मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026: प्रदेश में आएगा ₹9,000 करोड़ से अधिक का भारी निवेश, मछली पालन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया रोडमैप तैयार
1. एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026: ₹9,000 करोड़ के निवेश से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित ‘मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग’ की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश की नई मत्स्य नीतियों की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार की नीतियों और निवेशकों के अनुकूल बनाए गए माहौल के कारण मध्यप्रदेश में मत्स्य क्षेत्र में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हो रहा है।
इस निवेश के माध्यम से न केवल बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास होगा, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार इस नीति के माध्यम से पारंपरिक मछुआरा समुदायों के साथ-साथ नए एग्रो-एंटरप्रेन्योर्स (कृषि-उद्यमियों) को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने जा रही है।
मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: “प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी कार्ययोजना ऐसी होनी चाहिए कि अगले ढाई साल में हमें मछली बीज किसी अन्य राज्य या स्थान से न खरीदना पड़े। जब बीज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा, तभी उत्पादन लागत कम होगी और हमारे मछुआरे समृद्ध होंगे।”
2. केज कल्चर का ऐतिहासिक विस्तार: 2.91 लाख से अधिक केज के प्रस्तावों को स्वीकृति
आधुनिक मत्स्य पालन में ‘केज कल्चर’ (पंजरा पालन) एक क्रांतिकारी तकनीक साबित हो रही है। कम पानी और नियंत्रित वातावरण में अधिक उत्पादन देने वाली इस तकनीक को अपनाने में मध्यप्रदेश ने देश में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया कि प्रदेश में अब तक 2 लाख 91 हजार 9 सौ 38 (2,91,938) केज स्थापना के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन सभी प्रस्तावों के लिए विभाग द्वारा विधिवत कार्यादेश (Work Orders) जारी किए जा चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर केज कल्चर का क्रियान्वयन राज्य के जलाशयों की उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
3. नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचा सहायता योजनाएं
मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्य नीति 2026 के अंतर्गत आधुनिक तकनीकों, कोल्ड चेन और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए सरकार द्वारा व्यापक सब्सिडी और वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है, जिसका विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| परियोजना/इकाई का नाम | अनुमानित लागत सीमा (₹) | सामान्य वर्ग हेतु अनुदान (पुरुष) | महिला/SC/ST वर्ग हेतु विशेष अनुदान |
|---|---|---|---|
| आधुनिक हेचरी निर्माण इकाई | ₹25 लाख तक | 40% वित्तीय सहायता | 60% भारी सब्सिडी |
| फिश फीड मिल (2 टन क्षमता) | ₹30 लाख तक | 40% वित्तीय सहायता | 60% भारी सब्सिडी |
| आईस प्लांट एवं कोल्ड स्टोरेज (10 टन) | ₹40 लाख तक | 40% वित्तीय सहायता | 60% भारी सब्सिडी |
| स्मार्ट फिश पार्लर निर्माण | ₹5 लाख प्रति इकाई | 40% वित्तीय सहायता | 60% भारी सब्सिडी |
| केज कल्चर निर्माण (प्रति केज) | ₹3 लाख तक | 40% वित्तीय सहायता | 60% भारी सब्सिडी |
| फिश सीड रेयरिंग यूनिट | ₹7 लाख तक | 40% वित्तीय सहायता | 60% भारी सब्सिडी |
4. मछुआ क्रेडिट कार्ड और राष्ट्रीय रैंकिंग में मध्यप्रदेश का दबदबा
मछुआरा समुदाय और मत्स्य पालकों को आसान और बिना किसी बाधा के ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। बैठक के दौरान साझा की गई आधिकारिक रैंकिंग के अनुसार:
देश में दूसरा स्थान (Second in India)
मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जारी करने के मामले में अन्तर्देशीय जल क्षेत्र (Inland Water Sector) के तहत मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर काबिज है। यह इस बात का प्रमाण है कि अंतिम छोर के मछुआरों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई है।
सिवनी जिला देश में अव्वल
राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fisheries) के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए मध्यप्रदेश के सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह जिला अब पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन चुका है।
5. भावी रणनीति: मोती उत्पादन, कोल्ड चेन और जलीय ईको-सिस्टम का संरक्षण
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केवल पारंपरिक मत्स्य पालन तक सीमित न रहकर सेक्टर के विविधीकरण (Diversification) पर विशेष जोर दिया। इसके तहत आगामी समय में निम्नलिखित प्रमुख रणनीतियों पर काम किया जाएगा:
A. अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस से सीखेंगे: मोती उत्पादन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में मोती उत्पादन (Pearl Culture) को व्यावसायिक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए देश के जिन राज्यों में मोती उत्पादन की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियां (Best Practices) अपनाई जा रही हैं, वहां के मॉडलों का गहन अध्ययन किया जाए और उन्हें मध्यप्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल ढालते हुए जल्द से जल्द जमीन पर क्रियान्वित किया जाए।
B. इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्रांडिंग और वैश्विक निर्यात नेटवर्किंग
मछली के उत्पादन के बाद उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और उसे सही बाजार मूल्य दिलाने के लिए मुख्यमंत्री ने कोल्ड चेन (Cold Chain) और मजबूत परिवहन ढांचे को मजबूत करने को कहा है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की मछलियों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की जाएगी तथा सीधे निर्यात (Export) के लिए एक सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स और नेटवर्किंग नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
C. जलीय ईको-सिस्टम का संरक्षण और इको-टूरिज्म
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संतुलन और नदियों के पुनर्जीवन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि जलीय जीवों के संरक्षण के लिए वन, जल संसाधन, पर्यावरण और मत्स्य विकास विभाग को मिलकर एक साझा समन्वय समिति के रूप में कार्य करना होगा। जल संपदा और जलाशयों पर आधारित पर्यटन गतिविधियों (Water Tourism / Eco-Tourism) को बढ़ावा देने के लिए भी एक व्यापक कार्ययोजना बनाई जाएगी ताकि राजस्व के नए स्रोत खुल सकें।
6. उच्च स्तरीय बैठक में शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
मंत्रालय (भोपाल) में संपन्न हुई इस बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी समीक्षा बैठक में शासन और प्रशासन के शीर्ष चेहरे शामिल थे, जो इस नीति के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है:
- डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश (अध्यक्षता)
- नारायण सिंह पवार, राज्य मंत्री, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग
- अनुराग जैन, मुख्य सचिव (Chief Secretary), मध्यप्रदेश शासन
- स्वतंत्र कुमार सिंह, सचिव, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग
- इसके अलावा विभाग के समस्त वरिष्ठ तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी भी इस बैठक में प्रेजेंटेशन के साथ उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश की ‘एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026’ केवल मछली उत्पादन बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह नीली क्रांति (Blue Revolution) के माध्यम से राज्य के ग्रामीण अंचल की तकदीर बदलने का एक सुविचारित खाका है। हर जिले में हेचरी की स्थापना, ₹9000 करोड़ का भारी-भरकम निवेश और 2.91 लाख केज के कार्यादेश यह सुनिश्चित करेंगे कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा और आत्मनिर्भर मत्स्य उत्पादक हब बनकर उभरेगा।












