PM Kisan Yojana: जिले के 86,548 किसानों को मिली 23वीं किस्त, सांसद चिंतामणि महाराज ने दिया प्राकृतिक खेती पर जोर






प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना: 23वीं किस्त का ऐतिहासिक वितरण

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कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र का संयुक्त तत्वावधान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त का सफल अंतरण

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले हमारे किसान भाइयों के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि क्षेत्र के सतत विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। कृषि विभाग तथा कृषि विज्ञान केन्द्र (KVK) के संयुक्त तत्वावधान में कृषि विज्ञान केन्द्र के भव्य सभाकक्ष में एक वृहद् और अत्यंत गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह विशेष आयोजन प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के अंतर्गत देश के करोड़ों किसानों सहित स्थानीय जिले के हजारों अन्नदाताओं के खातों में 23वीं किस्त हस्तांतरित होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल वित्तीय सहायता राशि के हस्तांतरण का जश्न मनाना था, बल्कि किसानों को आधुनिक, टिकाऊ और उन्नत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना भी था।

राष्ट्रीय किसान सम्मेलन से सीधा जुड़ाव: माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक क्षेत्र तारकेश्वर (हुगली) में आयोजित भव्य राष्ट्रीय किसान सम्मेलन के मंच से देश के करोड़ों किसानों को संबोधित किया। इसी ऐतिहासिक मंच से उन्होंने ‘सिंगल डिजिटल क्लिक’ के जरिए देशव्यापी स्तर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किश्त की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ऑनलाइन अंतरित (डीबीटी के माध्यम से) की।

डिजिटल क्रांति और वित्तीय समावेशन का अनूठा उदाहरण

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी और सफल योजना है, जिसने बिचौलियों और प्रशासनिक विसंगतियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। तारकेश्वर से जैसे ही प्रधानमंत्री ने डिजिटल बटन दबाया, वैसे ही कुछ ही सेकंड के भीतर निर्धारित राशि सीधे पात्र किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में जमा हो गई। तकनीक के इस कुशल उपयोग ने यह साबित कर दिया है कि सरकार सीधे तौर पर देश के अंतिम छोर पर बैठे किसान की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिले के कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों किसानों के मोबाइल फोन पर जैसे ही राशि जमा होने के संदेश (SMS) प्राप्त हुए, पूरा सभाकक्ष “जय जवान, जय किसान” के नारों से गूंज उठा।

स्थानीय जिले को प्राप्त वित्तीय सहायता के मुख्य आंकड़े

इस योजना के तहत स्थानीय जिले में कृषि और किसानों की समृद्धि के लिए एक बड़ी राशि का निवेश हुआ है। जिले के आंकड़े इस प्रकार हैं:

विवरण आंकड़े / वित्तीय राशि
लाभान्वित किसानों की कुल संख्या 86 हजार 548 (86,548) किसान
जारी की गई किस्त का क्रम 23वीं किस्त
जिले में वितरित कुल राशि 17 करोड़ 37 लाख रुपये (₹17,37,00,000)
वितरण का माध्यम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT)

यह राशि किसानों को खरीफ और रबी फसलों के संधि काल में कृषि इनपुट जैसे बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई की तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने में अत्यधिक मददगार साबित होगी। इस वित्तीय सहायता से छोटे और सीमांत किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी और वे आत्मनिर्भरता के साथ खेती कर सकेंगे।

मुख्य अतिथि सांसद श्री चिंतामणि महाराज का प्रेरणादायी उद्बोधन

इस गरिमामयी जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद श्री चिंतामणि महाराज उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। किसानों के विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए सांसद महोदय ने अपने व्यावहारिक और दूरदर्शी विचारों को साझा किया। उन्होंने कृषि के बदलते स्वरूप पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया और देश व समाज के भविष्य के लिए पारंपरिक कृषि के महत्व को रेखांकित किया।

