सुशासन की दिशा में कदम: कलेक्टर श्रीमती रेना जमील द्वारा भैयाथान विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का औचक निरीक्षण






कलेक्टर श्रीमती रेना जमील द्वारा भैयाथान विकासखंड का सघन निरीक्षण – विस्तृत प्रशासनिक रिपोर्ट

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प्रशासनिक प्रतिवेदन: कलेक्टर श्रीमती रेना जमील द्वारा भैयाथान विकासखंड के विभिन्न ग्रामों एवं शासकीय संस्थानों का सघन एवं व्यापक निरीक्षण

स्थान: विकासखंड भैयाथान | मुख्य प्राधिकारी: श्रीमती रेना जमील (कलेक्टर) | मुख्य उद्देश्य: सुशासन एवं अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुँच

1. प्रस्तावना एवं निरीक्षण का व्यापक दृष्टिकोण

लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था में सुशासन की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि नीतियां केवल कागजों पर न रहकर धरातल पर कितनी प्रभावी ढंग से क्रियान्वित हो रही हैं। इसी उद्देश्य को चरितार्थ करते हुए जिले की संवेदनशील एवं सजग कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने भैयाथान विकासखंड के सुदूर एवं ग्रामीण अंचलों का एक अत्यंत सघन, विस्तृत और औचक निरीक्षण किया। इस व्यापक दौरे का मुख्य ध्येय शासकीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति को परखना, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करना, कुपोषण उन्मूलन हेतु संचालित पोषण व्यवस्था की समीक्षा करना तथा क्षेत्र में चल रहे विभिन्न बुनियादी ढांचागत विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन करना था।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केवल प्रशासनिक आंकड़ों पर भरोसा न करते हुए सीधे आम जनता, विशेषकर वंचित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े समुदायों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने उपस्थित समस्त विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले को कड़े और स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया कि शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं का ढांचा इस प्रकार काम करना चाहिए कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े सबसे कमजोर और पात्र हितग्राही को उसका वैधानिक लाभ बिना किसी बाधा के अनिवार्य रूप से प्राप्त हो सके।

“शासन की प्रत्येक योजना का मूल उद्देश्य लोक-कल्याण है। यदि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से नहीं पहुँच रहा है, तो प्रशासनिक तंत्र को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा। कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
– श्रीमती रेना जमील, कलेक्टर

2. ग्राम पंचायत मसिरा: जमीनी स्तर पर बाल विकास एवं अधोसंरचना की समीक्षा

2.1 आंगनबाड़ी केंद्र (पनिका पारा) का सूक्ष्म निरीक्षण

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील का काफिला सर्वप्रथम ग्राम पंचायत मसिरा के अंतर्गत आने वाले पनिका पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा। यहाँ उन्होंने केंद्र के संचालन, बच्चों की उपस्थिति, और दर्ज बच्चों के पोषण स्तर से संबंधित पंजियों का बारीकी से मिलान किया। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों के शुरुआती वर्ष उनके संपूर्ण जीवन की मानसिक और शारीरिक नींव होते हैं, अतः इसमें किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

2.2 पोषण आहार एवं स्वच्छता मानकों का मूल्यांकन

निरीक्षण के दौरान मुख्य ध्यान बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर था। कलेक्टर ने स्वयं रसोईघर और भंडारण कक्ष का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों को परोसे जा रहे गर्म भोजन की गुणवत्ता का परीक्षण किया और ‘टेक होम राशन’ (THR) के वितरण की प्रणाली को समझा। वितरण पंजी का अवलोकन करते हुए उन्होंने माताओं से फीडबैक लेने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने मौके पर उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्देशित किया कि भोजन में विविधता और पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखा जाए। बच्चों को नियमित रूप से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजी हरी सब्जियां, भाजी और मौसमी फल अनिवार्य रूप से दिए जाएं। संतुलित और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर आहार ही बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकाल सकता है। इसके साथ ही उन्होंने पूरे परिसर में स्वच्छता के कड़े मानक बनाए रखने और बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए बालवाड़ी विकास गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया।

