गुना हादसा: डायल-112 के जवानों ने जंगल में खाई से बचाई 5 की जान






गुना: डायल-112 के जांबाजों ने बचाई 5 जिंदगी, आरोन के जंगलों में हुआ था भीषण कार हादसा

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डायल-112 हीरोज: गुना के आरोन में खाई में गिरी अनियंत्रित कार, पुलिस के जांबाजों ने जंगल से सुरक्षित निकाला, बचाई 5 गंभीर घायलों की जान

स्थान: गुना/भोपाल (मध्य प्रदेश) |
दिनांक: 22 जून, 2026 |
ब्यूरो रिपोर्ट: राज्य कानून-व्यवस्था समाचार

गुना/भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस की आपातकालीन त्वरित प्रतिक्रिया सेवा ‘डायल-112’ ने एक बार फिर संकट के समय संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए पांच अनमोल जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है। गुना जिले के थाना आरोन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घने जंगल क्षेत्र में हुए एक भीषण सड़क हादसे में डायल-112 के जवानों ने न केवल अदम्य साहस का परिचय दिया, बल्कि ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला जीवन रक्षक घंटा) का सही उपयोग करते हुए पांच गंभीर रूप से घायल नागरिकों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया।

यह घटना 21 जून की है, जब भोपाल स्थित राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 को एक अज्ञात कॉलर द्वारा अत्यंत घबराई हुई आवाज में सूचना दी गई। सूचना में बताया गया कि आरोन-राघौगढ़ मार्ग पर, ग्राम शहरोक से कुछ दूरी पर स्थित सुनसान और जंगली इलाके में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई और पेड़ से टकराकर बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। कार के अंदर कई लोग फंसे हुए हैं और वे गंभीर रूप से घायल हैं।

घटना का मुख्य बिंदु: सुनसान जंगल, ढलान वाली खाई, और चारों तरफ से पिचक चुकी कार। ऐसी स्थिति में मोबाइल नेटवर्क की समस्या और स्थानीय मदद का न होना घायलों के लिए काल बन सकता था। लेकिन राज्य कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही महज कुछ ही मिनटों में डायल-112 की एफआरवी (फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल) मौके पर पहुंच गई।

जंगल का अंधेरा और चीख-पुकार: मौके पर पहुंचे जांबाज शिवेंद्र और हेमराज

जैसे ही भोपाल कंट्रोल रूम से गुना के आरोन थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को ईवेंट (सूचना) फॉरवर्ड किया गया, गाड़ी में तैनात स्टाफ सैनिक श्री शिवेंद्र रघुवंशी और पायलट श्री हेमराज भील ने बिना एक पल गंवाए वाहन को दुर्घटनास्थल की ओर दौड़ा दिया। चूंकि इलाका जंगली और सुनसान था, इसलिए सटीक लोकेशन ढूंढना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन पायलट हेमराज भील की मुस्तैदी और क्षेत्र की भौगोलिक समझ के कारण टीम बेहद कम समय में मौके पर पहुंच गई।

मौके पर जो दृश्य था, वह अत्यंत भयावह था। कार सड़क से करीब कई फीट नीचे जा चुकी थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के दरवाजे और चेसिस आपस में पिचक गए थे। गाड़ी के भीतर से घायलों की चीख-पुकार और कराहने की आवाजें आ रही थीं। पांचों यात्री लहूलुहान हालत में थे और गंभीर चोटों के कारण हिलने-डुलने की स्थिति में भी नहीं थे।

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लोहे की चादरें काटकर घायलों को निकाला बाहर, दी प्राथमिक चिकित्सा

आसपास कोई मानवीय आबादी न होने के कारण सैनिक शिवेंद्र रघुवंशी और पायलट हेमराज भील ने बिना किसी अतिरिक्त बैकअप का इंतजार किए खुद ही मोर्चा संभाला। दोनों जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए और कार में संभावित शॉर्ट सर्किट या आग लगने के खतरे को भांपते हुए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

जवानों ने सूझबूझ से काम लेते हुए दुर्घटनाग्रस्त वाहन के फंसे हुए हिस्सों को अपने स्तर पर कटर और उपलब्ध औजारों की मदद से फैलाया और एक-एक कर सभी पांचों घायलों को बेहद सावधानी से बाहर निकाला। घायलों को रीढ़ की हड्डी या सिर में गंभीर चोट होने की आशंका को देखते हुए उन्हें विशेष पोजीशन में बाहर निकाला गया ताकि चोट और न बढ़े। बाहर निकालने के तुरंत बाद जवानों ने अपने वाहन में मौजूद फर्स्ट-एड किट से घायलों का प्राथमिक उपचार किया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव को रोका जा सका।

डायल-112 वाहन ही बना एम्बुलेंस, समय पर पहुंचे सिविल अस्पताल

गंभीर स्थिति को देखते हुए एम्बुलेंस का इंतजार करना आत्मघाती हो सकता था। इसी संवेदनशीलता को समझते हुए सैनिक शिवेंद्र और पायलट हेमराज ने सभी पांचों घायलों को अपने ही डायल-112 वाहन में सुरक्षित रूप से लिटाया और तुरंत आरोन के सिविल अस्पताल के लिए रवाना हो गए।

अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, अगर घायलों को अस्पताल लाने में 15 से 20 मिनट की भी देरी हो जाती, तो अत्यधिक खून बह जाने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती थी। पुलिसकर्मियों की इस तत्परता के कारण डॉक्टरों को इलाज शुरू करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया और सभी पांचों मरीजों की स्थिति अब स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।

‘डायल-112 हीरोज’: मध्य प्रदेश पुलिस की सजगता का प्रमाण

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित ‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला के तहत इस साहसिक कार्य को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों ने सैनिक शिवेंद्र रघुवंशी और पायलट हेमराज भील की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। यह घटना दर्शाती है कि मध्य प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवाएं केवल एक कॉल सेंटर आधारित व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि यह जमीन पर काम करने वाले उन संवेदनशील जवानों की कहानी है जो दूसरों की जान बचाने के लिए हर पल मुस्तैद रहते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है डायल-112 की यह त्वरित कार्रवाई?

  • गोल्डन ऑवर का प्रबंधन: सड़क दुर्घटनाओं में शुरुआती 60 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस मामले में पुलिस ने रिस्पांस टाइम को न्यूनतम रखते हुए जीवन रक्षा सुनिश्चित की।
  • कठिन परिस्थितियों में समन्वय: भोपाल राज्य नियंत्रण कक्ष से लेकर गुना के दूरस्थ अंचल में तैनात एफआरवी के बीच का तकनीकी और मानवीय तालमेल इस रेस्क्यू की सफलता की कुंजी रहा।
  • मानवीय दृष्टिकोण: केवल कानूनी औपचारिकता न निभाते हुए, जवानों ने खुद घायलों को अस्पताल पहुंचाया और डॉक्टरों से संपर्क कर तुरंत इलाज शुरू करवाया।

सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि मध्य प्रदेश शासन और पुलिस विभाग द्वारा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत, बचाव और सहायता प्रदान करने के लिए जो बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है, वह पूरी तरह सफल है। डायल-112 सेवा आज राज्य के नागरिकों के लिए सुरक्षा, विश्वास और त्वरित न्याय का पर्याय बन चुकी है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि जब भी वे सड़क पर किसी को संकट में देखें, तुरंत डायल-112 पर सूचना दें, क्योंकि आपका एक सही समय पर किया गया कॉल किसी के परिवार का चिराग बुझने से बचा सकता है।