1. प्राकृतिक, जैविक एवं टिकाऊ खेती पर विशेष बल

सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने वर्तमान समय में हो रहे अंधाधुंध रासायनिक प्रयोगों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अब ‘लोटो-लूटो’ की नीति छोड़कर ‘प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व’ की भावना को अपनाना होगा। उन्होंने किसानों से पुरजोर अपील की कि वे रासायनिक खेती के जाल से बाहर निकलकर प्राकृतिक और जैविक खेती (Organic Farming) को अपनाएं। जैविक खेती न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखती है, बल्कि मनुष्यों को गंभीर बीमारियों से भी बचाती है।

2. हाइब्रिड धान पर निर्भरता कम करने और देशी किस्मों को बढ़ावा देने का आह्वान

धान उत्पादक इस क्षेत्र में हाइब्रिड (संकर) बीजों के बढ़ते चलन पर बोलते हुए सांसद ने कहा कि हाइब्रिड धान की खेती पर हमारी निर्भरता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। ये बीज महंगे होते हैं और इन्हें हर साल बाजार से खरीदना पड़ता है, जिससे किसानों की इनपुट लागत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, हमारे स्थानीय और देशी धान की किस्में (Traditional Rice Varieties) जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीली हैं, इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, और इनका स्वाद व पोषण मूल्य भी बेजोड़ होता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने खेतों के एक हिस्से में देशी किस्मों को अवश्य लगाएं और उनके बीजों को संरक्षित करें।

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3. रासायनिक उर्वरकों के दुष्परिणाम और बढ़ती लागत

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने एक अत्यंत कड़वी सच्चाई से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों (जैसे यूरिया, डीएपी) के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग से शुरुआत में तो उत्पादन बढ़ा, लेकिन धीरे-धीरे हमारी भूमि की प्राकृतिक उर्वरता (Soil Fertility) पूरी तरह नष्ट हो रही है। मिट्टी कठोर और बंजर होती जा रही है। इस बंजरपन को छिपाने के लिए किसान हर साल और अधिक खाद डालते हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और शुद्ध मुनाफा घट रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को खेती-किसानी से जोड़कर रखना चाहते हैं, यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी गर्व से कहें कि वे किसान हैं, तो हमें आज ही भूमि को बचाना होगा। और भूमि को बचाने का एकमात्र मार्ग प्राकृतिक खेती है।”

4. पारंपरिक कृषि पद्धतियां, दलहन फसलें और फसल चक्र

भूमि की सेहत सुधारने के व्यावहारिक उपाय बताते हुए श्री चिंतामणि महाराज ने ‘फसल चक्र’ (Crop Rotation) को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लगातार एक ही तरह की फसल (जैसे केवल धान या गेहूं) लेने से मिट्टी के विशिष्ट पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। इसलिए किसानों को मुख्य फसलों के बीच में दलहन (दालों वाली फसलें जैसे अरहर, मूंग, उड़द, चना) की खेती अवश्य करनी चाहिए। दलहन फसलों की जड़ों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। इससे बिना अतिरिक्त खाद के ही भूमि की गुणवत्ता बेहतर होगी और आगामी फसलों के उत्पादन में भारी वृद्धि देखने को मिलेगी।

गिरते भू-जल स्तर पर गहरी चिंता और जल संरक्षण की पुकार

भाषण के एक अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर सांसद महोदय ने पानी के संकट पर बात की। उन्होंने गिरते भू-जल स्तर (Declining Groundwater Table) पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बोरवेल और ट्यूबवेल के अत्यधिक दोहन के कारण धरती की कोख सूखी हो रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पानी की हर एक बूंद की कीमत समझें और जल संरक्षण तथा जल संचयन (Water Harvesting) के उपायों को युद्धस्तर पर अपनाएं। उन्होंने सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि केवल सरकार के भरोसे जल स्तर को नहीं सुधारा जा सकता, इसके लिए हर गांव में तालाबों का जीर्णोद्धार, मेड़बंदी और ‘खेत का पानी खेत में’ जैसी तकनीकों को जनआंदोलन बनाना होगा।