2.3 ग्रामीण अधोसंरचना: सीसी रोड का भौतिक सत्यापन

आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के पश्चात कलेक्टर ने ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित की गई सीमेंट कंक्रीट (सीसी) रोड का भौतिक सत्यापन किया। उन्होंने सड़क की निर्माण गुणवत्ता, मोटाई और ढाल का निरीक्षण किया ताकि वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या न हो। उन्होंने तकनीकी इंजीनियरों को निर्देश दिए कि अधोसंरचना विकास के कार्यों में पारदर्शिता और स्थायित्व सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं, और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

3. मनरेगा एवं पर्यावरण संरक्षण: टिकाऊ विकास की कार्ययोजना

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल रोजगार सृजन बल्कि स्थायी संपत्तियों का निर्माण भी एक प्रमुख लक्ष्य है। इसी संदर्भ में कलेक्टर ने विकासखंड में संचालित विभिन्न मनरेगा कार्यों का विस्तृत जायजा लिया।

3.1 कंटूर ट्रेंच और जल संरक्षण कार्य

जल संरक्षण और भूजल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से निर्मित किए जा रहे कंटूर ट्रेंच कार्यों का कलेक्टर ने निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में जल की गति को कम करने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए कंटूर ट्रेंच एक वैज्ञानिक और बेहद प्रभावी माध्यम है। इन कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

3.2 वैज्ञानिक पद्धति से पौधारोपण एवं फलदार वृक्षारोपण

कलेक्टर ने क्षेत्र में किए जा रहे वृहद पौधारोपण और विशेषकर फलदार पौधों के रोपण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कई बार बिना योजना के किए गए वृक्षारोपण के कारण पौधे जीवित नहीं रह पाते। इस समस्या के स्थायी समाधान हेतु उन्होंने कृषि और वन विभाग के विशेषज्ञों के समन्वय से एक नई गाइडलाइन जारी करने को कहा।

  • मिट्टी का परीक्षण: किसी भी क्षेत्र में पौधारोपण से पूर्व वहाँ की मिट्टी की गुणवत्ता, जलधारण क्षमता और पीएच मान का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाए।
  • स्थानीय प्रजातियों का चयन: जलवायु और मिट्टी के अनुकूल ही फलदार एवं छायादार पौधों का चयन किया जाए ताकि उनकी उत्तरजीविता (Survival Rate) अधिकतम हो।
  • टिकाऊ प्लांटेशन: पौधों को केवल लगाने तक ही जिम्मेदारी सीमित न रहे, बल्कि उनके संरक्षण, सिंचाई और ट्री-गार्ड की व्यवस्था के लिए मनरेगा के तहत ‘वृक्ष मित्र’ या प्रभारियों की नियुक्ति की जाए।

4. ग्राम समौली: हाशिए पर खड़े समुदायों का सशक्तिकरण एवं ‘सैचुरेशन मॉडल’

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के इस दौरे का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पड़ाव ग्राम समौली था। यहाँ मुख्य रूप से बसोर समुदाय की घनी आबादी निवास करती है। कलेक्टर ने बिना किसी औपचारिक दूरी के, सीधे इस समुदाय की महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के बीच बैठकर उनकी रोजमर्रा की समस्याओं और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति उनके अनुभवों को जाना।

4.1 लोक-कल्याणकारी दस्तावेजों का शत-प्रतिशत लक्ष्य (Saturation)

समुदाय के आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कलेक्टर ने पाया कि कई परिवारों के पास बुनियादी शासकीय दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण वे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और अन्य योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। इस स्थिति को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए उन्होंने मौके पर ही उपस्थित अधिकारियों को एक ‘मिशन मोड’ में कार्य करने हेतु निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:

