राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक : राज्यपाल रमेन डेका | राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का भव्य शुभारंभ

रायपुर, 02 फरवरी 2026/छत्तीसगढ़ की पावन धार्मिक नगरी राजिम स्थित त्रिवेणी संगम के तट पर आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का भव्य शुभारंभ आज संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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राज्यपाल श्री डेका, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संत-महात्माओं एवं अन्य अतिथियों ने भगवान राजीवलोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

राजिम : धर्म, आस्था और संस्कृति का संगम

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि राजिम की पावन भूमि, जहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है, अत्यंत पुण्य और ऐतिहासिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा जिसे ‘कल्प कुंभ’ के नाम से जाना जाता है, वह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प के अवसर पर यहां आकर उन्हें अत्यंत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हो रहा है। देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे साधु-संतों और श्रद्धालुओं का उन्होंने हार्दिक अभिनंदन किया।

राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक

राज्यपाल ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक है। प्राचीन काल से ही राजिम शैव एवं वैष्णव धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां स्थित राजीवलोचन मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में तथा कुलेश्वर महादेव के रूप में भगवान शिव विराजमान हैं।

पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि कुलेश्वरनाथ, पटेश्वरनाथ, चंपेश्वरनाथ, ब्रह्मकेश्वरनाथ, फनीकेश्वरनाथ और करपूरेश्वरनाथ महादेव की पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। इन प्राचीन मंदिरों की बहुलता राजिम को पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट बनाती है। यहां की मूर्ति कला भारत के गौरवशाली इतिहास की साक्षी है।

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माघ माह और मेलों की परंपरा

उन्होंने कहा कि शास्त्रों में माघ माह को पुण्य माह माना गया है। इस पावन अवधि में त्रिवेणी संगमों में स्नान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मेलों का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है, जहां विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने नदियों, सरोवरों और वृक्षों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। आज आवश्यकता है कि हम स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और माइक्रो प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए सजग हों।

पर्यटन और लोक संस्कृति को नई दिशा

राज्यपाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प जैसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि पर्यटन, लोक संस्कृति और कला को भी नई दिशा देते हैं। कलाकारों, श्रद्धालुओं और संतों के संगम से राजिम कुंभ ने देश-विदेश में अपनी विशेष पहचान बनाई है।

मंत्री राजेश अग्रवाल का संबोधन

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प पर्व हमारी सांस्कृतिक उत्सव परंपरा का जीवंत प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराएं आज विश्व स्तर पर पहचान बना रही हैं और इस आयोजन से राज्य का गौरव और बढ़ा है।

प्रमुख रूप से उपस्थित

इस अवसर पर राज्य गृह भंडार निगम अध्यक्ष चंदूलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव, गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।