दिल्ली में बड़ा विवाद: पूर्व विधायक के बेटे पर महिला ने लगाया तांक-झांक और मारपीट का संगीन आरोप, अदालत के कड़े रुख के बाद बुधवार को प्राथमिकी दर्ज
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में रसूख और सत्ता के अहंकार से जुड़ा एक और बेहद गंभीर मामला सामने आया है। दिल्ली के एक पूर्व विधायक के बेटे पर एक महिला ने लगातार तांक-झांक (स्टाकिंग और वोयेरिज्म) करने, अश्लील हरकतें करने और विरोध करने पर बुरी तरह मारपीट करने का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस प्रशासन की शुरुआती सुस्ती के बाद पीड़िता को न्याय के लिए स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत के कड़े दिशा-निर्देशों और हस्तक्षेप के बाद आखिरकार बुधवार को पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। सूत्रों के हवाले से यह बेहद संवेदनशील जानकारी प्राप्त हुई है।
यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि आरोपी के पिता दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा चेहरा रहे हैं। घटना के बाद से ही राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक स्तर तक इस बात की तीखी चर्चा है कि किस तरह राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके कानून को दबाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, न्यायपालिका के सक्रिय रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, वह कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
स्थानीय अदालत का हस्तक्षेप और पुलिस की मजबूरी
मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो पीड़िता का आरोप है कि उसने घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। परंतु, आरोपी के पिता का पूर्व विधायक होना और क्षेत्र में उनका राजनीतिक दबदबा होने के कारण कथित तौर पर पुलिस मामले को टालती रही। पीड़िता को कई दिनों तक सिर्फ आश्वासन मिलते रहे, लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई कानूनी कदम नहीं उठाया गया। इस प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर पीड़िता ने अपने कानूनी सलाहकारों के माध्यम से क्षेत्रीय अदालत में याचिका दायर की थी।
अदालत ने पीड़िता की दलीलों, प्राथमिक सबूतों और पुलिस की विफलता को बेहद गंभीरता से लिया। माननीय न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे अपराधों में पुलिस की ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए तुरंत प्रभाव से मामला दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष प्रगति रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसी न्यायिक आदेश के अनुपालन में बुधवार को दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर अपनी कागजी कार्रवाई शुरू की है।
क्या हैं महिला के संगीन आरोप?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि आरोपी युवक पिछले काफी समय से उसका पीछा कर रहा था। आरोपी अक्सर ऐसी जगहों पर मौजूद रहता था जहां से वह पीड़िता की निजी गतिविधियों पर तांक-झांक कर सके। महिला ने जब भी इसका विरोध करने का प्रयास किया, आरोपी ने अपने पिता के रसूख की धौंस दिखाते हुए उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
मामला तब और गंभीर हो गया जब एक दिन आरोपी ने कथित तौर पर महिला का रास्ता रोका और उसके साथ बदसलूकी की। जब महिला ने शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और उसे शारीरिक रूप से चोट पहुंचाई। पीड़िता का कहना है कि इस घटना के बाद से वह और उसका पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और डर के साए में जीने को मजबूर हैं। उन्हें लगातार धमकी भरे फोन आ रहे थे कि अगर मामला पुलिस तक गया तो इसका अंजाम बेहद बुरा होगा।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बदल चुके हैं महिलाओं से जुड़े कानून
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, देश में नए कानून (भारतीय न्याय संहिता) लागू होने के बाद महिलाओं के प्रति होने वाले इस तरह के अपराधों में सजा के प्रावधान और अधिक कड़े कर दिए गए हैं। तांक-झांक यानी वोयेरिज्म और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से पीछा करने के मामलों को अब बेहद गंभीरता से लिया जाता है।
यदि इस मामले में अदालत के आदेश पर पुलिस ने गंभीर चोट पहुंचाने, रास्ता रोकने, तांक-झांक करने और महिला की अस्मत को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है, तो आरोपी को आसानी से जमानत मिलना मुश्किल होगा। पुलिस को अब निष्पक्ष रूप से घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, चश्मदीदों के बयान और पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज होने वाले बयानों के आधार पर अपनी चार्जशीट तैयार करनी होगी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल, उठ रहे हैं कई सवाल
दिल्ली के एक पूर्व विधायक के परिवार का नाम इस तरह के शर्मनाक कृत्य में आने के बाद राजधानी की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों और महिला अधिकार संगठनों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के बेटों और रिश्तेदारों को उनके अपराधों की कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक समाज में वीआईपी संस्कृति का यह काला चेहरा हावी रहेगा।
इस पूरे मामले पर पूर्व विधायक के परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कानूनी शिकंजा कसता देख आरोपी और उसका परिवार अब अग्रिम जमानत के लिए उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में जुटा है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है और मामले की जांच बिना किसी राजनीतिक दबाव के, पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
यह मामला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब कार्यपालिका या स्थानीय पुलिस अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहने लगती है, तब देश की सजग न्यायपालिका आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ी होती है। पीड़ित महिला द्वारा उठाए गए इस साहसी कदम की सराहना की जा रही है, जिसने धमकियों के आगे झुकने के बजाय कानून की सर्वोच्चता पर विश्वास जताया और अदालत के माध्यम से अपना अधिकार प्राप्त किया।
अब देखना यह होगा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से जांच पूरी करती है और आरोपी की गिरफ्तारी कब तक सुनिश्चित की जाती है। ‘प्रदेश खबर’ इस पूरे घटनाक्रम और पुलिसिया कार्रवाई के हर एक पहलू पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।