  1. जन्म प्रमाण पत्र: गांव के शत-प्रतिशत बच्चों का जन्म पंजीकरण सुनिश्चित कर तत्काल डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
  2. राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड: कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न सुरक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए नए राशन कार्ड और मनरेगा में रोजगार हेतु नए जॉब कार्ड तुरंत बनाए जाएं।
  3. श्रमिक कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड: असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें श्रमिक कल्याण योजनाओं से जोड़ा जाए और प्रत्येक व्यक्ति का आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड बनाया जाए ताकि ₹5 लाख तक का निःशुल्क इलाज सुनिश्चित हो सके।
  4. पहचान दस्तावेज: जिन नागरिकों के आधार कार्ड में त्रुटियां हैं या जिनके कार्ड अभी तक नहीं बने हैं, उनका त्वरित निर्माण किया जाए।

4.2 कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) विशेष शिविर का आयोजन

ग्रामीणों को इन सभी दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए कलेक्टर ने समौली में ही एक विशाल ‘सीएससी (CSC) विशेष शिविर’ आयोजित करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्वयं चलकर जनता के द्वार पर आएगा और एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक प्रमाण पत्रों का निर्माण और त्रुटि सुधार का कार्य पूरा किया जाएगा।

4.3 महिला सशक्तिकरण और आजीविका मिशन

महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को विकास की धुरी मानते हुए कलेक्टर ने समौली की महिलाओं को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (बिहान) के तहत स्व-सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन महिलाओं को केवल समूह में शामिल न किया जाए, बल्कि उन्हें सिलाई-कढ़ाई, दोना-पत्तल निर्माण, जैविक खाद उत्पादन या स्थानीय कला-शिल्प जैसे स्वरोजगार के क्षेत्रों में तकनीकी प्रशिक्षण और बैंक लिंकेज की सुविधाएं भी प्रदान की जाएं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

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5. सामाजिक सुधार: शिक्षा की ओर वापसी एवं भिक्षावृत्ति उन्मूलन

ग्राम समौली के दौरे में कलेक्टर ने केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक सुधारों की ओर भी कदम बढ़ाए।

5.1 ‘बैक टू स्कूल’ अभियान और छात्रावास प्रवेश

शिक्षा के अधिकार और उसकी महत्ता पर जोर देते हुए कलेक्टर ने बस्ती के उन बच्चों की पहचान की जिन्होंने विषम परिस्थितियों या जागरूकता के अभाव में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी (Drop-out Children)। उन्होंने ऐसे सभी बच्चों और उनके अभिभावकों को समझाते हुए शिक्षा के महत्व से अवगत कराया। जब कुछ बच्चों ने आगे पढ़ने और छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त करने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की, तो कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए शिक्षा विभाग और जनजातीय विकास विभाग के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उन बच्चों का नजदीकी शासकीय छात्रावासों में दाखिला सुनिश्चित करने और उनके रहने, खाने तथा किताबों की व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए।

5.2 भिक्षावृत्ति में संलिप्त महिलाओं की काउंसलिंग और पुनर्वास

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के संज्ञान में आया कि कुछ महिलाएं और परिवार आजीविका के साधनों के अभाव में भिक्षावृत्ति या इसी तरह के अन्य असंगठित व असुरक्षित कार्यों में संलिप्त हैं। इस मानवीय और सामाजिक समस्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने स्वयं महिलाओं की काउंसलिंग की। उन्होंने उन्हें समझाया कि मानव जीवन अत्यंत मूल्यवान है और सम्मानजनक आजीविका पाना उनका अधिकार है। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि इन महिलाओं को तत्काल मनरेगा के तहत काम दिया जाए तथा इन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्व-सहायता समूहों से जोड़कर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि ये भिक्षावृत्ति के दलदल से बाहर निकलकर गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

6. स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण: समौली मेडिकल कैंप एवं सिकल सेल उन्मूलन

ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभता की जांच करने के लिए कलेक्टर ने समौली में आयोजित विशेष मेडिकल कैंप (स्वास्थ्य शिविर) का औचक निरीक्षण किया।

6.1 स्वास्थ्य परीक्षण एवं निःशुल्क दवा वितरण

कलेक्टर ने शिविर में डॉक्टरों की उपस्थिति, उपलब्ध जीवन रक्षक दवाओं के स्टॉक और मरीजों के पंजीयन की व्यवस्था देखी। उन्होंने निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले हर ग्रामीण का ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य बुनियादी परीक्षण निःशुल्क होने चाहिए और उन्हें डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार दवाएं मौके पर ही मिलनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं कुछ पात्र हितग्राहियों को नए बने जन्म प्रमाण पत्र और आयुष्मान कार्डों का वितरण कर योजना का शुभारंभ किया।