शासकीय योजनाओं की जानकारी और कीटनाशक दवा अनुदान

किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें ठगी से बचाने के लिए सांसद ने शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से कीटनाशक दवा अनुदान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि किसान भाई बाजार से जो भी कीटनाशक दवाएं खरीदते हैं, उनका पक्का और निर्धारित प्रारूप वाला बिल अवश्य लें। उस बिल को कृषि विभाग के अधिकारियों के पास जमा करने पर नियमानुसार और निर्धारित प्रावधानों के तहत सीधे उनके खाते में अनुदान (Subsidy) की राशि भेज दी जाती है। उन्होंने कहा:

“शासन की बहुत सी योजनाएं सिर्फ इसलिए कागजों में रह जाती हैं या उनका लाभ कुछ ही लोग उठा पाते हैं क्योंकि आम किसानों को उनकी समुचित जानकारी नहीं होती। जागरूकता ही सबसे बड़ी शक्ति है। किसानों को कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से नियमित संपर्क बनाए रखना चाहिए ताकि वे हर नई तकनीक और योजना से अपडेट रह सकें।”

प्रायोगिक पहल: किसानों को दलहन बीजों का वितरण

केवल सैद्धांतिक बातें करने के बजाय कार्यक्रम में धरातल पर भी ठोस कदम उठाए गए। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा संचालित ‘बीज उत्पादन कार्यक्रम’ के अंतर्गत सांकेतिक रूप से मंच पर पांच प्रगतिशील किसानों को उन्नत किस्म के दलहन बीज किट वितरित किए गए। इन बीजों को प्राप्त करने वाले किसानों ने संकल्प लिया कि वे फसल चक्र के सिद्धांत का पालन करते हुए इन बीजों से उत्तम फसल तैयार करेंगे और अन्य साथी किसानों के लिए भी बीज बैंक का निर्माण करेंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिष्ठित अतिथि एवं अधिकारीगण

कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के इस संयुक्त मंच पर कृषि क्षेत्र के कई नामचीन विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक और सहकारी बैंक के प्रतिनिधि एक साथ उपस्थित थे, जो कृषि के समग्र विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम में निम्नलिखित गणमान्य व्यक्तियों की सक्रिय गरिमामयी उपस्थिति रही:

  • डॉ. संदीप शर्मा: वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र (जिन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया)।
  • श्री कुंवर साय पैकरा: सहायक संचालक कृषि (कृषि विभाग की लोक-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की रूपरेखा प्रस्तुत की)।
  • श्रीकांत चंद्राकर: मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला सहकारी बैंक अंबिकापुर (किसानों के केसीसी और ऋण संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की)।
  • श्री कमल नयन पाण्डेय: नोडल अधिकारी, जिला सहकारी बैंक (डीबीटी और वित्तीय लेन-देन की सुगमता पर वक्तव्य दिया)।
  • श्री जे. आलम: वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO), अंबिकापुर।
  • कृषि वैज्ञानिकों की विशेष टीम: श्री पाण्डुराम पैकरा, डॉ. सूर्य प्रकाश गुप्ता, डॉ. श्री ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार, एवं डॉ. लिलाधर साहू। इन सभी वैज्ञानिकों ने तकनीकी सत्र में किसानों की विभिन्न समस्याओं और शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया।

इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के समस्त मैदानी अधिकारी-कर्मचारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) तथा जिले के विभिन्न अंचलों से आए बड़ी संख्या में प्रगतिशील, महिला एवं युवा किसान उपस्थित रहे।

निष्कर्ष एवं भावी मार्ग

यह कार्यक्रम केवल एक वित्तीय किश्त के वितरण का माध्यम नहीं था, बल्कि यह स्थानीय कृषि को एक नई और संधारणीय (Sustainable) दिशा देने का एक वैचारिक मंच बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में जारी 23वीं किस्त ने जहां किसानों को तात्कालिक आर्थिक संबल प्रदान किया, वहीं सांसद श्री चिंतामणि महाराज के उद्बोधन ने किसानों को अपनी जड़ों की ओर लौटने, मिट्टी की सेहत सुधारने और भावी पीढ़ी के लिए पानी बचाने की एक नई प्रेरणा दी। इस संयुक्त प्रयास से निश्चित रूप से आने वाले समय में जिले की कृषि व्यवस्था अधिक समृद्ध, आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल बनेगी।