अम्बिकापुर: फीस बढ़ोतरी और लचर शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ NSUI का हल्ला बोल; आयुक्त, कुलसचिव और प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन, 4 दिनों में मांग पूरी न होने पर क्रमिक भूख हड़ताल की चेतावनी
अम्बिकापुर। सरगुजा संभाग के सबसे बड़े और प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में शामिल संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय और राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पीजी कॉलेज) में एक बार फिर छात्र राजनीति गरमा गई है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के नेतृत्व में आज सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्रों ने अपनी लंबित मांगों, लगातार हो रही फीस बढ़ोतरी, और क्षेत्र की बदहाल व लचर शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान NSUI के वरिष्ठ पदाधिकारियों और छात्र नेताओं की उपस्थिति में माननीय आयुक्त महोदय (सरगुजा संभाग), कुलसचिव महोदय (संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय), और अपर संचालक महोदय (उच्च शिक्षा विभाग, सरगुजा संभाग) को संबोधित एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया। छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि यदि अगले चार दिनों के भीतर उनकी जायज मांगों पर प्रशासन द्वारा कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा और इसके अगले चरण के रूप में अनिश्चितकालीन ‘क्रमिक भूख हड़ताल’ की शुरुआत की जाएगी।
– ज्ञान तिवारी, उपाध्यक्ष (NSUI, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय)
ज्ञापन में उठाए गए मुख्य मुद्दे और समस्याएं
NSUI द्वारा सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन में मुख्य रूप से सरगुजा संभाग की शैक्षणिक अव्यवस्थाओं को रेखांकित किया गया है। छात्र नेताओं ने विस्तृत रूप से उन बिंदुओं पर प्रकाश डाला है जो पिछले काफी समय से छात्र-छात्राओं के मानसिक और आर्थिक शोषण का कारण बन रहे हैं। मुख्य मुद्दों का विवरण इस प्रकार है:
- मनमानी और अनियंत्रित फीस बढ़ोतरी पर तत्काल रोक: ज्ञापन में सबसे प्रमुखता से फीस वृद्धि का मुद्दा उठाया गया है। छात्र नेताओं का आरोप है कि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सरकारी और निजी महाविद्यालयों में हर साल फीस बढ़ा दी जाती है। चूंकि यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति (ST) बाहुल्य है, इसलिए यहाँ के अधिकांश अभिभावक कृषि या छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर हैं। ऐसे में फीस वृद्धि सीधे तौर पर गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करने की एक साजिश प्रतीत होती है।
- पढ़ाई की लचर और बदहाल व्यवस्था में सुधार: राजीव गांधी पीजी कॉलेज सहित संभाग के अन्य प्रमुख महाविद्यालयों में नियमित कक्षाओं का संचालन न होना एक गंभीर समस्या बन चुका है। कई विभागों में प्रोफेसरों और सहायक प्राध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिसकी वजह से पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता।
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: कॉलेजों में आधुनिक प्रयोगशालाओं (Labs), समृद्ध पुस्तकालयों (Libraries) और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की भारी कमी है। छात्राओं के लिए कॉमन रूम और स्वच्छ शौचालयों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है, जिससे उन्हें दैनिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
4 दिनों का अल्टीमेटम: प्रशासन को कड़ी चेतावनी
NSUI के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपने के दौरान मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि वे इस बार केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होने वाले हैं। छात्र नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट रूप से 4 दिनों का समय (अल्टीमेटम) दिया है। संगठन का कहना है कि इन चार दिनों के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन और आयुक्त कार्यालय को बैठकर छात्रों के हित में कोई ठोस और सही निर्णय लेना होगा।
यदि तय समय सीमा के भीतर फीस वृद्धि को वापस लेने और शैक्षणिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में कोई लिखित और विश्वसनीय कदम नहीं उठाया गया, तो छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए बड़े आंदोलन पर उतरेंगे। इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसके तहत छात्र आयुक्त कार्यालय के समक्ष बैठकर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
वरिष्ठ छात्र नेताओं और पदाधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
आज के इस विशाल विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में भारी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ NSUI के वरिष्ठ पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मुख्य रूप से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अम्बिकापुर के NSUI उपाध्यक्ष ज्ञान तिवारी ने छात्रों को संबोधित किया और उनमें जोश भरा।
उनके साथ ही शिफ़्तैन रज़ा (NSUI IYC), राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के NSUI प्रभारी अभिनव काशी, युवा छात्र नेता आकाश, और छात्र प्रतिनिधि श्यामा ने भी अपनी बात रखी। इन सभी नेताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि सरगुजा के हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। आंदोलन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कॉलेज परिसर में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
क्षेत्रीय पृष्ठभूमि और अनुसूचित जनजाति वर्ग पर प्रभाव
सरगुजा संभाग ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) बाहुल्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की कई नीतियां इस क्षेत्र के विकास और उत्थान के लिए समर्पित हैं, जिनमें शिक्षा को सबसे सशक्त माध्यम माना गया है। हालांकि, धरातल पर संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों की प्रशासनिक विफलताएं इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं।
NSUI प्रभारी अभिनव काशी ने कहा, “जब सरकार आदिवासी छात्रों के लिए मुफ्त या रियायती शिक्षा की बात करती है, तो फिर स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय प्रबंधन किस आधार पर प्रतिवर्ष फीस बढ़ा रहा है? शिक्षा का व्यापारीकरण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।” छात्रों का यह भी कहना है कि फीस वृद्धि के कारण कई होनहार छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं, जो कि इस पिछड़े क्षेत्र के विकास के लिए एक आत्मघाती कदम साबित होगा।
आगामी रणनीति: क्रमिक भूख हड़ताल की रूपरेखा
यदि प्रशासन चार दिनों के भीतर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाता है, तो संगठन द्वारा घोषित ‘क्रमिक भूख हड़ताल’ को बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जाएगा। शिफ़्तैन रज़ा ने आगामी रणनीति की जानकारी देते हुए बताया कि भूख हड़ताल के दौरान प्रतिदिन छात्रों का एक समूह 24 घंटे के उपवास पर बैठेगा और प्रशासन के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएगा। इसके साथ ही संभाग के अन्य जिलों और तहसीलों के महाविद्यालयों में भी इस आंदोलन की चिंगारी फैलाई जाएगी ताकि पूरे सरगुजा संभाग के छात्रों को न्याय मिल सके।
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर विषय पर माननीय आयुक्त महोदय और विश्वविद्यालय के कुलसचिव क्या रुख अपनाते हैं। क्या प्रशासन छात्रों की वाजिब मांगों को सुनते हुए फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेगा या फिर सरगुजा एक बार फिर छात्र आंदोलनों और तालाबंदी की राह पर अग्रसर होगा?

Ashish Sinha
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