6.2 सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया पर विशेष ध्यान

छत्तीसगढ़ के इस अंचल में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक रक्त बीमारियों की व्यापकता को देखते हुए कलेक्टर ने इसके नियंत्रण और उपचार पर विशेष बल दिया। उन्होंने कैंप के डॉक्टरों को निर्देशित किया कि:

  • स्क्रीनिंग में तेजी: बच्चों और किशोरों की सिकल सेल स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से की जाए ताकि शुरुआती दौर में ही बीमारी का पता चल सके।
  • लक्षित उपचार प्रणाली: जो बच्चे सिकल सेल या थैलेसीमिया से पीड़ित पाए जाते हैं, उन्हें केवल दवा देकर न छोड़ा जाए, बल्कि उनका एक परमानेंट डेटाबेस तैयार कर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के माध्यम से उनका निरंतर और बेहतर उपचार (जैसे नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन और फॉलिक एसिड सप्लीमेंटेशन) सुनिश्चित किया जाए।

7. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भैयाथान: संस्थागत चिकित्सा व्यवस्था की समीक्षा

ग्रामीण शिविरों के बाद कलेक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं के मुख्य केंद्र—सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भैयाथान का व्यापक निरीक्षण किया। अस्पताल के भीतर कदम रखते ही उन्होंने स्वच्छता, वार्डों की स्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का एक-एक कर मुआयना किया।

7.1 प्रसव कक्ष, महिला वार्ड एवं एनबीएसयू (NBSU) का निरीक्षण

शिशु और मातृ मृत्यु दर (IMR & MMR) में कमी लाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी के तहत कलेक्टर ने अस्पताल के ‘प्रसव कक्ष’ (Labor Room) और ‘महिला वार्ड’ का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने वहाँ संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) के आंकड़ों, प्रसव के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए बने ‘न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट’ (NBSU) की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्सों और बाल रोग विशेषज्ञों से चर्चा कर उपकरणों की क्रियाशीलता की जांच की।

7.2 ओपीडी (OPD) एवं चिकित्सकों की शत-प्रतिशत उपलब्धता

कलेक्टर ने ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) की पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टर चैंबर तक का अवलोकन किया। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर पूछा कि क्या डॉक्टर समय पर उपलब्ध होते हैं और क्या अस्पताल से दवाइयां मुफ्त मिल रही हैं या उन्हें बाहर की दवाइयां लिखी जा रही हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता अस्पताल के भीतर सुनिश्चित होनी चाहिए और यदि कोई डॉक्टर बिना ठोस कारण के बाहर की दवा लिखता पाया गया, तो उस पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसके साथ ही उन्होंने रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।

8. पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC): गंभीर कुपोषण के खिलाफ जंग

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर के भीतर ही संचालित ‘पोषण पुनर्वास केंद्र’ (Nutritional Rehabilitation Centre – NRC) का निरीक्षण कलेक्टर के दौरे का एक अत्यंत संवेदनशील हिस्सा था। एनआरसी वह स्थान है जहाँ गंभीर तीव्र कुपोषित (SAM) बच्चों को चिकित्सीय देखरेख में विशेष पोषण आहार देकर सामान्य स्तर पर लाया जाता है।

8.1 भर्ती बच्चों की माताओं से आत्मीय संवाद

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने एनआरसी के वार्डों में जाकर भर्ती बच्चों के बेड के पास बैठकर उनकी माताओं से बातचीत की। उन्होंने माताओं से पूछा कि उन्हें केंद्र में रहने और खाने की उचित व्यवस्था मिल रही है या नहीं, तथा बच्चों के वजन में सुधार हो रहा है या नहीं। उन्होंने माताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि कुपोषण कोई असाध्य बीमारी नहीं है, बल्कि सही पोषण और थोड़ी सी देखभाल से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

