बिहार की राजनीति में उबाल: तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर तीखा प्रहार, बोले- “6 महीने में 2 मुख्यमंत्री, षड्यंत्र से चल रही पथभ्रष्ट सरकार”।






तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला | बिहार राजनीति अपडेट

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राजनीति: बिहार

“6 महीने में 2 मुख्यमंत्री, 50% समय व्यर्थ”: तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को घेरा, बिहार की शासकीय व्यवस्था को बताया ‘अराजक’

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीतिक उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार के 6 महीने के कार्यकाल को ‘षड्यंत्रकारी’ और ‘अक्षम’ करार देते हुए जोरदार हमला बोला है।

“विगत 6 साल में 5 बार और 12 वर्षों में 10 बार सरकार का गठन-पुनर्गठन हुआ है। नीतीश कुमार ने कारण-अकारण 8 बार मुख्यमंत्री की शपथ ली है। उनकी इस क्षणभंगुर विचारधारा ने शासकीय व्यवस्था को अंधेरे में धकेल दिया है और बिहारवासियों को उपहास का पात्र बनाया है।”

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— तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष

“केवल 3 लोग चला रहे हैं बिहार”

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पिछले एक पखवाड़े से बिहार की सत्ता केवल तीन लोगों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। उन्होंने अधूरे मंत्रिमंडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना किसी चिंतन-मनन और विमर्श के लोकतांत्रिक तरीके को ताक पर रखकर मनमर्जी के निर्णय लिए जा रहे हैं। तेजस्वी के अनुसार, सरकार की प्राथमिकताएं और नीतियां अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई हैं।

46.03%
समय व्यर्थ होने का दावा
08 बार
नीतीश कुमार की शपथ (12 वर्ष में)

प्रशासनिक अराजकता और भ्रष्टाचार का आरोप

राजद नेता ने राज्य की वर्तमान स्थिति को ‘बेलगाम नौकरशाही’ और ‘अनियंत्रित भ्रष्टाचार’ का दुष्चक्र बताया है। उन्होंने कहा कि बिहार आज ध्वस्त विधि व्यवस्था, वित्तीय कुप्रबंधन और बेरोजगारी के दौर से गुजर रहा है। तेजस्वी ने सीधे तौर पर कहा कि एनडीए सरकार आम जनता के बजाय केवल तंत्र में बैठे लोगों का पोषण करने में जुटी है।

युवाओं और किसानों में बढ़ती नाउम्मीदी

तेजस्वी यादव ने आर्थिक संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 21 वर्षों की एनडीए सरकार (विभिन्न चरणों में) की कार्यप्रणाली से बिहार के युवा, महिला, किसान और व्यापारी अब पूरी तरह नाउम्मीद हो चुके हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो सरकार खुद अपने आप में एक समस्या है, वह जनता की समस्याओं का समाधान क्या करेगी?”

राजनीतिक गलियारों में तेजस्वी के इस बयान को आने वाले समय में बड़े जन-आंदोलन की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों का मानना है कि शासन में स्थिरता की कमी के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।