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मध्यप्रदेश में ‘एस्ट्रो विलेज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ की शुरुआत: 6 जिलों में विकसित होंगे डार्क स्काई टूरिज्म हब | Pradesh Khabar






मध्यप्रदेश में ‘एस्ट्रो विलेज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ की शुरुआत: 6 जिलों के गांवों में विकसित होंगे डार्क स्काई डेस्टिनेशन | Pradesh Khabar


पर्यटन एवं विकास

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मध्यप्रदेश बनेगा देश का प्रमुख एस्ट्रो-टूरिज्म हब: 6 जिलों में शुरू हुआ ‘एस्ट्रो विलेज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’, पर्यटक कर सकेंगे तारों और आकाशगंगा का अवलोकन
डार्क स्काई एरिया में आधुनिक टेलिस्कोप और इंटरप्रिटेशन सेंटर होंगे स्थापित; 90 दिवसीय ट्रेनिंग पाकर स्थानीय युवा बनेंगे ‘एस्ट्रो गाइड’

भोपाल: मध्यप्रदेश में पर्यटन के नए आयाम विकसित करने के साथ खगोलीय पर्यटन (एस्ट्रो-टूरिज्म) को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा जनजातीय पर्यटन परियोजना के तहत ‘एस्ट्रो विलेज डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ का क्रियान्वयन मई 2026 से प्रारंभ किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक रूप से अंधकारमय (डार्क स्काई) क्षेत्रों को नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे पर्यटक स्वच्छ रात्रिकालीन आकाश में तारों, ग्रहों और आकाशगंगा का अनूठा अनुभव ले सकेंगे।

परियोजना के प्रमुख आकर्षण एवं विशेषताएं

  • प्रथम चरण में 6 गांव चयनित: धार, छिंदवाड़ा, बैतूल, नर्मदापुरम, दमोह और उमरिया जिलों के छह गांवों से हुई शुरुआत।
  • आधुनिक उपकरण व इंफ्रास्ट्रक्चर: आधुनिक टेलिस्कोप, दूरबीन, एस्ट्रो-फोटोग्राफी कैमरे और स्टार गेजिंग प्लेटफॉर्म का निर्माण।
  • इंटरप्रिटेशन सेंटर: खगोलीय घटनाओं और अंतरिक्ष विज्ञान को आसान भाषा में समझाने के लिए विशेष केंद्र।
  • स्थानीय युवाओं का सशक्तिकरण: 90 दिवसीय सघन प्रशिक्षण के बाद गांव के युवाओं को बनाया जाएगा ‘एस्ट्रो गाइड’।

प्रथम चरण में शामिल 6 जिले और उनके चयनित गांव

प्रकाश प्रदूषण से दूर स्थित प्राकृतिक डार्क स्काई वाले छह गांवों को इस परियोजना के पहले चरण में शामिल किया गया है। इन गांवों में खगोलीय पर्यटन के अनुकूल आधारभूत सुविधाएं तैयार की जा रही हैं।

क्र. जिला चयनित ‘एस्ट्रो विलेज’ विकास योजना
1 धार ज्ञानपुरा स्टार गेजिंग प्लेटफॉर्म एवं ऑब्जर्वेशन एरिया
2 छिंदवाड़ा धुसावानी टेलिस्कोप सेटअप व एस्ट्रो-फोटोग्राफी सुविधा
3 बैतूल बांचा इंटरप्रिटेशन सेंटर व एस्ट्रो गाइड ट्रेनिंग
4 नर्मदापुरम ढ़ाबा नाइट स्काई ऑब्जर्वेशन हब
5 दमोह रिछकुड़ी खगोलीय उपकरण व प्रशिक्षण केंद्र
6 उमरिया रंछा डार्क स्काई टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर

“विज्ञान, प्रकृति और ग्रामीण रोजगार का अनूठा संगम” — डॉ. इलैयाराजा टी.

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने बताया कि प्रकाश प्रदूषण से दूर इन क्षेत्रों में पर्यटक स्वच्छ रात्रिकालीन आकाश का आनंद ले सकेंगे। यह पहल न केवल एस्ट्रो-टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगी, बल्कि स्थानीय जनजातीय और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए द्वार भी खोलेगी।

90 दिनों का प्रशिक्षण पाकर स्थानीय युवा बनेंगे ‘एस्ट्रो गाइड’

परियोजना के तहत चयनित गांवों के युवाओं को 90 दिनों की सघन ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे कुशल ‘एस्ट्रो गाइड’ के रूप में तैयार होंगे। ये गाइड पर्यटकों को विभिन्न तारामंडलों, खगोलीय पिंडों और आकाशगंगा से जुड़ी जानकारी देंगे, जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक स्थायी माध्यम तैयार होगा।


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