संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन की ऐतिहासिक उपलब्धि: यूनिट नंबर 2 ने लगातार 150 दिनों तक बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया
बिरसिंहपुर, मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन (SGTPS), बिरसिंहपुर ने एक और मील का पत्थर स्थापित किया है। स्टेशन की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 2 ने बीते 14 जनवरी से बिना रुके लगातार 150 दिनों तक बिजली पैदा करने का स्वर्णिम आंकड़ा छू लिया है। यह उपलब्धि राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी दक्षता का एक शानदार उदाहरण पेश करती है।
निरंतरता और विश्वसनीयता का नया कीर्तिमान
संजय गांधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंहपुर पॉवर जनरेटिंग कंपनी के लिए लगातार अपना शानदार ट्रैक रिकॉर्ड बरकरार रखे हुए है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में विद्युत गृह की यूनिट-3 ने भी 100 दिनों तक लगातार निर्बाध बिजली उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया था। अब यूनिट-2 द्वारा 150 दिनों का यह आंकड़ा पार करना, स्टेशन के कुशल प्रबंधन और तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाता है।
सटीक परिचालन से गढ़े गए दक्षता के नए मानदंड
इस रिकॉर्ड परिचालन अवधि के दौरान, यूनिट ने परिचालन के हर मोर्चे पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इकाई के प्रमुख तकनीकी आंकड़ों का विवरण इस प्रकार है:
- प्लांट एवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF): यूनिट ने 92.38 प्रतिशत का पीएएफ बनाए रखा, जो इसकी उच्च उपलब्धता और तकनीकी मजबूती को प्रमाणित करता है।
- प्लांट लोड फैक्टर (PLF): इकाई ने 81.15 प्रतिशत का पीएलएफ दर्ज कर अपनी वास्तविक उत्पादन क्षमता के कुशल उपयोग का लोहा मनवाया है।
- ऊर्जा दक्षता (APC): प्रबंधन ने आंतरिक सहायक विद्युत खपत (Auxiliary Power Consumption – APC) को महज 8.89 प्रतिशत पर सीमित रखकर ऊर्जा की महत्वपूर्ण बचत की है।
ऊर्जा मंत्री ने की टीम के समर्पण की सराहना
मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा, “कंपनी का प्रत्येक कार्मिक और ठेका श्रमिक उत्कृष्ट प्रदर्शन और कड़ी मेहनत में विश्वास रखता है। उनकी इसी दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा की बदौलत हमारी इकाइयाँ लगातार राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।”
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
लगातार 150 दिनों तक बिना किसी तकनीकी अवरोध के बिजली उत्पादन न केवल राज्य के ग्रिड को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि यह कोयले की खपत और बिजली की दर को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होता है। स्थिर बिजली उत्पादन से राज्य के औद्योगिक विकास और कृषि क्षेत्र को विशेष लाभ मिलता है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
तकनीकी सुदृढ़ीकरण की रणनीति
एसजीटीपीएस प्रबंधन ने बताया कि यूनिटों के नियमित रखरखाव (Maintenance) और समय पर ‘ओवरहॉलिंग’ के कारण यह निरंतरता संभव हो पाई है। प्रबंधन ने आने वाले समय में अन्य इकाइयों के लिए भी इसी प्रकार के उच्च मानक सेट करने की कार्ययोजना तैयार की है। कोयले की गुणवत्ता और बॉयलर दक्षता पर विशेष ध्यान देने के कारण यूनिट नंबर 2 ने अपने परिचालन जीवनकाल में नई ऊँचाइयों को छुआ है।
संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन की यह सफलता यह साबित करती है कि यदि प्रबंधन, तकनीक और श्रमशक्ति का सही सामंजस्य हो, तो सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां विश्व स्तरीय प्रदर्शन कर सकती हैं। आने वाले दिनों में यह उपलब्धि राज्य के अन्य विद्युत गृहों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
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