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एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित बने वायुसेना के नए उप-प्रमुख, संभाली कमान






एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित बने वायुसेना के नए उप-प्रमुख: ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के नायक ने संभाली कमान | Pradesh Khabar


‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के सूत्रधार एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संभाली वायुसेना के उप-प्रमुख की कमान, नागेश कपूर की ली जगह

द्वारा: प्रदेश ख़बर ब्यूरो |
अपडेटेड: जुलाई 2026 |
श्रेणी: राष्ट्रीय / रक्षा समाचार

भारतीय वायुसेना (IAF) के शीर्ष नेतृत्व में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के दौरान चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) के रूप में देश की सुरक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर वायुसेना के नए उप-प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) का पदभार संभाल लिया है। रक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने नागेश कपूर का स्थान लिया है, जो वायुसेना में शानदार चार दशकों की राष्ट्र सेवा पूरी करने के बाद 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए।

नवनियुक्त वायुसेना उप-प्रमुख आशुतोष दीक्षित को पदभार ग्रहण करने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालय ‘वायु भवन’ में भव्य ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालने से ठीक पहले, उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) का दौरा किया और देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सशस्त्र बलों के वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सैन्य गलियारों में इस नियुक्ति को भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं और तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के बीच जारी एकीकरण (Jointness) के प्रयासों को गति देने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के रूप में अनुकरणीय कार्यकाल

वायुसेना के दूसरे सबसे बड़े पद पर नियुक्त होने से पहले, आशुतोष दीक्षित नई दिल्ली स्थित मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ IDS) में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने 1 मई 2025 को CISC का पद संभाला था और 30 जून 2026 को इस जिम्मेदारी से मुक्त हुए।

मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ IDS) द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, आशुतोष दीक्षित का वहां का कार्यकाल भारतीय सैन्य इतिहास में बेहद युगांतरकारी और लैंडमार्क सुधारों वाला रहा। उनके रणनीतिक दृष्टिकोण ने एकीकृत रक्षा के पूरे परिदृश्य को नए आयाम दिए। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य में एक मील का पत्थर माने जाने वाले सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ में केंद्रीय और बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

‘ऑपरेशन सिन्दूर’ और आशुतोष दीक्षित की भूमिका

भारतीय रक्षा इतिहास में ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ का नाम रणनीतिक कौशल और तीनों सेनाओं के बीच अब तक के सबसे बेहतरीन समन्वय के लिए दर्ज है। मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा इस बड़े पैमाने के आतंकवाद-विरोधी अभियान को अंजाम दिया गया था। लगभग 88 घंटों तक लगातार चले इस बेहद जटिल और संवेदनशील सैन्य एक्शन में थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने एक साथ मिलकर काम किया था।

उस दौरान आशुतोष दीक्षित ने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर रहते हुए तीनों सेनाओं के बीच सूचनाओं, साजो-सामान और रणनीतिक हमलों का ऐसा बेजोड़ तालमेल बिठाया, जिसने आधुनिक भारत में ‘इंटीग्रेटेड वारफेयर’ (एकीकृत युद्ध प्रणाली) की पहली सफल और प्रत्यक्ष मिसाल पेश की। सैन्य विशेषज्ञों और अधिकारियों ने अक्सर इस बात पर जोर दिया है कि आशुतोष दीक्षित की सूझबूझ और कड़े फैसलों के कारण ही इस अभियान को इतनी सटीकता के साथ पूरा किया जा सका।

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मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ IDS) में रहते हुए किए गए बड़े कार्य:

  • 20 संयुक्त सिद्धांतों (Joint Doctrines) की प्रस्तुति: उन्होंने तीनों सेनाओं की विचार प्रक्रिया को एक मंच पर लाने और संस्थागत रूप देने के लिए 20 संयुक्त सैन्य सिद्धांतों और प्राइमर को जारी करने का नेतृत्व किया।
  • रण संवाद (Ran Samwad): सैन्य मामलों और रणनीतिक चर्चाओं के लिए एक अभूतपूर्व और उच्च स्तरीय मंच ‘रण संवाद 2025’ और ‘रण संवाद 2026’ की परिकल्पना की और उसे अमलीजामा पहनाया।
  • कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस: वर्ष 2025 और 2026 में आयोजित कंबाइंड एंड जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेन्स का सफल संचालन और आयोजन उन्हीं के मार्गदर्शन में हुआ।
  • डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 (Defence Forces Vision 2047): भारतीय सेना को पूरी तरह से आधुनिक, तकनीक-संचालित और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बनाए गए भविष्य के रोडमैप ‘डिफेंस फोर्सेज विजन 2047’ के निर्माण में मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई।

