
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में पुनरीक्षित गाइडलाइन दरें जारी, 2 मार्च से लागू
छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से दुर्ग और सरगुजा जिलों में संशोधित गाइडलाइन दरों को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित नई दरें 2 मार्च 2026 से प्रभावशील होंगी। राज्य के सभी 33 जिलों के लिए पुनरीक्षित गाइडलाइन दरें जारी की जा चुकी हैं। नागरिक नई दरों की जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालय या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। नई व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें 2 मार्च 2026 से लागू, दुर्ग और सरगुजा जिलों में प्रभावशील
रायपुर, 27 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ में संपत्ति पंजीयन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवहारिक बनाने की दिशा में राज्य शासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार द्वारा 20 नवम्बर 2025 से लागू नई गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण के लिए जिला मूल्यांकन समितियों को आवश्यकतानुसार संशोधित प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए थे।
शासन के निर्देशानुसार दुर्ग एवं सरगुजा जिलों की जिला मूल्यांकन समितियों ने संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए। इन प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के लिए महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों जिलों से प्राप्त गाइडलाइन दरों का परीक्षण और समीक्षा की गई।
विस्तृत चर्चा और परीक्षण के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने दुर्ग एवं सरगुजा जिलों की संशोधित गाइडलाइन दरों को अनुमोदित कर दिया है। बोर्ड द्वारा स्वीकृत नई दरें 2 मार्च 2026 से इन दोनों जिलों में प्रभावशील होंगी।
नागरिकों को क्या करना होगा?
आम नागरिक, संपत्ति क्रेता-विक्रेता एवं अन्य हितधारक नई गाइडलाइन दरों की विस्तृत जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालयों तथा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। नई दरों के लागू होने से संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और यथार्थपरक बनने की उम्मीद है।
पूरे राज्य में लागू होंगी नई दरें
उल्लेखनीय है कि राज्य के सभी 33 जिलों के लिए पुनरीक्षित गाइडलाइन दरें जारी की जा चुकी हैं। इससे पंजीयन कार्य में एकरूपता आएगी और बाजार मूल्य के अनुरूप संपत्तियों का मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था से न केवल राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम नागरिकों को भी स्पष्ट और मानकीकृत दरों का लाभ मिलेगा।










