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Ambikapur News : पांच दिवसीय सप्ताह वापस लिया जावे, कर्मचारियों ने मंहगाई भत्ता, गृहभाड़ा भत्ता मांगा था-5 दिवसीय सप्ताह नहीं-आदेश वापस लेने प्रदर्शन…….

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पांच दिवसीय सप्ताह वापस लिया जावे, कर्मचारियों ने मंहगाई भत्ता, गृहभाड़ा भत्ता मांगा था-5 दिवसीय सप्ताह नहीं-आदेश वापस लेने प्रदर्शन

P.S.YADAV/ब्यूरो चीफ/सरगुजा//  छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य में शासकीय कार्यालयों के संचालन हेतु 08 फरवरी 2022 मंगलवार को जारी निर्देश से प्रदेश के शासकीय सेवकों में व्यापक आक्रोष व्याप्त हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने 5 दिवसीय साप्ताहिक कार्यालयीन व्यवस्था की तत्कालिक मांग पत्रों में मांग नहीं किया गया था, कर्मचारी संगठनों ने लंबित 14 प्रतिशत् मंहगाई भत्ता व केन्द्रीय कर्मचारियों की भाॅति 7 वें वेतनमान् के प्रावधानों के तहत गृहभाड़ा भत्ता की मांग की थीं।छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध के प्रांताध्यक्ष विजय कुमार झा एवं जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने कहा है कि चूंकि मुख्यमंत्री द्वारा धोषणा किया गया था, इसलिए कर्मचारी संगठनों ने इसका स्वागत किया था। किंतु कार्यालयीन अवधि 10.30 से 5.30 के स्थान पर आधा धंटा बढ़ाकर 6 बजे करने की अपेक्षा थीं।

प्रातः 10.30 को कम कर 10 बजे करने से कर्मचारियों विशेषकर महिला कर्मचारियों को स्वीकार्य नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 5 दिवसीय सप्ताह लागू करते हुए 22 फरवरी 22 को आदेश प्रसारित कर तथा राजपत्र में प्रकाशित कर पूरे प्रदेश में कार्यालयीन अवधि 10.30 से 5.30 को परिवर्तित करते हुए 10 से 5.30 करने का निर्देश जारी किया था। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में आक्रोष व्याप्त था। इसके बाद आज सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्देश का कड़ाई से पालन करने व 10 बजे कार्यालय उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश से कर्मचारियों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया। संध की मांग है कि कार्यालयीन समय में संशोधन करते हुए प्रातः 10 बजे के स्थान पर यथावत् 10.30 बजे रखा जावे तथा संध्या आधा धण्टा वृद्वि करते हुए 6 बजे किया जावे तभी 5 दिवसीय सप्ताह स्वीकार्य है। अन्यथा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों विशेषकर महिला कर्मचारियों की दोहरी जवाबदेही को दृष्टिगत् रखते हुए 5 दिवसीय सप्ताह के आदेश को वापस लिया जाकर, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों व केन्द्रीय कर्मचारियों के समान 31 प्रतिशत् मंहगाई भत्ता व 7 वेें वेतनमान् के अनुरूप 20 प्रतिशत् गृहभाड़ा भत्ता दिया जावे।

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झा ने मंत्रालय, संचालनालय, विभागाध्यक्ष कार्यालयों के समय को 10 से 5 के स्थान में 10 से 5.30 किया गया है, किंतु बसों की सुविधा न होने से कर्मचारी पुराने रायपुर से 28 किलोमीटर नवा रायपुर जाने व 28 किलोमीटर आने में समर्थ नहीं है। छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य है कि 2003 से राज्य निर्माण हुए लगभग 18-19 वर्ष हो गए है, किंतु सरकार स्वयं का बस व वाहनचालक, की व्यवथा नहीं कर पाई है। प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये किराये के रूप में भुगतान कर रही है। जितना किराया भुगतान किया उससे 100 से अधिक बस तथा 100 वाहन चालक, 100 कंडेक्टर कुल 200 कर्मचारियों को रोजगार दे सकती थीं। बस मालिकों ने आंदोलन कर किराया बढ़ाने की मांग की थी, जिसे सत्र न्यायालय द्वारा अवैध धोषित कर दिया गया है। बस मालिकों का भी तर्क उनके हित में सत्य है कि बढ़ी हुई मंहगाई, डीजल पेट्रोल की दरों में वृद्वि के अनुरूप सभी बसों के किराये में वृद्वि की गई है, तो उनका भी अधिकार है किराया वृद्वि किया जावे। संध ने मुख्य सचिव को परामर्श दी है कि जिस प्रकार कर्मचारियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराई गई है, उसी प्रकार से देवेन्द्र नगर से नवा रायपुर वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी एसी बस चलाया जावे, तो प्रतिमाह करोड़ों रूपये बचाया जा सकता है।

उसी प्रकार वरिष्ठ अधिकारियों के पास यदि 5 विभाग का प्रभार है, तो 5 विभागों के द्वारा उन्हें चमचमाती गाडि़यां उपलब्ध कराई जाती है। एक अधिकारी को केवल एक ही वाहन की पात्रता सुनिश्चित किए जाने से करोड़ों रूपये बचाया जा सकता है, उससे सरकार स्वयं अपनी बसें क्रय कर सकती है, तथा कर्मचारियों को मंहगाई भत्ता गृह भाड़ा भत्ता प्रदान कर सकती है। प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, प्रांतीय सचिव विश्वनाथ ध्रुव, सी.एल.दुबे, संजय शर्मा, विमल चंद्र कुण्डू, सुरेन्द्र त्रिपाठी, नरेश वाढ़ेर, रामचंद्र ताण्डी, कुंदन साहू, रविराज पिल्ले, सुंदर यादव, दिनेश मिश्रा, राजू गवई, के.आर.वर्मा, प्रदीप उपाध्याय, भजन बाध, बजरंग मिश्रा, अतुल दुबे, शीला बैस, श्वेता टण्डन, लता देवाॅगन, माया यादव, पिंकी ठाकुर आदि नेताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मांग की है कि तत्काल 10 बजे के स्थान पर 10.30 बजे से 6 बजे तक आदेश जारी करने निर्देशित करें अन्यथा 5 दिवसीय सप्ताह वापस लिया जावे। ऐसा न होने पर आज से ही विरोध प्रर्दशन प्रारंभ किया जावेगा।

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