चार दशकों का शानदार और वीरता से भरा सैन्य सफर

आशुतोष दीक्षित का भारतीय वायुसेना में सफर लगभग 40 वर्षों का है। वे 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम (लड़ाकू विमान शाखा) में कमीशन हुए थे। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) खड़कवासला, डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली के पूर्व छात्र रहे हैं।

एक अत्यंत कुशल और जांबाज पायलट के रूप में उनके पास 3,300 से अधिक घंटों की उड़ान का लंबा अनुभव है। उन्होंने भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल कई तरह के लड़ाकू और परिवहन विमानों को उड़ाया है। उनके विशाल अनुभव में मिराज-2000 (Mirage-2000), मिग के विभिन्न वेरिएंट्स (MiG variants), जगुआर (Jaguar), स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (Tejas), किरण, हॉक, आईएल-78 (IL-78), एन-32 (An-32) और एव्रो जैसे विमान शामिल हैं। इसके अलावा वे एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (उड़ान प्रशिक्षक) होने के साथ-साथ एक ‘एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट’ भी हैं, जो नए विमानों और तकनीकों के परीक्षण का काम करते हैं।

अपने लंबे और गौरवशाली करियर के दौरान उन्होंने भारतीय सेना के कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में अग्रिम मोर्चे पर भाग लिया है, जिनमें ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ (कारगिल युद्ध के दौरान वायुसेना का ऑपरेशन), ‘ऑपरेशन रक्षक’ और ‘कोप-इंडिया’ जैसे प्रमुख अभ्यास शामिल हैं।

प्रमुख पदों और कमान संभालने का अनुभव

आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना में कई महत्वपूर्ण फील्ड और स्टाफ नियुक्तियों पर काम किया है। कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 विमानों से री-इक्विप (पुनः सुसज्जित) करने के काम का नेतृत्व किया था। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी सेक्टर में एक महत्वपूर्ण फ्रंटलाइन फाइटर एयर बेस और दक्षिणी सेक्टर में वायुसेना के एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली।

उन्होंने एयरफोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में सेवाएं दीं और वायुसेना मुख्यालय में प्रिंसिपल डायरेक्टर एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट की जिम्मेदारी भी निभाई। वे दक्षिणी एयर कमान के एयर डिफेंस कमांडर रहे हैं। इसके साथ ही वायुसेना मुख्यालय (वायु भवन) में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लांस) जैसे रणनीतिक पदों पर भी तैनात रहे। वायुसेना उप-प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने से ठीक पहले वे दक्षिण पश्चिमी एयर कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर और उसके बाद सेंट्रल एयर कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) जैसी सर्वोच्च कमान संभाल चुके हैं।

प्रतिष्ठित सैन्य पुरस्कारों से सम्मानित

देश के प्रति उनकी असाधारण, विशिष्ट और अनुकरणीय सेवाओं के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। आशुतोष दीक्षित को वर्ष 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), 2006 में वायु सेना मेडल (VM) और 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से सम्मानित किया गया। उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका विवाह अर्चना दीक्षित से हुआ है और उनके दो बच्चे हैं।

निवर्तमान उप-प्रमुख नागेश कपूर की विदाई

आशुतोष दीक्षित ने वायुसेना के निवर्तमान उप-प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर का स्थान लिया है। नागेश कपूर 30 जून 2026 को भारतीय वायुसेना में चार दशकों की अपनी गौरवशाली और विशिष्ट सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए। अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर नागेश कपूर ने भी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर देश के अमर शहीदों को नमन किया था और भारतीय वायुसेना के कर्मियों को देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहने का संदेश दिया था। वायुसेना ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब भारत थिएटर कमान (Theater Commands) बनाने और अपनी सैन्य शक्ति को एकीकृत करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, आशुतोष दीक्षित का वायुसेना उप-प्रमुख बनना थिएटरिलाइजेशन की प्रक्रिया को और अधिक व्यावहारिक और मजबूत बनाएगा।


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