अशोकनगर (चंदेरी) में नकली डीएपी खाद का बड़ा भंडाफोड़: संभागीय दल की अचानक छापामार कार्रवाई, 250 बोरी ‘ऑर्गेनिक सब्टीट्यूड’ जब्त; खालसा ट्रेडर्स के प्रोपराइटर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज
अशोकनगर/चंदेरी: मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में किसानों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और फसलों की बर्बादी का कारण बनने वाले अमानक व नकली इनपुट्स के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। राज्य सरकार और किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे ‘अमानक एवं नकली खाद-बीज रोको अभियान’ के तहत ग्वालियर-चंबंल संभाग के उच्च स्तरीय जांच दल ने अशोकनगर जिले के चंदेरी विकासखंड में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है।
प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, चंदेरी में स्थित प्रसिद्ध कृषि फार्म और विक्रेता संस्थान मैसर्स खालसा ट्रेडर्स पर संभाग स्तरीय विशेष निरीक्षण दल ने अचानक दबिश दी। यहाँ पर भारी मात्रा में ‘ऑर्गेनिक सब्टीट्यूड ऑफ डीएपी’ (Organic Substitute of DAP) के नाम पर नकली डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) खाद बेचे जाने का काला कारोबार चल रहा था। टीम ने मौके से 250 से अधिक अमानक और नकली खाद के बैग जब्त किए हैं। इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए विक्रेता संस्थान के प्रोपराइटर बहादुर सिंह भुल्लर के खिलाफ चंदेरी पुलिस थाने में गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
संयुक्त संचालक आर एस शाक्यवार का बयान: ‘सूचना मिलते ही की गई खुफिया घेराबंदी’
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संयुक्त संचालक (Joint Director) श्री आर एस शाक्यवार ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए विस्तृत विवरण साझा किया है। उन्होंने बताया कि विभाग को पिछले कुछ दिनों से गुप्त सूत्रों और पीड़ित किसानों के माध्यम से सूचना मिल रही थी कि चंदेरी क्षेत्र में कुछ असामाजिक और लालची तत्व असली डीएपी की किल्लत या मांग का फायदा उठाकर ‘ऑर्गेनिक सब्स्टीट्यूट’ के नाम पर हुबहू दिखने वाली नकली रासायनिक खाद खपा रहे हैं।
श्री शाक्यवार ने कहा, “जैसे ही हमें प्रामाणिक इनपुट मिले, हमने बिना स्थानीय स्तर पर जानकारी लीक किए एक संभाग स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मैसर्स खालसा ट्रेडर्स के गोदाम और विक्रय केंद्र पर अचानक छापा मारा। शुरुआती भौतिक परीक्षण में ही यह स्पष्ट हो गया कि जो उत्पाद डीएपी के विकल्प के रूप में भारी कीमतों पर किसानों को बेचा जा रहा था, वह पूरी तरह से अमानक और रासायनिक मानदंडों पर फर्जी था।”
इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई को अंजाम देने वाली ‘सुपर टीम’
चंदेरी के इतिहास में कृषि धोखाधड़ी के खिलाफ हुई इस सबसे बड़ी रेड को सफल बनाने के लिए संभाग स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को मैदान में उतारा गया था। इस संयुक्त टीम का नेतृत्व निम्नलिखित अधिकारियों ने किया:
- श्री दिनेश श्रीवास्तव: सहायक संचालक, कृषि (Assistant Director)
- श्री ए के विसोरिया: वरिष्ठ कृषि अधिकारी (Senior Agricultural Officer)
- श्री रविन्द्र यादव: उर्वरक निरीक्षक (Fertilizer Inspector)
- कृषि विकास अधिकारी: चंदेरी विकासखंड नेतृत्व
अधिकारियों की इस टीम ने न केवल मौके पर जाकर बोरियों की गिनती की, बल्कि वहां रखे स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रसीदें और इनपुट लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि ‘खालसा ट्रेडर्स’ द्वारा बड़ी संख्या में ऐसे बैग बेचे जा रहे थे जिनके लेबलिंग और पैकेजिंग मानकों में भारी विसंगतियां थीं।
क्या है ‘ऑर्गेनिक सब्टीट्यूड ऑफ डीएपी’ का खेल?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल बाजार में रासायनिक डीएपी (जिसमें 18% नाइट्रोजन और 46% फास्फोरस होता है) की अत्यधिक मांग का फायदा उठाकर कुछ कंपनियां और डीलर ‘जैव या जैविक डीएपी विकल्प’ के नाम पर मिट्टी, चारकोल, और साधारण फॉस्फेटिक रॉक को मिलाकर आकर्षक थैलियों में पैक कर देते हैं। इस पर बड़े अक्षरों में ‘DAP’ लिखा होता है और छोटे अक्षरों में ‘Organic Substitute’ लिख दिया जाता है, जिससे कम पढ़े-लिखे किसान भ्रमित हो जाते हैं और इसे असली समझकर महंगे दामों पर खरीद लेते हैं।
कानूनी शिकंजा: भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज
चंदेरी पुलिस प्रशासन ने कृषि विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर मैसर्स खालसा ट्रेडर्स के प्रोपराइटर बहादुर सिंह भुल्लर के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की है। इस बार पुलिस ने नए कानून के प्रावधानों के तहत बेहद सख्त धाराएं लगाई हैं ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।
1. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-318 (2)
पहले के कानून (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा जानबूझकर किसी को धोखा देने, बेईमानी से संपत्ति (इस मामले में किसानों का पैसा) ठगने और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाने के अपराध से संबंधित है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माने के साथ-साथ कठोर कारावास का प्रावधान है।
2. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act)
चूंकि कृषि उर्वरक (Fertilizers) भारत सरकार द्वारा घोषित आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इनके अवैध भंडारण, अमानक वितरण और कालाबाजारी पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाती है। इस अधिनियम के तहत लाइसेंस रद्द होने के साथ-साथ गैर-जमानती वारंट और जेल की सजा का कड़ा नियम है।
कृषि इनपुट्स का विवरण और जब्ती की सूची
| क्र.सं. | विवरण/सामग्री | जब्त मात्रा (बैग) | आरोपी संस्थान | दर्ज मामला (थाना) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | नकली डीएपी (ऑर्गेनिक सब्टीट्यूड) | 250 बैग (बोरी) | मैसर्स खालसा ट्रेडर्स | पुलिस थाना चंदेरी |
| 2 | मुख्य आरोपी | बहादुर सिंह भुल्लर (प्रोपराइटर) | निवासी चंदेरी | धारा 318(2) BNS, ECA 1955 |
किसानों और फसलों पर नकली डीएपी का घातक प्रभाव
वरिष्ठ कृषि अधिकारियों का कहना है कि डीएपी (फॉस्फोरस प्रधान उर्वरक) का उपयोग मुख्य रूप से फसलों की बुवाई के समय जड़ों के विकास और पौधों की शुरुआती मजबूती के लिए किया जाता है। यदि किसान अनजाने में इस अमानक या नकली ‘ऑर्गेनिक सब्टीट्यूड’ का उपयोग कर लेते हैं, तो उसके निम्नलिखित गंभीर परिणाम होते हैं:
- फसल का खराब अंकुरण: फॉस्फोरस की कमी के कारण बीज सही ढंग से अंकुरित नहीं हो पाते, जिससे पूरी मेहनत बेकार हो जाती है।
- आर्थिक दोहरी मार: किसान एक तो महंगी खाद की कीमत चुकाता है, और बाद में फसल न होने पर उसे दोबारा बुवाई करनी पड़ती है, जिससे उसकी लागत दोगुनी हो जाती है।
- भूमि की उर्वरा शक्ति को नुकसान: कई बार इन नकली खादों में अवांछित भारी धातुएं या हानिकारक रसायन होते हैं जो मिट्टी के पीएच (pH) मान को बिगाड़ देते हैं।
प्रशासन की चेतावनी: ‘संभाग भर में जारी रहेगा सघन चेकिंग अभियान’
संयुक्त संचालक श्री आर एस शाक्यवार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि ग्वालियर संभाग के किसी भी जिले (ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया) में यदि कोई भी डीलर या सब-डीलर अमानक सामग्री बेचता पाया गया, तो उसकी दुकान और गोदाम को तत्काल सील कर दिया जाएगा। विभाग ने सभी उर्वरक निरीक्षकों (Fertilizer Inspectors) को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर हर सप्ताह कम से कम 5 से 10 रैंडम सैंपल लें और उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजें।
किसानों के लिए जरूरी सलाह: असली और नकली खाद की पहचान कैसे करें?
कृषि विकास विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय हमेशा इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- पक्का बिल जरूर लें: किसी भी दुकान से खाद या बीज खरीदते समय अपने नाम और भूमि विवरण के साथ कंप्यूटराइज्ड या पक्का कैश मेमो अवश्य मांगें।
- दानेदार बनावट की जांच: असली डीएपी के दाने सख्त, भूरे या काले रंग के होते हैं और इन्हें नाखून से आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता।
- तवे पर गर्म करने का टेस्ट: यदि डीएपी के कुछ दानों को तवे पर धीमी आंच पर गर्म किया जाए, तो असली डीएपी के दाने फूल जाते हैं, जबकि नकली या मिट्टी से बने दाने वैसे ही रहते हैं।
- सस्ते के चक्कर में न पड़ें: यदि कोई विक्रेता आपको निर्धारित सरकारी दर या एमआरपी (MRP) से काफी कम दाम पर ‘विशेष डीएपी’ या ‘विदेशी डीएपी’ बताकर उत्पाद दे रहा है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को दें।
निष्कर्ष: अन्नदाता की सुरक्षा सर्वोपरि
अशोकनगर के चंदेरी में हुई यह छापामार कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यदि विभाग और प्रशासन चुस्त रहे, तो बिचौलियों और धोखेबाजों के हौसले पस्त किए जा सकते हैं। आगामी खरीफ और रबी सीजन को देखते हुए यह बेहद आवश्यक है कि इस प्रकार के अभियानों में ढील न दी जाए। बहादुर सिंह भुल्लर जैसे मुनाफाखोरों पर हुई यह कानूनी कार्रवाई अन्य बेईमान व्यापारियों के लिए एक कड़ा सबक साबित होगी। किसानों की खुशहाली ही देश की तरक्की का आधार है, और उनकी गाढ़ी कमाई को इस तरह लूटने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।












