बजट केवल घोषणाओं और शब्दों का पुलिंदा बनकर रह गया है।