8.2 डॉक्टरों को निर्देश एवं डिस्चार्ज के बाद की अनुवर्ती (Follow-up) कार्ययोजना

कलेक्टर ने उपस्थित बाल रोग विशेषज्ञों और पोषण सप्लीमेंट प्रभारियों को एनआरसी में दी जाने वाली डाइट चार्ट के अनुसार ही भोजन और दुग्ध वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सबसे महत्वपूर्ण बात जो उन्होंने रेखांकित की, वह थी ‘पोस्ट-डिस्चार्ज केयर’ (केंद्र से छुट्टी मिलने के बाद की देखभाल)।

उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि बच्चा एनआरसी में तो ठीक हो जाता है, लेकिन घर लौटने के बाद उचित पोषण न मिलने से वह दोबारा कुपोषण का शिकार हो जाता है। इस समस्या को रोकने के लिए उन्होंने डॉक्टरों और महिला बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चा जब घर लौटे, तब भी उसके घर पर स्थानीय स्तर पर पोषणयुक्त आहार की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। इसके लिए ग्राउंड स्टाफ (ANM और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) हर हफ्ते बच्चे के घर जाकर उसके स्वास्थ्य और वजन की मॉनिटरिंग करेंगे।

9. पासल हाइड्रो पावर प्लांट: ऊर्जा उत्पादन एवं तकनीकी कार्यप्रणाली का अवलोकन

निरीक्षण के अंतिम चरण में, कलेक्टर श्रीमती रेना जमील विकासखंड के पासल स्थित ‘हाइड्रो पावर प्लांट’ (जल विद्युत संयंत्र) पहुचीं। यहाँ उनका ध्यान क्षेत्र के औद्योगिक और तकनीकी विकास की ओर था।

9.1 विद्युत उत्पादन क्षमता एवं संचालन की समीक्षा

कलेक्टर ने प्लांट के कंट्रोल रूम, टरबाइन सेक्शन और जलाशय क्षेत्र का अवलोकन किया। उन्होंने संयंत्र के मुख्य अभियंताओं और प्रबंधकों से विस्तृत चर्चा कर प्लांट की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता, वर्तमान में हो रहे वास्तविक उत्पादन और ग्रिड को की जाने वाली बिजली आपूर्ति की तकनीकी बारीकियों को समझा।

9.2 पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय रोजगार पर चर्चा

संयंत्र के संचालन की समीक्षा करते हुए उन्होंने प्रबंधन को निर्देशित किया कि जल विद्युत उत्पादन के दौरान पर्यावरण सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। जलाशय के आसपास के क्षेत्रों में जलभराव या जल प्रदूषण की कोई स्थिति निर्मित नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस प्रकार के औद्योगिक संयंत्रों में स्थानीय कुशल और अकुशल श्रमिकों को नियमानुसार रोजगार के अवसर प्राथमिकता के आधार पर मिलने चाहिए, ताकि क्षेत्र के विकास में स्थानीय जनता की भी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील का यह भैयाथान विकासखंड का सघन निरीक्षण केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यह सुशासन को स्थापित करने की दिशा में एक ठोस और व्यापक प्रशासनिक प्रयास था। बाल विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, पर्यावरण, सामाजिक सुधार, स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन से लेकर तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर (पावर प्लांट) तक फैले इस निरीक्षण ने प्रशासनिक अमले में एक नई ऊर्जा और जवाबदेही का संचार किया है।

दौरे की समाप्ति पर कलेक्टर ने उपस्थित सभी वरिष्ठ अधिकारियों—जिनमें भैयाथान के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM), जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), तहसीलदार तथा विभिन्न विभागों के खंड स्तरीय अधिकारी शामिल थे—को एक साझा मंच पर सामूहिक समन्वय के साथ काम करने की हिदायत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण योजनाएं अक्सर दम तोड़ देती हैं, अतः सभी विभाग एक टीम के रूप में काम करें ताकि भैयाथान विकासखंड को जिले के एक मॉडल विकासखंड के रूप में स्थापित किया जा सके।