
आज का इतिहास 31 मार्च: आईफिल टावर का उद्घाटन और अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं | Aaj Ka Itihas
आज के दिन की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं। जानें आज के दिन किसका जन्म हुआ, किसकी पुण्यतिथि है और दुनिया में क्या खास हुआ।
आज का इतिहास: 31 मार्च
इतिहास केवल बीता हुआ समय नहीं, बल्कि भविष्य का दर्पण है।
31 मार्च की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं (Major Events)
फ्रांस की राजधानी पेरिस में निर्मित 300 मीटर ऊंचे आईफिल टावर का उद्घाटन आज ही के दिन हुआ था। इंजीनियर गुस्ताव आइफ़िल द्वारा डिजाइन किया गया यह टावर उस समय दुनिया की सबसे ऊंची संरचना थी। इसे फ्रांसीसी क्रांति की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बनाया गया था।
तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु 14वें दलाई लामा तिब्बत से पलायन कर भारत की सीमा में दाखिल हुए थे। उन्होंने चीन के दमन के बाद भारत में शरण मांगी थी, जिसके बाद से वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निवास कर रहे हैं।
भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा आज ही के दिन की गई थी।
वॉरेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता (तब कलकत्ता) में भारत का पहला डाकघर स्थापित किया था, जो भारतीय संचार प्रणाली के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम था।
31 मार्च को जन्मे महत्वपूर्ण व्यक्ति (Birthdays)
| वर्ष | नाम | विवरण |
|---|---|---|
| 1504 | गुरु अंगद देव | सिखों के दूसरे गुरु, जिन्होंने गुरुमुखी लिपि का विकास किया। |
| 1865 | आनंदीबाई जोशी | भारत की पहली महिला डॉक्टर। उन्होंने विदेश जाकर डॉक्टरी की डिग्री ली थी। |
| 1934 | कमला दास | प्रसिद्ध अंग्रेजी और मलयालम लेखिका। |
| 1945 | मीरा कुमार | पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री। |
31 मार्च को हुए निधन (Deaths)
महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी लेखक श्यामजी कृष्ण वर्मा का जिनेवा में निधन हुआ था। उन्होंने लंदन में ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना की थी।
भारतीय सिनेमा की ‘ट्रैजेडी क्वीन’ कही जाने वाली मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी का निधन आज ही के दिन हुआ था। ‘पाकीज़ा’ उनकी यादगार फिल्म मानी जाती है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- 1921: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज को आधिकारिक तौर पर विजयवाड़ा में गांधी जी के सुझाव पर स्वीकार किया गया था।
- 2004: गूगल ने अपनी नई ईमेल सेवा ‘Gmail’ की घोषणा की थी, जिसे शुरुआत में अप्रैल फूल डे का मज़ाक समझा गया था।
- 1867: बम्बई में ‘प्रार्थना समाज’ की स्थापना हुई थी, जिसने सामाजिक सुधारों में बड़ी भूमिका निभाई।












